Post-Micturition Dribble: क्या पेशाब करने के बाद अंडरवियर में टपकती हैं बूंदें? जानिए क्या है यह समस्या, इसके मुख्य कारण और आसान इलाज

Post-Micturition Dribble: क्या पेशाब करने के बाद अंडरवियर में टपकती हैं बूंदें? जानिए क्या है यह समस्या, इसके मुख्य कारण और आसान इलाज

पुरुषों में अक्सर यह देखा जाता है कि टॉयलेट जाकर पेशाब करने और पूरी तरह संतुष्ट होकर बाहर निकलने के तुरंत बाद, या कपड़े ठीक करते वक्त मूत्रमार्ग से अनचाहे रूप से कुछ बूंदें रिस जाती हैं। इस अचानक हुए रिसाव से अंडरवियर गीला हो जाता है, दाग लग जाते हैं और कई बार दुर्गंध व स्वच्छता (Hygiene) को लेकर भारी असहजता और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। बहुत से लोग झिझक या डर के कारण इस बारे में किसी से बात नहीं करते और इसे कोई गंभीर गुप्त रोग या प्रोस्टेट का गंभीर विकार मानकर तनाव में आ जाते हैं।

चिकित्सा विज्ञान (Urology) की भाषा में इस स्थिति को 'पोस्ट-मिक्चुरिशन ड्रिबल' (Post-Micturition Dribble - PMD) या बोलचाल में 'आफ्टर-ड्रिबल' (After-Dribble) कहा जाता है। यह पेशाब के अनियंत्रित रिसाव (Urinary Incontinence) का एक विशिष्ट रूप है, जो दुनिया भर में लाखों पुरुषों में बेहद आम है।

यह समस्या क्यों होती है? समझिए शरीर की आंतरिक बनावट

पुरुषों के मूत्र तंत्र में मूत्राशय (Bladder) से पेशाब को बाहर निकालने वाली नली को यूरेथ्रा (Urethra) कहा जाता है। यूरेथ्रा का एक हिस्सा मूत्राशय के आधार पर एक 'यू' (U) आकार का मोड़ बनाता है, जिसे बल्बार यूरेथ्रा (Bulbar Urethra) कहते हैं।

सामान्य प्रक्रिया में, जब कोई व्यक्ति पेशाब करता है, तो मूत्राशय खाली होने के बाद पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां (विशेष रूप से बल्बोस्पोंजियोसस मांसपेशी - Bulbospongiosus Muscle) सिकुड़ती हैं। यह संकुचन मूत्रमार्ग के घुमावदार हिस्से में बची हुई आखिरी बूंदों को बाहर धकेल देता है।

लेकिन जब पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां उम्र, गतिहीन जीवनशैली, लगातार तनाव या वजन बढ़ने के कारण कमजोर या ढीली पड़ जाती हैं, तो वे पूरी ताकत से संकुचित नहीं हो पातीं। नतीजतन, पेशाब खत्म होने के बाद भी कुछ बूंदें यूरेथ्रा के मोड़ में फंसी रह जाती हैं। जैसे ही व्यक्ति टॉयलेट से आगे बढ़ता है, झुकता है, बैठता है या चलता है, शरीर की हलचल से वह फंसा हुआ पेशाब बाहर निकलकर अंडरवियर को गीला कर देता है।

क्या यह प्रोस्टेट ग्रंथि की बीमारी का संकेत है?

कई पुरुषों के मन में यह आशंका होती है कि कहीं यह बढ़े हुए प्रोस्टेट (BPH - Benign Prostatic Hyperplasia) या प्रोस्टेट कैंसर का लक्षण तो नहीं है।

यूरोलॉजिस्ट्स के अनुसार, अधिकांश युवा और मध्यम आयु वर्ग के पुरुषों में पीएमडी का कारण केवल मांसपेशियों की कमजोरी और यांत्रिक (Mechanical) रुकावट होता है, न कि प्रोस्टेट रोग। हालांकि, 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में यदि पेशाब टपकने के साथ-साथ निम्नलिखित लक्षण भी दिखाई दें, तो प्रोस्टेट की जांच कराना आवश्यक होता है:

