Herbs in Autumn : शायद आप ये नहीं जानते शरद ऋतु में सिर्फ इन 5 चीजों को खाने से बन जाएंगे सुपर-हेल्दी

Post

News India Live, Digital Desk: Herbs in Autumn : जब सर्दियां दस्तक देती हैं और 'शरद ऋतु' का आगमन होता है, तो मौसम में एक खास बदलाव महसूस होता है. यह वो समय है जब हमारी प्रकृति भी बदलती है, और आयुर्वेद मानता है कि इस बदलाव के साथ हमारे खान-पान में भी बदलाव जरूरी है, ताकि हम स्वस्थ रहें और बीमारियों से बचे रहें. सर्द ऋतु में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए, इसका ज्ञान हमें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है. अगर आप इस मौसम में बिना बीमारी के फिट रहना चाहते हैं, तो आयुर्वेद के इन सुझावों को अपनाना आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा.

आयुर्वेद के अनुसार सर्द ऋतु की पहचान:

आयुर्वेद में शरद ऋतु (जो आमतौर पर अक्टूबर से दिसंबर तक मानी जाती है, यानी हल्की सर्दी और फिर ठंडी का आगमन) को पित्त दोष और वात दोष के बढ़ने का समय माना गया है. इस दौरान हमारा पाचन तंत्र थोड़ा कमजोर हो जाता है और हमें ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए, जो आसानी से पच जाएं और शरीर को अंदर से मजबूत बनाएं. 'सर्द ऋतु स्वास्थ्य' के लिए ये बातें जानना बेहद जरूरी है.

शरद ऋतु में क्या खाएं (सर्द ऋतु आहार टिप्स):

  1. घी और तेल का सेवन (रूखेपन को दूर करे):
    इस मौसम में हवा में रूखापन बढ़ जाता है. घी, जैतून का तेल या तिल का तेल जैसी चीजों का सेवन लाभकारी होता है. दालों और सब्जियों में घी या तेल का प्रयोग करें, जो वात दोष को शांत करता है और त्वचा को भी नर्म रखता है. 'शरद ऋतु में त्वचा की देखभाल' के लिए यह अच्छा है.
  2. मीठे और कड़वे रस (पित्त शांत करने के लिए):
    शहद, गुड़, मीठे फल (सेब, नाशपाती, अनार), और कड़वे स्वाद वाली चीजें जैसे करेला या मेथी के दाने भी पित्त को संतुलित करने में मदद करते हैं. मीठा भोजन वात और पित्त दोनों को शांत करता है.
  3. दालें और अंकुरित अनाज:
    मूंग दाल, मसूर दाल जैसी हल्की और आसानी से पचने वाली दालों का सेवन करें. अंकुरित अनाज भी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और इस मौसम में शरीर को मजबूती देते हैं.
  4. गर्म मसाले और जड़ी-बूटियां:
    अदरक, लहसुन, हल्दी, काली मिर्च, लौंग, दालचीनी जैसे गर्म मसाले भोजन में शामिल करें. ये इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं और शरीर को बीमारियों से लड़ने की शक्ति देते हैं. तुलसी और गिलोय जैसी जड़ी-बूटियों का काढ़ा भी फायदेमंद होता है. 'सर्द ऋतु में इम्यूनिटी' बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है.
  5. गुनगुना पानी: दिन भर गुनगुना पानी पिएं. यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है और पाचन को बेहतर बनाता है.

शरद ऋतु में क्या न खाएं (सर्द ऋतु परहेज):

  1. बहुत तीखा या खट्टा भोजन:
    बहुत ज्यादा तीखा, खट्टा या मसालेदार भोजन भी पित्त दोष को बढ़ा सकता है, जिससे पेट में जलन या एसिडिटी जैसी समस्या हो सकती है.
  2. तला हुआ और जंक फूड:
    पचने में भारी होने के कारण, तले हुए खाद्य पदार्थ और प्रोसेस्ड जंक फूड से इस मौसम में बचना चाहिए. ये पाचन क्रिया को धीमा कर देते हैं और पेट संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं.
  3. दही और छाछ का अधिक सेवन:
    गर्मी के दिनों में दही और छाछ भले ही फायदेमंद हों, लेकिन सर्द ऋतु में इनका अधिक सेवन कफ और जुकाम की समस्या बढ़ा सकता है. 'सर्दियों में दही' के अधिक सेवन से बचें.
  4. पेट में गैस बनाने वाले खाद्य पदार्थ:
    कुछ दालें (जैसे राजमा, छोले) या पत्तागोभी जैसी सब्जियां गैस और सूजन पैदा कर सकती हैं. इनका सेवन सीमित मात्रा में करें या अच्छी तरह पकाकर ही खाएं.

आयुर्वेद के इन सरल नियमों को अपनाकर आप सर्द ऋतु में न केवल बीमारियों से बचे रहेंगे, बल्कि खुद को अंदर से ऊर्जावान और खुश महसूस करेंगे. 'आयुर्वेदिक लाइफस्टाइल' अपनाने से आप 'सर्दियों में स्वस्थ' रह सकते हैं.

--Advertisement--