टर्मिनल कैंसर से जूझते पिता का आखिरी मैसेज कर देगा भावुक; एक्सपर्ट से जानिए क्या होती है यह लाइलाज बीमारी
सोशल मीडिया पर अक्सर कुछ ऐसी कहानियां या वीडियो सामने आते हैं, जो हमें जिंदगी की असली कीमत समझा जाते हैं। हाल ही में टर्मिनल कैंसर (Terminal Cancer) से जूझ रहे एक पिता का अपनी छोटी बेटी के लिए रिकॉर्ड किया गया आखिरी मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। इस भावुक कर देने वाले वीडियो ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। इस दुखद घटना के बाद से ही इंटरनेट पर लोग यह सर्च कर रहे हैं कि आखिर 'टर्मिनल कैंसर' क्या होता है और यह कैंसर की अन्य स्टेजेस से कितना अलग और खतरनाक है। आइए मेडिकल एक्सपर्ट्स के नजरिए से आसान भाषा में इस बीमारी की पूरी डिटेल समझते हैं।
टर्मिनल कैंसर (Terminal Cancer) क्या है?
मेडिकल भाषा में 'टर्मिनल कैंसर' का मतलब कैंसर की वह आखिरी स्टेज है, जिसका कोई इलाज संभव नहीं रह जाता। इसे 'एंड-स्टेज कैंसर' (End-Stage Cancer) भी कहा जाता है। इस स्थिति में कैंसर शरीर के कई अहम अंगों (जैसे लिवर, फेफड़े, या दिमाग) में पूरी तरह फैल चुका होता है। टर्मिनल कैंसर में कीमोथेरेपी, रेडिएशन या सर्जरी जैसे तमाम इलाज काम करना बंद कर देते हैं। मेडिकल साइंस यह मान लेता है कि अब इस बीमारी को ठीक नहीं किया जा सकता और मरीज के पास जीवन का बहुत सीमित समय बचा है।
एडवांस कैंसर और टर्मिनल कैंसर में क्या अंतर है?
अक्सर लोग एडवांस कैंसर और टर्मिनल कैंसर को एक ही मान लेते हैं, लेकिन मेडिकल नजरिए से दोनों में थोड़ा अंतर है:
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एडवांस कैंसर (Advanced Cancer): इसमें कैंसर अपने मूल स्थान से दूसरे अंगों में फैल (Metastatic) चुका होता है, लेकिन इसका इलाज अब भी चल रहा होता है। डॉक्टर दवाइयों से इसे कंट्रोल करने और मरीज की उम्र बढ़ाने की कोशिश करते हैं।
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टर्मिनल कैंसर: यह एडवांस कैंसर का ही वह अंतिम रूप है, जब डॉक्टर यह घोषित कर देते हैं कि अब बीमारी किसी भी इलाज पर प्रतिक्रिया नहीं दे रही है और यह लाइलाज हो चुकी है।
टर्मिनल कैंसर के मुख्य लक्षण क्या हैं?
इस आखिरी स्टेज में कैंसर के लक्षण बेहद गंभीर हो जाते हैं, क्योंकि शरीर के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद करने लगते हैं। इसके कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:
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अत्यधिक दर्द और कमजोरी: मरीज को बहुत ज्यादा शारीरिक दर्द सहना पड़ता है और वह खुद से कोई काम करने में असमर्थ हो जाता है।
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वजन का तेजी से गिरना: भूख पूरी तरह खत्म हो जाती है और शरीर का वजन बहुत तेजी से कम होता है।
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सांस लेने में तकलीफ: थोड़ी सी भी हरकत करने पर या लेटे-लेटे भी सांस फूलने लगती है।
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मानसिक भ्रम और बेहोशी: बीमारी जब दिमाग तक पहुंचती है, तो मरीज को भ्रम होने लगता है और वह ज्यादातर समय नींद या बेहोशी की हालत में रहता है।
इस स्टेज में क्या होता है मेडिकल ट्रीटमेंट?
जब डॉक्टर यह स्पष्ट कर देते हैं कि कैंसर टर्मिनल है, तो इलाज का फोकस बीमारी को ठीक करने से हटकर मरीज को 'आराम' देने पर आ जाता है। इसे मेडिकल भाषा में पैलिएटिव केयर (Palliative Care) या हॉस्पिस केयर (Hospice Care) कहा जाता है।
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इसका मुख्य उद्देश्य मरीज के दर्द, घबराहट और तकलीफ को कम करना होता है।
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मरीज को हैवी पेनकिलर्स (Painkillers) और ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जाता है।
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इस दौरान केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मरीज और उसके परिवार को भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक (Psychological) सपोर्ट देना सबसे ज्यादा जरूरी होता है, ताकि वे इस कठिन समय का सामना कर सकें।