  • पेशाब की धार का बेहद कमजोर होना या रुक-रुक कर आना।

  • पेशाब शुरू करने में जोर लगाना या काफी समय लगना (Hesitancy)।

  • रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना (Nocturia)।

  • पेशाब करने के बाद भी मूत्राशय भरा हुआ महसूस होना।

इसके अलावा, मूत्रमार्ग में पुराना संक्रमण, स्ट्रिक्चर (Urethral Stricture - नली का सिकुड़ना), या तंत्रिका तंत्र (Nerve) से जुड़ी दिक्कतें भी इस स्थिति को बढ़ावा दे सकती हैं।

'यूरेथ्रल मिल्किंग' (Urethral Milking): 5 सेकंड की जादुई तकनीक

इस समस्या से तत्काल छुटकारा पाने के लिए यूरोलॉजिस्ट एक बेहद आसान और प्रभावी तकनीक की सलाह देते हैं, जिसे 'यूरेथ्रल मिल्किंग' या 'बल्बार मसाज' कहा जाता है। यह दवाइयों के बिना ही स्थिति को तुरंत ठीक करने में कारगर साबित होती है:

  1. पेशाब समाप्त करने के बाद हड़बड़ी में पैंट न चढ़ाएं। कुछ सेकंड शांत खड़े रहें।

  2. अंडकोष (Scrotum) के ठीक पीछे और गुदा (Anus) के बीच वाले हिस्से (Perineum) पर अपने एक हाथ की बीच की तीन उंगलियों को रखें।

  3. वहां हल्का लेकिन दृढ़ दबाव बनाएं और उंगलियों को आगे की ओर (लिंग के आधार की दिशा में) लाएं।

  4. इसके बाद उंगलियों को लिंग के निचले हिस्से से आगे की ओर लाते हुए सिरे तक ले जाएं।

  5. इस हल्की मालिश से मूत्रमार्ग के मोड़ में अटका हुआ पूरा बचा हुआ पेशाब बाहर निकल जाता है। इसे दो बार दोहराएं और फिर कपड़े पहनें।

कीगल एक्सरसाइज (Kegel Exercises): पेल्विक मांसपेशियों को बनाएं मजबूत

चूंकि पीएमडी की जड़ पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की कमजोरी है, इसलिए इन्हें मजबूत करने के लिए कीगल एक्सरसाइज सबसे प्रभावी और स्थायी उपाय है:

  • मांसपेशियों की पहचान करें: पेशाब करते समय बीच में धार को रोकने की कोशिश करें। ऐसा करते समय जो मांसपेशियां अंदर की ओर खिंचती हैं, वही आपकी पेल्विक फ्लोर मसल्स हैं (ध्यान रहे, यह केवल पहचान के लिए एक बार करना है, बार-बार पेशाब रोककर व्यायाम न करें)।

  • व्यायाम का तरीका: आराम से बैठें या लेटें। इन मांसपेशियों को 5 सेकंड के लिए अंदर की ओर कसकर सिकोड़ें, फिर 5 सेकंड के लिए पूरी तरह ढीला छोड़ दें।

  • नियमितता: इस क्रिया को 10-10 बार के सेट में दिन में 3 बार दोहराएं। 4 से 6 सप्ताह के नियमित अभ्यास से मांसपेशियां मजबूत हो जाती हैं और पेशाब का अनचाहा रिसाव स्वतः बंद हो जाता है।

जीवनशैली में बदलाव और कब मिलें डॉक्टर से?

दैनिक दिनचर्या में कुछ सरल आदतों को शामिल करने से इस समस्या से आसानी से राहत पाई जा सकती है:

  • टॉयलेट में कभी भी अत्यधिक जल्दबाजी न दिखाएं; मूत्राशय को स्वाभाविक रूप से पूरी तरह खाली होने दें।

  • यदि खड़े होकर पेशाब करने पर रिसाव की समस्या ज्यादा होती है, तो बैठकर पेशाब करने की आदत डालें। बैठकर पेशाब करने से पेल्विक मांसपेशियां बेहतर तरीके से रिलैक्स होती हैं और मूत्राशय अधिक प्रभावी ढंग से खाली होता है।

  • अधिक कैफीन (कॉफी, चाय) और शराब के सेवन से बचें, क्योंकि ये मूत्राशय में जलन पैदा करते हैं।

  • यदि पेशाब में जलन, दर्द, खून आना, कमर के निचले हिस्से में दर्द या पेशाब रुक जाने जैसी स्थिति पैदा हो, तो बिना देर किए किसी योग्य यूरोलॉजिस्ट (Urologist) से संपर्क कर यूरिन रूटीन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या यूरोफ्लोमेट्री की जांच करवाएं।