RBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा में ऐतिहासिक बदलाव साल में दो बार होंगी परीक्षाएं 2027 से लागू होगा नया फॉर्मूला
News India Live, Digital Desk: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) के कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप, राजस्थान सरकार और शिक्षा विभाग ने बोर्ड परीक्षाओं के ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब छात्रों को बोर्ड परीक्षा के 'तनाव' से मुक्ति दिलाने के लिए साल में दो बार बोर्ड परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। यह नया नियम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभावी होगा, यानी जो छात्र वर्तमान में 9वीं कक्षा में हैं, वे इस नए सिस्टम के तहत पहली बार परीक्षा देंगे।
1. साल में दो बार परीक्षा: कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
बोर्ड की योजना के अनुसार, अब छात्रों के पास एक ही साल में दो बार परीक्षा में बैठने का विकल्प होगा।
पहला अवसर (Term 1): यह परीक्षा संभवतः सितंबर-अक्टूबर के आसपास होगी।
दूसरा अवसर (Term 2): यह पारंपरिक रूप से फरवरी-मार्च में आयोजित की जाएगी।
विकल्प की आजादी: छात्र चाहें तो दोनों परीक्षाओं में बैठ सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छात्र जिस परीक्षा में बेहतर अंक (Best of Two) प्राप्त करेंगे, उसी स्कोर को उनके फाइनल रिजल्ट और मार्कशीट में जोड़ा जाएगा।
2. क्यों लिया गया यह फैसला? (तनाव मुक्त शिक्षा)
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि साल में केवल एक बार परीक्षा होने से छात्रों पर मानसिक दबाव बहुत अधिक रहता था।
अवसर की समानता: यदि कोई छात्र बीमारी या किसी अन्य कारण से एक परीक्षा नहीं दे पाता, तो उसका पूरा साल बर्बाद नहीं होगा।
सुधार की गुंजाइश: यदि पहले प्रयास में अंक कम आते हैं, तो छात्र को अपनी कमियों को सुधारने के लिए तुरंत दूसरा मौका मिलेगा।
कोचिंग कल्चर पर लगाम: इस कदम से 'रट्टा मार' पढ़ाई और कोचिंग सेंटरों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
3. सिलेबस और मार्किंग स्कीम में बदलाव
साल में दो बार परीक्षा होने का मतलब यह नहीं है कि सिलेबस आधा कर दिया जाएगा।
संपूर्ण पाठ्यक्रम: दोनों ही परीक्षाओं में पूरे सिलेबस से प्रश्न पूछे जा सकते हैं, ताकि छात्र की विषय पर पकड़ मजबूत रहे।
प्रश्नों का स्वरूप: प्रश्न पत्र में बहुविकल्पीय (MCQs) और विश्लेषणात्मक प्रश्नों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
सतत मूल्यांकन: बोर्ड अब केवल फाइनल परीक्षा पर निर्भर रहने के बजाय स्कूल स्तर पर होने वाले इंटरनल असेसमेंट को भी अधिक महत्व देगा।
4. शिक्षकों और स्कूलों के लिए नई चुनौती
इस नए सिस्टम को लागू करने के लिए RBSE को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव करने होंगे। साल में दो बार पेपर सेट करना, मूल्यांकन (Evaluation) की प्रक्रिया और रिजल्ट घोषित करना बोर्ड के लिए एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी। शिक्षा विभाग जल्द ही इसके लिए विस्तृत गाइडलाइंस और नया एकेडमिक कैलेंडर जारी करेगा।
5. क्या 12वीं पर भी लागू होगा यह नियम?
फिलहाल यह नियम मुख्य रूप से कक्षा 10वीं के लिए प्रस्तावित है। कक्षा 12वीं के लिए बोर्ड अभी उच्च शिक्षा संस्थानों और प्रतियोगी परीक्षाओं (JEE/NEET) के तालमेल को देख रहा है। संभावना है कि 10वीं की सफलता के बाद इसे 12वीं पर भी लागू किया जा सकता है।