बार-बार लगती है तेज भूख? इसे केवल खान-पान की आदत न समझें, इन गंभीर बीमारियों का हो सकता है शुरुआती संकेत
पर्याप्त मात्रा में भोजन करने के कुछ ही देर बाद क्या आपको फिर से तेज भूख महसूस होने लगती है? अक्सर लोग इसे केवल अच्छी पाचन शक्ति, स्वाद का चटोरापन या अधिक शारीरिक मेहनत का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस के अनुसार, यदि यह समस्या आपके साथ रोज हो रही है, तो इसे चिकित्सा की भाषा में 'पॉलीफेजिया' (Polyphagia) कहा जाता है।
अत्यधिक और लगातार भूख लगना केवल पेट का खेल नहीं है, बल्कि यह शरीर के भीतर पनप रही कई हार्मोनल और मेटाबॉलिक बीमारियों का शुरुआती चेतावनी संकेत हो सकता है। आइए एक हेल्थ रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि हर समय भूख महसूस होना किन-किन मुख्य बीमारियों का इशारा हो सकता है और डॉक्टरों की इस पर क्या राय है।
1. टाइप-2 डायबिटीज (Diabetes): कोशिकाओं तक ग्लूकोज न पहुंचना
बार-बार भूख लगने की सबसे बड़ी और आम वजह डायबिटीज (शुगर) हो सकती है।
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कारण: जब आप खाना खाते हैं, तो शरीर उसे ग्लूकोज में बदल देता है। लेकिन इंसुलिन रेजिस्टेंस या इंसुलिन की कमी के कारण खून में मौजूद यह ग्लूकोज शरीर की कोशिकाओं (Cells) तक नहीं पहुंच पाता।
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परिणाम: पर्याप्त खाना खाने के बावजूद आपकी कोशिकाएं ऊर्जा (Energy) के लिए तरसती रहती हैं और दिमाग को लगातार 'भूख लगी है' का सिग्नल भेजती रहती हैं।
2. हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism): ओवरएक्टिव थायराइड ग्रंथियां
जब हमारी गर्दन में मौजूद थायराइड ग्रंथि अत्यधिक मात्रा में थायराइड हार्मोन (T3 और T4) का निर्माण करने लगती है, तो इसे हाइपरथायरायडिज्म कहा जाता है।
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कारण: थायराइड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म (उपापचय दर) को नियंत्रित करता है। हार्मोन का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ने से मेटाबॉलिज्म बेहद तेज हो जाता है।
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परिणाम: शरीर में कैलोरी बहुत तेजी से बर्न होती है, जिससे व्यक्ति को थोड़ी-थोड़ी देर में तेज भूख लगती है और ज्यादा खाने के बावजूद उसका वजन घटने लगता है।
3. क्रोनिक स्ट्रेस (तनाव) और 'कोर्टिसोल' हार्मोन
लगातार मानसिक तनाव, चिंता या अवसाद (Depression) में रहने से भी भूख का संतुलन बिगड़ जाता है।
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कारण: तनाव की स्थिति में हमारा शरीर 'कोर्टिसोल' (Cortisol) नाम का स्ट्रेस हार्मोन रिलीज करता है।
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परिणाम: कोर्टिसोल हार्मोन सीधे तौर पर भूख को बढ़ाता है और शरीर को हाई-कैलोरी, मीठे या जंक फूड (Comfort Foods) खाने के लिए उकसाता है, जिसे हम भाषा में 'इमोशनल ईटिंग' भी कहते हैं।
4. नींद की कमी (Sleep Deprivation) और प्रोग्रेसिव हार्मोन असंतुलन
रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद न लेना हमारी भूख को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
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कारण: अधूरी नींद के कारण शरीर में भूख बढ़ाने वाला 'घ्रेलिन' (Ghrelin) हार्मोन बढ़ जाता है और पेट भरने का अहसास कराने वाला 'लेप्टिन' (Leptin) हार्मोन घट जाता है।
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परिणाम: नींद पूरी न होने पर दिमाग ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए बार-बार कार्बोहाइड्रेट्स और भोजन की मांग करता है।
कब दिखाएं डॉक्टर को और क्या करें बचाव?
यदि बार-बार भूख लगने के साथ-साथ आपको बहुत ज्यादा प्यास लग रही हो, बार-बार पेशाब आ रहा हो, बिना वजह वजन घट रहा हो या अत्यधिक थकान महसूस हो रही हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से परामर्श लें।
शुरुआती बचाव के उपाय:
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अपने दैनिक आहार में प्रोटीन, फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स की मात्रा बढ़ाएं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहे।
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पर्याप्त मात्रा में (3 से 4 लीटर) पानी पिएं, क्योंकि कई बार शरीर 'डिहाइड्रेशन' (प्यास) को गलती से भूख समझ लेता है।
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नियमित रूप से खाली पेट ब्लड शुगर (Fasting Sugar) और थायराइड प्रोफाइल टेस्ट (Thyroid Profile) कराएं।