कानपुर में खौफनाक मंजर पूर्व प्रधान के बेटे ने 10 मिनट तक की अंधाधुंध फायरिंग, लोगों बचानी पड़ी जान
News India Live, Digital Desk : अक्सर हम फिल्मों में देखते हैं कि विलेन अपने 50 गुर्गों के साथ आता है और हीरो की पार्टी खराब कर देता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) में बीते गुरुवार की रात जो हुआ, वह किसी फिल्म का सीन नहीं, बल्कि एक डरावनी हकीकत थी।
सोचिए, एक परिवार में बर्थडे की खुशियां मनाई जा रही हों, केक कट रहा हो, रिश्तेदार हंस-बोल रहे हों और तभी गोलियों की आवाज से पूरा माहौल दहल जाए।
कानपुर के महाराजपुर (Maharajpur) इलाके के एक गेस्ट हाउस में एक बर्थडे पार्टी चल रही थी, लेकिन जश्न का यह माहौल चीख-पुकार में बदल गया जब एक पूर्व प्रधान के बेटे (Former Pradhan's Son) ने अपनी दबंगई दिखानी शुरू की।
बिन बुलाए मेहमान का हंगामा
यह मामला सरसौल क्षेत्र का है। वहां रहने वाले प्रकाश चंद्र दीक्षित अपने बेटे मयंक दीक्षित का जन्मदिन मना रहे थे। पार्टी पूरे शबाब पर थी कि तभी रहनस गांव के पूर्व प्रधान का बेटा वीरवर्धन सिंह वहां आ धमका। बताया जा रहा है कि उसे पार्टी में बुलाया नहीं गया था (Uninvited Guest)।
जैसे ही वह अंदर आया, उसने हवाई फायरिंग शुरू कर दी। जब मयंक और उनके रिश्तेदारों ने इसका विरोध किया और उसे जाने के लिए कहा, तो वह आग-बबूला हो गया। उस वक्त तो लोगों ने उसे समझा-बुझाकर वहां से भेज दिया, लेकिन असली 'पिक्चर' अभी बाकी थी।
"फिल्म स्टाइल" में वापसी और 10 मिनट का तांडव
थोड़ी देर बाद वीरवर्धन वापस आया, लेकिन इस बार वह अकेला नहीं था। रिपोर्ट्स के मुताबिक़, वह अपने साथ करीब 50 लोगों की फौज लेकर आया था जो कई गाड़ियों में भरकर आए थे।
इसके बाद जो हुआ, उसने गेस्ट हाउस को छावनी बना दिया। इन लोगों ने न सिर्फ़ मयंक के परिवार के साथ मारपीट की, बल्कि लगातार 10 मिनट तक (10 Minutes Firing) पूरे परिसर में घूम-घूम कर कई राउंड फायरिंग की।
कमरों में दुबके मेहमान
जरा उस खौफ का अंदाजा लगाइये! बाहर गोलियां चल रही थीं और अंदर बच्चे, औरतें और मेहमान अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। जिसको जहाँ जगह मिली चाहे बाथरूम हो या कमरा वहां छिप गया और अंदर से कुंडी लगा ली। लोग बस भगवान से यही दुआ मांग रहे थे कि किसी तरह पुलिस आ जाए।
हमलावर अपनी 'सरकार' होने की धौंस देते रहे और दहशत फैलाकर मौके से फरार हो गए।
पुलिस का एक्शन
गनीमत यह रही कि इस अंधाधुंध गोलीबारी में किसी की जान नहीं गई, लेकिन यह किसी बड़े हादसे से कम नहीं था। पीड़ित मयंक के पिता की शिकायत पर पुलिस ने वीरवर्धन सिंह और उसके 9 साथियों समेत कई अज्ञात लोगों पर हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस ने आरोपियों की एक कार को भी कब्जे में लिया है और अब उनकी धरपकड़ के लिए छापेमारी कर रही है।
हमारी राय:
खुशी के मौके पर ऐसा जानलेवा दिखावा (Harsh Firing) और गुंडागर्दी कब तक चलेगी? एक बर्थडे पार्टी, जो जिंदगी का जश्न होनी चाहिए थी, वह कई लोगों के लिए जिंदगी भर का खौफनाक साक बन गई। ऐसे बाहुबलियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।