एंटीबायोटिक्स का कोर्स पूरा होते ही क्यों बिगड़ने लगता है हाजमा? गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से समझें पेट के बदलाव और 5 खतरे के संकेत

एंटीबायोटिक्स का कोर्स पूरा होते ही क्यों बिगड़ने लगता है हाजमा? गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से समझें पेट के बदलाव और 5 खतरे के संकेत

गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन, गले की खराश, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) या टाइफाइड जैसी बीमारियों में एंटीबायोटिक्स जीवन रक्षक दवा का काम करती हैं। डॉक्टर के बताए अनुसार 3 से 5 या 7 दिनों का कोर्स पूरा करने के बाद मुख्य बीमारी तो ठीक हो जाती है, लेकिन इसके तुरंत बाद एक नई परेशानी शुरू हो जाती है—पेट का पूरी तरह गड़बड़ा जाना। अचानक दस्त लगना, पेट में भारीपन, गैस, मरोड़ या भूख न लगना बेहद आम बात है। कई लोग इसे बीमारी की कमजोरी या दवा का सामान्य प्रभाव मानकर टाल देते हैं। लेकिन गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट्स (पेट रोग विशेषज्ञों) का कहना है कि एंटीबायोटिक्स हमारे पाचन तंत्र के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पर एक 'तूफान' की तरह असर डालती हैं। यदि समय रहते पेट के इस बदलाव को नहीं संभाला गया, तो यह हफ्तों तक पाचन शक्ति को कमजोर बना सकता है।

गट माइक्रोबायोम का विनाश: अच्छे और बुरे दोनों बैक्टीरिया का सफाया

हमारे पेट और आंतों में खरबों की संख्या में जीवित सूक्ष्मजीव (माइक्रोबायोम) रहते हैं, जिनमें से ज्यादातर 'फ्रेंडली' या गुड बैक्टीरिया (जैसे लैक्टोबैसिलस और बिफिडोबैक्टीरियम) होते हैं। ये अच्छे बैक्टीरिया हमारे भोजन को पचाने, विटामिन B12 व विटामिन K बनाने, आंतों की परत को मजबूत रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को साधने का काम करते हैं।

एंटीबायोटिक दवाएं इस तरह डिजाइन की जाती हैं कि वे शरीर में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करें। लेकिन परेशानी यह है कि अधिकांश ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स (Broad-Spectrum Antibiotics) यह फर्क नहीं कर पातीं कि कौन सा बैक्टीरिया नुकसानदेह है और कौन सा शरीर के लिए फायदेमंद। नतीजतन, वे बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया के साथ-साथ आंतों के लाखों-करोड़ों सुरक्षात्मक गुड बैक्टीरिया को भी पूरी तरह नष्ट कर देती हैं। इसे मेडिकल भाषा में 'गट डिस्बायोसिस' (Gut Dysbiosis) कहा जाता है। जब आंतों के रक्षक बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं, तो पाचन की सामान्य प्रक्रिया ठप पड़ जाती है और पेट अस्वाभाविक प्रतिक्रियाएं देने लगता है।

इन 5 बड़े संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

एंटीबायोटिक लेने के दौरान या कोर्स खत्म होने के कुछ दिनों बाद यदि नीचे दिए गए लक्षण महसूस हों, तो इसे गंभीरता से लें:

  1. एंटीबायोटिक एसोसिएटेड डायरिया (AAD): दवा शुरू करने के दो-तीन दिन बाद या कोर्स खत्म होने के बाद दिन में 3 से 4 बार या उससे ज्यादा पानी जैसे पतले दस्त लगना। यह आंतों की फ्लोरा नष्ट होने का सबसे स्पष्ट संकेत है।

  2. पेट में तेज ऐंठन और मरोड़ (Cramping): नाभि के आसपास या पेट के निचले हिस्से में रुक-रुक कर तेज मरोड़ उठना और ऐसा लगना जैसे आंतें खिंच रही हों।

