बच्चों में कब्ज की पहचान कैसे करें? पिड़ियाट्रिशियन ने बताया छोटे बच्चे को कब्ज हो जाए तो क्या करना चाहिए
बच्चों में पेट की समस्याएं, खास तौर पर कब्ज (Constipation), माता-पिता के लिए रातों की नींद उड़ा देने वाला मुद्दा होता है। जब एक छोटा बच्चा ठीक से पॉटी नहीं करता, तो उसका पूरा रूटीन बिगड़ जाता है-वो रोता है, चिड़चिड़ा हो जाता है और खाना भी छोड़ देता है।
अक्सर नई माओं को समझ नहीं आता कि बच्चा अगर दो दिन तक पॉटी न करे, तो क्या इसे कब्ज मान लें? या फिर रोज़ पॉटी करने के बाद भी उसे कब्ज हो सकता है? मशहूर पिड़ियाट्रिशियन (बच्चों के डॉक्टर) की सलाह के आधार पर, यहाँ हमने बहुत ही सरल भाषा में समझाया है कि कब्ज को कैसे पहचानें और घर पर ही इसका हल कैसे निकालें।
सिर्फ 'पॉटी न आना' कब्ज नहीं है: कैसे पहचानें?
ज्यादातर पैरेंट्स सोचते हैं कि अगर बच्चे ने आज पॉटी नहीं की, तो उसे कब्ज है। लेकिन डॉक्टर बताते हैं कि यह पूरी तरह सच नहीं है। हर बच्चे की बॉडी अलग होती है। कुछ बच्चे दिन में 3 बार जाते हैं, तो कुछ 3 दिन में एक बार-और दोनों ही नॉर्मल हो सकते हैं।
असली कब्ज के लक्षण ये हैं (Checklist):
- कठोर और सूखी पॉटी (Hard Stool): अगर बच्चे की पॉटी छोटे-छोटे कंकड़ जैसी, बहुत सख्त और सूखी है, तो यह कब्ज है।
- जोर लगाना और रोना: पॉटी करते वक्त अगर बच्चे का चेहरा एकदम लाल हो जाए, वो रोने लगे, या बहुत ज्यादा जोर लगा रहा हो, तो इसका मतलब है उसे तकलीफ हो रही है।
- डर की वजह से रोकना: कभी-कभी बच्चे को पिछली बार दर्द हुआ होता है, इसलिए वो डर के मारे पॉटी को अंदर ही रोकने लगते हैं। इसे "वि withholding" कहते हैं। अगर बच्चा टांगें क्रॉस करके खड़ा हो जाए या कोने में छिप जाए, तो समझें उसे प्रेशर है पर वो डर रहा है।
- पेट टाइट होना: हाथ लगाने पर बच्चे का पेट सख्त और फूला हुआ महसूस हो।
- पॉटी में खून: कभी-कभी कठोर मल के कारण एनस (गुदा) छिल जाता है और हल्का खून आ सकता है।
डॉक्टर ने बताया: अगर कब्ज हो जाए तो क्या करें? (Home Remedies & Tips)
पिड़ियाट्रिशियन के अनुसार, 90% मामलों में बच्चों की कब्ज का कारण खान-पान (Diet) और पानी की कमी होता है। इसे बिना दवाई के, इन घरेलू तरीकों से ठीक किया जा सकता है:
1. पानी और फाइबर का "मैजिक"
कब्ज का सबसे बड़ा दुश्मन है-पानी।
- पानी बढ़ाएं: अगर बच्चा 6 महीने से बड़ा है, तो उसे थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पिलाते रहें। शरीर में नमी होगी तो मल अपने आप नरम हो जाएगा।
- फाइबर वाले फूड: बच्चे की डाइट से मैदे वाली चीजें (बिस्कुट, ब्रेड) कम करें। इसकी जगह फाइबर से भरपूर चीजें दें, जैसे-दलिया, ओट्स, या चोकर वाले आटे की रोटी।
2. 'P' वाले फलों की दोस्ती कराएं
डॉक्टर्स अक्सर एक रूल बताते हैं- The 'P' Fruits.
सर्दियों या गर्मियों में बच्चों को पपीता (Papaya), नाशपाती (Pear), आलूबुखारा (Prunes/Plums) और आड़ू (Peach) खिलाएं। पपीता कब्ज के लिए नेचुरल लैक्सेटिव का काम करता है। अमरूद (Guava) भी बहुत फायदेमंद है, लेकिन ध्यान रहे कि उसे बीज हटाकर या पल्प (गूदा) बनाकर दें।
3. पेट की मालिश (Tummy Massage)
छोटे बच्चों के लिए यह बहुत असरदार है।
- बच्चे को पीठ के बल लिटाएं और उसकी नाभि के चारों ओर गोल-गोल (Clockwise direction) हल्का दबाव डालकर मालिश करें। इसके अलावा, उसके पैरों को पकड़कर 'साइकिल' चलाने वाले मोशन में घुमाएं। इससे गैस निकलती है और आंतों में जमा मल आगे खिसकता है।
4. दूध कम, खाना ज्यादा
एक बहुत बड़ी गलती जो पेरेंट्स करते हैं, वो है बच्चे को बहुत ज्यादा दूध पिलाना। अगर बच्चा 1 साल से बड़ा है और दिन भर बोतल से दूध पीता रहता है, तो उसे ठोस आहार (Solid food) की भूख नहीं लगेगी। दूध में फाइबर नहीं होता, जो कब्ज का एक बड़ा कारण बनता है। दूध की मात्रा कम करें और घर का बना खाना ज्यादा दें।
5. पॉटी ट्रेनिंग और सही पोजीशन
अगर बच्चा थोड़ा बड़ा है (3-4 साल), तो उसे इंडियन टॉयलेट पोजीशन (उकड़ूं बैठना) में बैठाने की आदत डालें या वेस्टर्न टॉयलेट के आगे एक स्टूल रख दें ताकि उसके घुटने कूल्हों से ऊपर रहें। इससे प्रेशर अच्छा बनता है।
सावधानी:
डॉक्टर सलाह देते हैं कि बच्चे को अपनी मर्जी से दवा या 'बत्ती' (Suppository) न लगाएं, जब तक कि डॉक्टर न कहे। अगर बच्चे को बहुत दर्द हो, पेट बहुत ज्यादा फूल गया हो या पॉटी में ज्यादा खून दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।