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April 25 2026 09:43 pm

पंजाब में हीटवेव का तांडव, 42 डिग्री के पार पहुंचा पारा, जानें कब मिलेगी चिलचिलाती गर्मी से राहत

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News India Live, Digital Desk: पंजाब में अप्रैल के महीने में ही जून जैसी तपिश महसूस होने लगी है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में भीषण लू (Heatwave) को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। अगले 72 घंटों तक पंजाब के मैदानी इलाकों में सूरज की तपिश और गर्म हवाओं के थपेड़े लोगों को बेहाल करेंगे। हालांकि, इस भीषण गर्मी के बीच राहत की एक उम्मीद भी जागी है, क्योंकि पहाड़ों पर एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने वाला है।

भीषण गर्मी और लू का 'येलो अलर्ट'

पंजाब के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। भटिंडा, लुधियाना और पटियाला जैसे शहरों में पारा 42 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है। मौसम विभाग ने अगले 3 दिनों (24 अप्रैल तक) के लिए लू का 'येलो अलर्ट' जारी किया है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच गर्म पछुआ हवाएं चलने के कारण घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।

कब बरसेगा राहत का अमृत?

चिलचिलाती धूप से परेशान पंजाबियों के लिए अच्छी खबर यह है कि 25 अप्रैल से मौसम का मिजाज बदल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, 23 अप्रैल की रात से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ दस्तक देगा। इसके प्रभाव से:

25 और 26 अप्रैल को पंजाब के कई हिस्सों में बादल छा सकते हैं।

कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और तेज हवाएं (30-40 किमी/घंटा) चलने की संभावना है।

इससे तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आ सकती है, जिससे लू से राहत मिलेगी।

खेती और स्वास्थ्य पर असर

कृषि विशेषज्ञों ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए किसानों को फसलों, विशेषकर सब्जियों और बागवानी फसलों में हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी कर लोगों से निर्जलीकरण (Dehydration) से बचने के लिए अधिक पानी पीने, सूती कपड़े पहनने और सिर को ढककर बाहर निकलने की अपील की है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को सीधी धूप से बचने की सलाह दी गई है।

पड़ोसी राज्यों का भी बुरा हाल

केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के भी अधिकांश हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में हैं। चंडीगढ़ में भी तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि सप्ताह के अंत में होने वाली बारिश ही इस बार गर्मी के 'प्री-मैच्योर' कहर को कुछ कम कर पाएगी।