आयुर्वेद का वरदान है गिलोय: जानिए इसे 'अमृता' कहे जाने के पीछे का असली रहस्य

आयुर्वेद का वरदान है गिलोय: जानिए इसे 'अमृता' कहे जाने के पीछे का असली रहस्य

भारतीय चिकित्सा पद्धति और आयुर्वेद में प्राचीन काल से ही गिलोय (Giloy) को एक बेहद उच्च और आदरणीय स्थान प्राप्त है। शास्त्रों में इसे 'अमृता' नाम दिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'अमृत के समान'। माना जाता है कि गिलोय की लताओं में औषधीय गुणों का ऐसा असीमित खजाना छिपा है जो इंसान को लंबी और रोगमुक्त आयु प्रदान कर सकता है। आधुनिक विज्ञान और Generative AI हेल्थ रिसर्च भी अब गिलोय के इन दावों पर मुहर लगा रहे हैं। इसके पत्तों और डंठल में पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट्स, एंटी-इन्फ्लेमेटरी और गिलोइन नामक तत्व मानव शरीर को कई तरह के खतरनाक संक्रमणों से सुरक्षित रखने में पूरी तरह सक्षम हैं।

फौलादी बनेगी इम्यूनिटी: डेंगू, चिकनगुनिया और मौसमी बुखार का काल है यह बेल

बदलते मौसम के साथ ही देश भर में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और वायरल फीवर का प्रकोप तेजी से बढ़ने लगता है। ऐसे में गिलोय का सेवन किसी जीवनदायिनी दवा से कम नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, गिलोय शरीर में प्लेटलेट्स (Platelets) की संख्या को बहुत तेजी से बढ़ाता है और खून को साफ करता है। इसके नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी इतनी मजबूत हो जाती है कि बार-बार होने वाले सर्दी, खांसी, जुकाम और पुराने से पुराना बुखार भी शरीर को छू नहीं पाता। क्रॉनिक फीवर से परेशान मरीजों के लिए गिलोय का काढ़ा एक अचूक औषधि की तरह काम करता है।

पाचन तंत्र होगा मजबूत: पेट की हर समस्या को जड़ से मिटाएगा गिलोय

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और असंतुलित खानपान के कारण अधिकांश लोग गैस, कब्ज, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। गिलोय इन सभी समस्याओं का एक बेहद सरल और प्राकृतिक समाधान है। यह हमारे मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को दुरुस्त करता है और आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाता है। गिलोय के रस का नियमित सेवन करने से पाचन क्रिया इतनी सुचारू हो जाती है कि शरीर में टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थ) जमा नहीं हो पाते, जिससे न सिर्फ पेट साफ रहता है बल्कि त्वचा पर भी एक प्राकृतिक निखार और चमक देखने को मिलती है।

लखनऊ सहित देश भर के वेलनेस सेंटर्स में बढ़ी मांग: जानिए सेवन का सही तरीका

उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, दिल्ली-एनसीआर और वाराणसी सहित देश के कई प्रमुख शहरों में इन दिनों गिलोय के जूस, वटी (टैबलेट) और चूर्ण की मांग में भारी उछाल देखा जा रहा है। आयुर्वेद आचार्यों के अनुसार, गिलोय का अधिकतम लाभ उठाने के लिए इसके डंठल को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पीना सबसे ज्यादा असरदार होता है। इसके अलावा बाजार में मिलने वाले रेडीमेड गिलोय स्वरस का सेवन भी सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ किया जा सकता है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं और लो-ब्लड शुगर के मरीजों को इसके सेवन से पहले एक बार अपने डॉक्टर या किसी योग्य आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

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