जिम में पसीना बहाना पसंद, पर 'डाइट' शब्द से क्यों कतराते हैं पुरुष? हालिया स्टडी में हुआ दिलचस्प खुलासा
शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने और बढ़ते वजन को नियंत्रित करने की जब भी बात आती है, तो आमतौर पर जिम में पसीना बहाने और खान-पान पर नियंत्रण रखने यानी 'डाइट' करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, समाज में यह एक आम और लंबे समय से चली आ रही धारणा रही है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अपना वजन घटाने में अक्सर ज्यादा चुनौतियों और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आम तौर पर हम इस समस्या को केवल उनकी रोजमर्रा की खान-पान की आदतों या काम के व्यस्त शेड्यूल से जोड़कर देखते हैं, लेकिन हाल ही में सामने आई एक वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक स्टडी ने इस विषय पर एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला खुलासा किया है, जो आपकी सोच को पूरी तरह बदलकर रख देगा।
'डाइट' शब्द से क्यों कतराते हैं पुरुष और क्या है इसके पीछे की सामाजिक सोच?
हाल ही में पुरुषों के वजन घटाने के तौर-तरीकों और उनकी मानसिकता को लेकर एक नया शोध किया गया है, जिसके परिणाम बेहद दिलचस्प हैं। इस स्टडी के अनुसार, अधिकांश पुरुष अपने खान-पान में किसी भी प्रकार का बदलाव करने या अपने भोजन पर नियंत्रण रखने जैसी बातों से हमेशा दूरी बनाकर रखना पसंद करते हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि पुरुष अनजाने में ही सही, लेकिन खान-पान में बदलाव करने और 'डाइट' करने की इस पूरी प्रक्रिया को महिलाओं से जुड़ी हुई एक गतिविधि मान लेते हैं। यही मुख्य मनोवैज्ञानिक वजह है कि जब भी बात वजन घटाने या खुद को फिट करने की आती है, तो पुरुष 'डाइट' जैसे शब्द से बुरी तरह कतराने लगते हैं और इस शब्द को सुनते ही इससे दूर भागने की कोशिश करते हैं। उनके मन में कहीं न कहीं यह बात बैठी होती है कि कैलोरी गिनना या संतुलित आहार लेना पारंपरिक रूप से पुरुषों का काम नहीं है।
30 से अधिक उम्र के पुरुषों पर की गई विशेष रिसर्च और उसके निष्कर्ष
पुरुषों की इस अनोखी मानसिकता और 'डाइट' शब्द के साथ उनके असहज संबंध को गहराई से समझने के लिए शोधकर्ताओं ने एक अनूठा प्रयोग किया। इस अध्ययन के तहत 30 वर्ष या उससे अधिक आयु के कुल 24 पुरुषों के साथ वजन घटाने और शारीरिक फिटनेस के मुद्दों पर लंबी बातचीत की गई। इस चर्चा के दौरान शोधकर्ताओं ने इन पुरुषों से उनके वजन घटाने से जुड़े पुराने व्यक्तिगत अनुभवों, जिम जाने की आदतों और खान-पान को लेकर उनके विचारों के बारे में विस्तार से पूछताछ की।
इस बातचीत और उसके बाद तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर शोधकर्ताओं ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाला। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरुषों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए जाने वाले वजन घटाने के कार्यक्रमों या फिटनेस प्लान्स में 'डाइट' जैसे शब्दों के इस्तेमाल से पूरी तरह से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि जब उनके सामने इस तरह के शब्दों का प्रयोग किया जाता है, तो वे मानसिक रूप से उस फिटनेस प्रोग्राम से कट जाते हैं और दूरी बना लेते हैं।
वजन घटाने के लिए 'डाइट' नहीं, बल्कि 'चैलेंज' का तरीका है ज्यादा असरदार
इस व्यापक रिसर्च रिपोर्ट में यह बात बहुत ही स्पष्ट रूप से सामने आई है कि यदि पुरुषों को वजन घटाने की इस लंबी और कठिन यात्रा से सफलतापूर्वक जोड़ना है, तो उनके साथ रणनीति बदलने की जरूरत है। यदि वजन कम करने की इस पूरी प्रक्रिया को 'डाइट' या 'खान-पान में कटौती' कहने के बजाय किसी रोमांचक 'चैलेंज' या फिटनेस 'टास्क' के रूप में उनके सामने रखा जाए, तो पुरुषों का रवैया पूरी तरह बदल जाता है।
जब किसी फिटनेस लक्ष्य को एक चुनौती के रूप में पेश किया जाता है, तो पुरुष उसमें बहुत अधिक दिलचस्पी दिखाने लगते हैं। प्रतिस्पर्धा की भावना और किसी टास्क को सफलतापूर्वक पूरा करने का उनका स्वभाव उन्हें वजन घटाने की इस प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करता है। इसलिए, यदि आप भी अपने किसी पुरुष साथी को फिटनेस के प्रति जागरूक करना चाहते हैं, तो उन्हें 'डाइट' की सलाह देने के बजाय एक स्वस्थ 'चैलेंज' स्वीकार करने के लिए प्रेरित करें, परिणाम खुद-ब-खुद सकारात्मक नजर आने लगेंगे।