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दूध-चीनी भूल जाइए! हिमालय के लोगों का यह सीक्रेट मॉर्निंग ड्रिंक सेहत को देता है फौलादी ताकत

पहाड़ों की खूबसूरत वादियों और बर्फीली हवाओं के बीच सुबह-सुबह गरमा-गरम चाय की चुस्की लेना किसे पसंद नहीं होगा? लेकिन अगर आप सोच रहे हैं कि हिमालय की गोद में बसे गांवों के लोग हमारे और आपके जैसी दूध-चीनी वाली सामान्य चाय पीकर अपने दिन की शुरुआत करते हैं, तो आप बिल्कुल गलत हैं. लद्दाख, हिमाचल और तिब्बत से सटे हिमालयी क्षेत्रों में एक बेहद खास और अनोखी चाय पी जाती है, जो वहां के लोगों का पारंपरिक मॉर्निंग ड्रिंक है. इस चाय का स्वाद मीठा नहीं बल्कि नमकीन होता है और इसके सेहत से जुड़े फायदे आपको हैरान कर देंगे.

मक्खन और नमक का अनोखा संगम है यह खास चाय

हिमालय के ऊंचे पहाड़ी गांवों में पी जाने वाली इस अनोखी चाय को 'गुरगुर चाय', 'सॉल्ट टी' या 'बटर टी' (Butter Tea) कहा जाता है. इसे स्थानीय भाषा में 'पो चा' भी कहते हैं. इसे बनाने का तरीका आम चाय से बिल्कुल जुदा है. इस पारंपरिक पेय को तैयार करने के लिए चाय की पत्तियों को पानी में अच्छी तरह उबाला जाता है और फिर उसमें याक (Yak) के दूध से बना फ्रेश मक्खन और थोड़ा सा नमक मिलाया जाता है. इसके बाद इस मिश्रण को एक लकड़ी के लंबे बर्तन (जिसे गुरगुर कहा जाता है) में डालकर अच्छी तरह मथा जाता है, जिससे मक्खन और चाय आपस में पूरी तरह घुलमिल जाते हैं.

हाड़ कंपाने वाली ठंड में शरीर को अंदर से रखती है गर्म

समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर बसे इन गांवों में तापमान अक्सर माइनस डिग्री में चला जाता है. ऐसी कड़ाके की ठंड में यह बटर टी वहां के स्थानीय लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. इस चाय में मौजूद याक का मक्खन शरीर को प्रचुर मात्रा में कैलोरी और फैट देता है, जिससे शरीर का तापमान अंदर से गर्म बना रहता है. इसके अलावा, अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों (High Altitude Areas) में चलने वाली बर्फीली हवाओं के कारण होंठ और त्वचा फटने की समस्या आम होती है, लेकिन इस चाय में मौजूद नेचुरल फैट शरीर को अंदर से मॉइस्चराइज रखता है और स्किन को रूखेपन से बचाता है.

एनर्जी बूस्टर होने के साथ ही बीमारियों को रखती है कोसों दूर

यह खास पहाड़ी मॉर्निंग ड्रिंक सिर्फ शरीर को गर्म ही नहीं रखता, बल्कि इसके कई और भी बेमिसाल फायदे हैं. पहाड़ी रास्तों पर लंबी चढ़ाई और कड़ी मेहनत करने के लिए यह चाय एक बेहतरीन एनर्जी बूस्टर का काम करती है. यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखती है और पहाड़ों पर होने वाली 'एल्टीट्यूड सिकनेस' (उल्टी, चक्कर या सिरदर्द की समस्या) से राहत दिलाती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें चीनी का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं होता, जिससे यह सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित और वजन संतुलित रखने में भी मददगार साबित होती है.

 

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