हिंद महासागर में कैसे समुद्री अपराध बन रहा है आतंकवाद और हाइब्रिड खतरों की फंडिंग का जरिया
News India Live, Digital Desk: हिंद महासागर, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों में से एक है, अब केवल व्यापारिक जहाजों की आवाजाही तक ही सीमित नहीं रह गया है। पिछले कुछ सालों में यह क्षेत्र समुद्री अपराधों का एक बड़ा केंद्र बन गया है, जो न केवल इस क्षेत्र की शांति के लिए बल्कि भारत सहित कई देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर 'हाइब्रिड खतरा' (Hybrid Threat) पैदा कर रहा है।
साधारण शब्दों में कहें तो ड्रग्स, हथियार, मानव तस्करी और अवैध मछली पकड़ने जैसे समुद्री अपराधों से कमाया गया पैसा अब सीधे तौर पर आतंकवाद और अन्य अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों को फंड करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्या हैं 'ग्रे हल' और 'सफेद नावें'?
इस पूरे खेल को समझने के लिए इन दो शब्दों का मतलब जानना जरूरी है:
- सफेद नावें (White Boats): ये सामान्य व्यावसायिक या नागरिक जहाज होते हैं, जैसे मछली पकड़ने वाली नावें, कार्गो शिप या निजी यॉट। अपराधी इन्हीं आम जहाजों का इस्तेमाल अपनी अवैध गतिविधियों को छिपाने के लिए करते हैं। ऊपर से देखने पर ये सामान्य नावें लगती हैं, लेकिन अंदर से ये ड्रग्स, हथियार या अवैध सामान की तस्करी कर रही होती हैं।
- ग्रे हल (Grey Hulls): यह शब्द नौसेना या तट रक्षक (कोस्ट गार्ड) के जहाजों के लिए इस्तेमाल होता है, जिनका काम कानून लागू करना और समुद्र की रक्षा करना है। हालांकि, कई बार विद्रोही गुट या आतंकवादी संगठन नौसेना के पुराने जहाजों को खरीदकर या उन पर कब्ज़ा करके उन्हें अपने गलत कामों के लिए इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
कैसे समुद्री अपराध हाइब्रिड खतरों को पैसा पहुंचा रहा है?
समुद्र में होने वाले अपराध अब सिर्फ चोरी या डकैती तक सीमित नहीं हैं। यह एक बहुत बड़ा और संगठित नेटवर्क बन चुका है, जिसके तार आतंकवाद से सीधे जुड़े हैं:
- ड्रग्स और हथियारों की तस्करी: यह सबसे बड़ा जरिया है। हिंद महासागर के रास्ते अफगानिस्तान और ईरान से ड्रग्स की बड़ी खेप दुनिया भर में भेजी जाती है। इससे जो पैसा आता है, उसे आतंकी संगठन हथियार खरीदने, नए लड़ाकों की भर्ती करने और हमलों की योजना बनाने में इस्तेमाल करते हैं।
- अवैध मछली पकड़ना (Illegal Fishing): यह सुनने में छोटा अपराध लग सकता है, लेकिन यह बहुत बड़ा खतरा है। कई आतंकी समूह मछली पकड़ने वाली अवैध नौकाओं का इस्तेमाल अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए करते हैं। वे इन नावों के जरिए जासूसी करते हैं, हथियार एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाते हैं और इनसे कमाए गए पैसे का इस्तेमाल आतंकी फंडिंग में करते हैं।
- समुद्री डाकुओं का आतंक: सोमालिया के तट के पास समुद्री डाकू आज भी सक्रिय हैं। ये जहाजों को अगवा कर मोटी फिरौती वसूलते हैं। खुफिया रिपोर्टों से पता चला है कि इस फिरौती का एक बड़ा हिस्सा अल-शबाब जैसे आतंकवादी संगठनों तक पहुंचता है।
- मानव तस्करी: हिंद महासागर का इस्तेमाल मानव तस्करी के लिए भी किया जा रहा है, जिससे कमाया गया पैसा भी आतंकी गुटों को मजबूत करता है।
भारत के लिए क्या है चुनौती?
भारत की एक बहुत लंबी समुद्री सीमा है और हिंद महासागर में उसकी एक केंद्रीय स्थिति है। इस क्षेत्र में बढ़ता समुद्री अपराध और आतंकवाद का गठजोड़ भारत के लिए एक सीधा खतरा है। ये 'हाइ-थ्रेट्स' (Hybrid Threats) कहलाते हैं क्योंकि इनमें पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ आर्थिक, राजनीतिक और सूचनात्मक तरीकों से भी हमला किया जाता है, जिससे देश को अंदर से कमजोर किया जा सके।
इस चुनौती से निपटने के लिए भारतीय नौसेना और तट रक्षक बल लगातार निगरानी कर रहे हैं और दूसरे देशों के साथ मिलकर संयुक्त अभ्यास भी कर रहे हैं ताकि इस खतरनाक नेटवर्क को तोड़ा जा सके। यह लड़ाई सिर्फ समुद्र में नहीं, बल्कि जमीन पर भी खुफिया जानकारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से लड़ी जा रही है।