  3. गंभीर ब्लोटिंग और असहनीय गैस: पानी पीने या थोड़ा सा हल्का खाना खाने के बाद भी पेट गुब्बारे की तरह फूल जाना और लगातार खट्टी डकारें आना। ऐसा तब होता है जब अनपचा खाना आंतों में सड़ने लगता है।

  4. मुंह का स्वाद कड़वा होना और भूख गायब होना: हर वक्त जीभ पर धातु जैसा या कड़वा स्वाद बने रहना, मतली (Nausea) महसूस होना और सामान्य रूप से लगने वाली भूख का पूरी तरह खत्म हो जाना।

  5. सी. डिफिसाइल (C. diff) इन्फेक्शन का लाल झंडा: जब अच्छे बैक्टीरिया पूरी तरह मर जाते हैं, तो एक खतरनाक बैक्टीरिया जिसे क्लॉस्ट्रिडियोइड्स डिफिसाइल (Clostridioides difficile) कहते हैं, आंतों में हावी हो जाता है। इसके चलते दिन में 10-15 बार बदबूदार दस्त, बुखार, पेट में असहनीय दर्द और मल में बलगम (म्यूकस) या खून आने की नौबत आ जाती है। यह एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है।

पेट के संतुलन को दोबारा पटरी पर लाने के 4 असरदार कदम

एंटीबायोटिक्स का कोर्स पूरा होने के बाद पेट को दोबारा मजबूत करने के लिए आंतों में अच्छे बैक्टीरिया का पुनर्वास करना सबसे जरूरी होता है:

  • प्रोबायोटिक्स का तत्काल सहारा: दवा का कोर्स खत्म होते ही अपने खानपान में प्रोबायोटिक्स की मात्रा बढ़ा दें। घर का बना ताजा दही, छाछ (मट्ठा), कांजी या डॉक्टर की सलाह से लिया जाने वाला प्रोबायोटिक कैप्सूल/सैशे आंतों में दोबारा जीवित लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया को स्थापित करता है। ध्यान रहे कि अगर एंटीबायोटिक चल रही हो, तो दवा और प्रोबायोटिक के बीच कम से कम 2 घंटे का अंतर रखें।

  • प्रीबायोटिक फूड्स से दें बैक्टीरिया को पोषण: नए बैक्टीरिया को जिंदा रहने के लिए घुलनशील फाइबर (प्रीबायोटिक्स) की जरूरत होती है। पके हुए केले, सेब, ओट्स, उबले आलू और हल्का लहसुन-प्याज अपनी डाइट में शामिल करें। केला आंतों की सूजन को शांत करने में सबसे कारगर फल है।

  • खिचड़ी और हल्का सुपाच्य आहार: कम से कम एक हफ्ते तक गरिष्ठ, अत्यधिक तीखे, तले-भुने और मैदे वाले जंक फूड से पूरी तरह परहेज करें। मूंग दाल की पतली खिचड़ी, दलिया, लौकी का सूप और उबले चावल का मांड (कांजी) खाएं जो कमजोर आंतों पर बिल्कुल जोर नहीं डालते।

  • भरपूर हाइड्रेशन और ओआरएस: दस्त या अपच के कारण शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बह जाते हैं। दिनभर में सादा गुनगुना पानी, नारियल पानी और ओआरएस (ORS) का घोल घूंट-घूंट करके पिएं ताकि आंतों की म्यूकोसल परत में डिहाइड्रेशन न हो।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना अनिवार्य है?

यदि एंटीबायोटिक का कोर्स खत्म होने के 3 से 4 दिन बाद भी दस्त बंद न हों, डिहाइड्रेशन के कारण चक्कर आने लगें, 101 डिग्री से ऊपर तेज बुखार चढ़ जाए, या शौच के रास्ते खून और चिपचिपा पदार्थ निकलने लगे, तो घर पर रुककर खुद से कोई भी दस्त रोकने वाली दवा (Anti-motility drugs) न लें। यह टॉक्सिन्स को आंतों के भीतर रोककर स्थिति को और बिगाड़ सकती है। ऐसे में तुरंत अपने डॉक्टर या फिजिशियन को अपनी पिछली दवाओं का पर्चा दिखाएं और स्टूल टेस्ट करवाकर उचित उपचार लें।