क्या एक बहू अपने ससुर की संपत्ति से गुजारा भत्ता मांग सकती है? जानिए इस पर कानून क्या कहता है

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समाज में अक्सर यह सवाल उठता है कि पति के न रहने पर क्या एक बहू का अपने ससुर की संपत्ति पर कोई अधिकार होता है? यह एक बहुत ही संवेदनशील और ज़रूरी विषय है, ख़ासकर उन महिलाओं के लिए जो पति के निधन के बाद अकेली रह जाती हैं। इसी उलझन को दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक हालिया फैसले में सुलझाने की कोशिश की है, जिसके बारे में सभी को जानना चाहिए।

सबसे पहले संपत्ति का फर्क समझिए

कोई भी फैसला समझने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि ससुर की संपत्ति दो तरह की हो सकती है:

  1. स्व-अर्जित संपत्ति: यह वह संपत्ति है जो ससुर ने अपनी मेहनत और कमाई से बनाई या खरीदी है।
  2. पैतृक संपत्ति: यह वह संपत्ति होती है जो ससुर को उनके पिता, दादा या परदादा से विरासत में मिली है।

इन दोनों तरह की संपत्तियों पर बहू के अधिकार के लिए नियम अलग-अलग हैं।

हाईकोर्ट ने क्या स्पष्ट किया?

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक विधवा महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह साफ़ किया है कि एक विधवा बहू को अपने ससुर की पैतृक संपत्ति से गुज़ारा भत्ता पाने का पूरा अधिकार है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ससुर की स्व-अर्जित संपत्ति पर बहू इस तरह का कोई कानूनी दावा नहीं कर सकती। आसान शब्दों में कहें तो, अगर ससुर के पास केवल वही संपत्ति है जो उन्होंने खुद बनाई है, तो विधवा बहू उनसे गुज़ारा भत्ता नहीं मांग सकती है।

कानून की शर्तें क्या हैं?

यह अधिकार कुछ शर्तों के साथ आता है। हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA) के अनुसार, एक विधवा बहू अपने ससुर से गुज़ारा भत्ता तब मांग सकती है, जब:

  • उसे अपने पति की संपत्ति से कोई हिस्सा या गुजारा भत्ता न मिल रहा हो।
  • उसकी अपनी कोई आय न हो या वह अपना खर्च उठाने में असमर्थ हो।

यह फैसला उन हजारों महिलाओं के लिए एक बड़ी उम्मीद और सहारा है, जिन्हें पति के निधन के बाद आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यह उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का एक नया रास्ता दिखाता है।

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