होम लोन लेने जा रहे हैं? Fixed या Floating - किसमें है आपकी भलाई? कहीं गलत फैसला जेब न कर दे खाली!
अपना घर खरीदने का सपना... बड़ा खूबसूरत होता है। लेकिन इस सपने को पूरा करने के रास्ते में एक ऐसा सवाल आता है, जो अच्छे-अच्छों का सिर घुमा देता है - 'कौन सा होम लोन इंटरेस्ट रेट चुनें: फिक्स्ड या फ्लोटिंग?'
यह सवाल सिर्फ एक सवाल नहीं, बल्कि एक ऐसा फैसला है जो अगले 15-20 साल तक आपकी जेब पर सीधा असर डालने वाला है। बैंक वाले आपको कई ऑप्शन दिखाएंगे - फिक्स्ड, फ्लोटिंग, हाइब्रिड। लेकिन घबराइए नहीं। चलिए, आज इन तीनों को चाय पर चर्चा वाले अंदाज़ में समझते हैं, ताकि आप अपने लिए सबसे सही फैसला ले सकें।
1. फिक्स्ड रेट (Fixed Rate): यानी, 'टेंशन-फ्री' वाला रास्ता
जैसा नाम, वैसा काम। फिक्स्ड रेट का मतलब है कि आपके होम लोन का ब्याज एक बार जो तय हो गया, वो पूरे लोन पीरियड (जैसे 20 साल) तक वही रहेगा। चाहे बाज़ार में ब्याज दरें आसमान छूने लगें या ज़मीन पर आ जाएं, आपकी EMI पर एक रुपये का भी फर्क नहीं पड़ेगा।
- यह किसके लिए अच्छा है?
यह उन लोगों के लिए बेस्ट है जिन्हें अपनी ज़िंदगी में सरप्राइज पसंद नहीं हैं। जो हर महीने एक तय बजट पर चलते हैं और चाहते हैं कि उनकी EMI हमेशा फिक्स रहे ताकि वे बाकी खर्चों की प्लानिंग आसानी से कर सकें। अगर आप ज़्यादा रिस्क नहीं लेना चाहते और चैन की नींद सोना चाहते हैं, तो यह आपके लिए है। - नुकसान क्या है?
फिक्स्ड रेट आमतौर पर फ्लोटिंग रेट से 1-2% महंगा होता है। और सबसे बड़ा नुकसान यह है कि अगर भविष्य में RBI ब्याज दरें घटाता है, तो आपको उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। आप उसी ऊंची दर पर EMI भरते रहेंगे, जबकि दूसरों की EMI कम हो जाएगी।
2. फ्लोटिंग रेट (Floating Rate): यानी, 'किस्मत का खेल'
यह फिक्स्ड रेट का बिल्कुल उल्टा है। फ्लोटिंग का मतलब है 'तैरता हुआ'। यानी, आपके लोन का ब्याज बाज़ार के साथ-साथ ऊपर-नीचे होता रहेगा। जब RBI ब्याज दरें बढ़ाएगा, तो आपकी EMI भी बढ़ जाएगी। और जब घटाएगा, तो आपकी EMI भी कम हो जाएगी।
- यह किसके लिए अच्छा है?
यह उन लोगों के लिए है जो थोड़ा रिस्क लेने से नहीं डरते और जिन्हें लगता है कि भविष्य में ब्याज दरें कम होंगी। इसकी शुरुआत फिक्स्ड रेट से कम ब्याज पर होती है, इसलिए शुरुआती कुछ साल आपकी जेब पर बोझ कम पड़ता है। - नुकसान क्या है?
इसमें सबसे बड़ा रिस्क 'अनिश्चितता' है। आप कभी भी पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि अगले महीने आपकी EMI कितनी आएगी। अगर ब्याज दरें लगातार बढ़ने लगीं, तो आपका पूरा महीने का बजट बिगड़ सकता है और लोन का बोझ बहुत भारी लग सकता है।
3. हाइब्रिड रेट (Hybrid Rate): यानी, 'बीच का रास्ता'
यह फिक्स्ड और फ्लोटिंग का मिक्सचर है। इसमें बैंक आपसे कहता है कि शुरुआत के कुछ साल (जैसे 3 या 5 साल) आपका रेट फिक्स्ड रहेगा और उसके बाद यह अपने आप फ्लोटिंग में बदल जाएगा।
- यह किसके लिए अच्छा है?
यह उन नौकरीपेशा लोगों के लिए अच्छा है जिन्हें लगता है कि अगले 3-5 साल में उनकी सैलरी काफी बढ़ जाएगी। शुरुआत के कुछ साल वे फिक्स्ड EMI का सुकून ले सकते हैं और बाद में जब उनकी आमदनी बढ़ जाए, तो वे घटती-बढ़ती EMI का रिस्क लेने के लिए तैयार रहते हैं।
तो आखिरी फैसला क्या है? आपके लिए क्या सही है?
देखिए, इसका कोई एक सीधा जवाब नहीं है। यह पूरी तरह से आपकी ज़रूरत, आपकी इनकम और रिस्क लेने की आपकी क्षमता पर निर्भर करता है।
- चैन की नींद चाहिए और बजट फिक्स रखना है? -> फिक्स्ड रेट चुनें।
- थोड़ा रिस्क ले सकते हैं और कम EMI से शुरुआत करना चाहते हैं? -> फ्लोटिंग रेट पर दांव लगाएं।
- शुरुआत में सुरक्षा और बाद में बाज़ार का फायदा उठाना चाहते हैं? -> हाइब्रिड रेट पर विचार करें।
कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक से इन तीनों विकल्पों के बारे में खुलकर बात करें, सारे नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ें और फिर अपने सपनों के घर के लिए पहला कदम बढ़ाएं!