सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक मास्टरपीस थी Homebound ,ऑस्कर में जगह न मिलने पर उठा गहरा सवाल
News India Live, Digital Desk: हम भारतीयों का ऑस्कर के साथ एक पुराना और काफी भावुक रिश्ता रहा है। हर साल जब हमारी फिल्में विदेशी सरजमीं पर सम्मान पाने की दौड़ में शामिल होती हैं, तो हर सिनेप्रेमी की उम्मीदें बढ़ जाती हैं। लेकिन कभी-कभी कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो दिल जीत लेती हैं, पर शायद किन्हीं कारणों से उस लिस्ट में जगह नहीं बना पातीं। कुछ ऐसा ही हुआ है फिल्म 'Homebound' के साथ, जिसका ऑस्कर की रेस से बाहर होना कई लोगों को खटक रहा है।
बॉलीवुड के मशहूर फिल्म मेकर करण जौहर ने भी इस खबर पर अपनी नाराजगी और दुख जताया है। उन्होंने साफ़ लफ़्ज़ों में कहा कि "यह बड़े अफसोस की बात (It's a pity) है।" करण के मुताबिक, 'Homebound' केवल एक सामान्य फिल्म नहीं है, बल्कि भारत में बनी अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है।
अक्सर बड़ी-बड़ी और ग्लैमरस फिल्मों के शोर में ऐसी सादगी और गहराई वाली फिल्में दब जाती हैं। करण जौहर का समर्थन इस बात की गवाही देता है कि फिल्म का कंटेंट कितना मजबूत रहा होगा। सोशल मीडिया पर भी लोग चर्चा कर रहे हैं कि क्या भारत से फिल्मों का चयन करते समय कहीं न कहीं हम चूक कर रहे हैं? क्योंकि 'Homebound' जैसे सिनेमा में वो काबिलियत थी जो दुनिया को भारतीय संस्कृति और यहाँ की कहानियों की गहराई से रू-ब-रू करवा सके।
किसी फिल्म का अवॉर्ड जीतना एक बात है, लेकिन एक अनुभवी फिल्म मेकर का यह कहना कि 'यह भारत की श्रेष्ठ फिल्मों में से एक है', अपने आप में किसी बड़े अवॉर्ड से कम नहीं है। हालाँकि, ऑस्कर की रेस अब खत्म हो चुकी है, लेकिन इसने एक बहस जरूर छेड़ दी है कि बेहतरीन सिनेमा को वो ग्लोबल पहचान कैसे मिले जिसका वो वास्तव में हकदार है।
वैसे, आपने अगर 'Homebound' देखी है, तो आपको क्या लगता है? क्या इसे ऑस्कर में जाना चाहिए था? क्या वाकई हम अपनी सबसे मजबूत फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सही समय पर नहीं पहुँचा पाते? अपनी राय जरूर शेयर करें।