घर में हैं शालिग्राम? तो रोज करें यह एक आरती, दूर होगी हर परेशानी, बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा

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News India Live, Digital Desk : हिंदू धर्म में मूर्ति पूजा का खास महत्व है, लेकिन कुछ स्वरूप ऐसे भी हैं जिन्हें साक्षात भगवान ही माना जाता है और वे स्वयंभू होते हैं। ऐसे ही देव स्वरूप हैं शालिग्राम जी (Shaligram Ji)। यह एक विशेष प्रकार के काले, गोल पत्थर होते हैं, जो नेपाल की गंडकी नदी में पाए जाते हैं। इन्हें किसी प्राण-प्रतिष्ठा की जरूरत नहीं होती, क्योंकि इन्हें भगवान विष्णु का ही साक्षात स्वरूप माना जाता है।

कहते हैं कि जिस घर में भी शालिग्राम जी का वास होता है, वहां कभी कोई दुख या दरिद्रता नहीं आ सकती। ऐसे घर पर हमेशा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

तुलसी जी के बिना शालिग्राम जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। खासकर कार्तिक मास में देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह के दिन शालिग्राम जी की पूजा और आरती का विशेष महत्व होता है। शालिग्राम जी की कृपा पाने और उन्हें प्रसन्न करने का सबसे सरल और शक्तिशाली माध्यम है उनकी आरती।

माना जाता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन और पूरी श्रद्धा से इस आरती को करता है, उसके जीवन से आर्थिक संकट दूर होते हैं, कार्यों में आ रही बाधाएं खत्म होती हैं और घर में सुख-शांति का वास होता है।

 

।। श्री शालिग्राम जी की आरती ।।

(Shri Shaligram Ji Ki Aarti)

शालिग्राम सुनो विनती मेरी,
यह वरदान दो प्रभु जी हमें।
तुम तुलसी के पति कहलाते हो,
तुम भक्तों के कष्ट मिटाते हो,
तुम जिसकी पूजा में आते हो,
उसकी नैया पार लगाते हो,
करते दूर मुसीबत सारी,
रखते लाज हो प्रभु जी मेरी,
शालिग्राम सुनो विनती मेरी।।

तुम हो सबसे बड़े परोपकारी,
तुमसे ही चलती दुनिया सारी,
तुम ही जगत के पालनहारी,
तुम्हारी महिमा सबसे है न्यारी,
तुमको पूजें सभी नर-नारी,
शरण पड़े हैं प्रभु जी तेरी,
शालिग्राम सुनो विनती मेरी।।

तुम ही देते हो सबको सहारा,
तुम बिन कोई नहीं हमारा,
तुम ही हो सबसे प्यारे,
तुम ही हो नैया किनारे,
भरते हो सबके भण्डारे,
कर दो दूर दुविधा मेरी,
शालिग्राम सुनो विनती मेरी।।

तुम्हारी शरण में जो आता है,
वह मन वांछित फल पाता है,
जो तुम्हारा गुणगान गाता है,
वह भव सागर से तर जाता है,
विनती 'सूरज' करता है,
उसको आस प्रभु है तेरी,
शालिग्राम सुनो विनती मेरी।।

शालिग्राम सुनो विनती मेरी,
यह वरदान दो प्रभु जी हमें।।