भारत में 40 की उम्र के बाद क्यों तेजी से घट रही है शरीर की ताकत? डॉक्टरों ने बताए मसल्स लॉस के चौंकाने वाले कारण
आज के दौर में जैसे-जैसे लोगों की उम्र 40 साल के पार पहुंचती है, उन्हें शारीरिक थकान, कमजोरी और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं आम लगने लगती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उम्र के इस पड़ाव पर हमारे शरीर की मांसपेशियां (Muscles) इतनी तेजी से कमजोर क्यों होने लगती हैं? मेडिकल एक्सपर्ट्स और हेल्थ रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में पिछले कुछ सालों में 40 की उम्र के बाद 'सारकोपेनिया' यानी मसल्स लॉस (Muscle Loss) की समस्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। खान-पान में प्रोटीन की कमी, शारीरिक गतिविधि का अभाव और बदलती जीवनशैली इस गंभीर समस्या के मुख्य कारण बनते जा रहे हैं। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह उम्र के साथ शरीर को अंदर से खोखला कर सकती है।
40 की उम्र के बाद क्यों शुरू हो जाता है तेजी से मसल्स लॉस?
चिकित्सकीय भाषा में उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों के घनत्व और ताकत में होने वाली प्राकृतिक गिरावट को सारकोपेनिया कहा जाता है। आमतौर पर 30 की उम्र के बाद हर दशक में शरीर की मांसपेशियां प्राकृतिक रूप से घटने लगती हैं, लेकिन 40 साल के बाद यह प्रक्रिया रफ्तार पकड़ लेती है। शहरी जीवनशैली में लगातार घंटों डेस्क जॉब करना, फिजिकल एक्टिविटी या एक्सरसाइज बिल्कुल न करना और सैर-सपाटे से दूरी बनाना इसके बड़े कारण हैं। इसके अलावा हमारे खान-पान में मैक्रोन्यूट्रिएंट्स, खासकर उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन (Protein) की भारी कमी होना इस समस्या को और ज्यादा विकराल बना देता है।
मसल्स लॉस के शुरुआती लक्षण और शरीर पर इसके गंभीर प्रभाव
जब शरीर में मसल्स लॉस होने लगता है, तो व्यक्ति को रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम जैसे सीढ़ियां चढ़ना, भारी सामान उठाना या कुर्सी से उठना भी थकाऊ और मुश्किल लगने लगता है। मांसपेशियों के कमजोर होने से शरीर का मेटाबॉलिज्म भी धीमा पड़ जाता है, जिससे वजन बढ़ने और फैट जमा होने की समस्या शुरू हो जाती है। इसके साथ ही हड्डियों का घनत्व (Bone Density) भी घटने लगता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्थानीय स्तर पर खान-पान में जंक फूड और अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट का सेवन इस स्थिति को और अधिक गंभीर बना देता है।
मसल्स लॉस से बचने और मांसपेशियों को मजबूत रखने के आसान उपाय
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि थोड़ी सी सतर्कता और सही जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से आसानी से बचा जा सकता है। अपनी डेली डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाएं, जिसमें दालें, पनीर, सोयाबीन, अंडे, और लीन मीट शामिल हों। इसके अलावा हफ्ते में कम से कम 3 से 4 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (Strength Training) या हल्की रेसिस्टेंस एक्सरसाइज जरूर करें, जिससे मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, विटामिन डी और कैल्शियम से भरपूर आहार लें ताकि उम्र के हर पड़ाव पर आपका शरीर फिट, एक्टिव और ऊर्जावान बना रहे।