पैरों की नीली नसें न हों नजरअंदाज: शरीर के अंदर छिपी इस गंभीर बीमारी का संकेत है यह समस्या
अक्सर हम पैरों, टांगों या जांघों पर मकड़ी के जाले की तरह फैली नीली या उभरी हुई नसों को महज एक मामूली कॉस्मेटिक समस्या या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, त्वचा के ऊपर असामान्य रूप से दिखने वाली ये नीली नसें अंदरूनी शारीरिक समस्याओं का एक बड़ा संकेत हो सकती हैं। वरिष्ठ वैस्कुलर एवं कार्डियोथोरेसिस सर्जन डॉ. के.के. पांडेय के अनुसार, यदि इन नसों के उभार का समय रहते सही इलाज न कराया जाए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है और पैरों पर काले निशान, एक्जिमा तथा दर्दनाक घाव तक बन सकते हैं।
क्यों उभरने लगती हैं त्वचा पर ये नीली नसें?
हमारे शरीर की ऊपरी सतह पर मौजूद नसें पैर और जांघों के अंदरूनी हिस्सों की मोटी शिराओं से जुड़ी होती हैं। इनका मुख्य काम अशुद्ध खून को इकट्ठा कर दिल और फेफड़ों तक पहुंचाना होता है। हालांकि, जब किसी अंदरूनी रुकावट या वाल्व (कपाट) के कमजोर होने के कारण खून ऊपर जाने के बजाय नीचे ही इकट्ठा होने लगता है, तो दबाव बढ़ने से नसें त्वचा पर नीले रंग के गुच्छे की तरह उभर आती हैं। इसे चिकित्सकीय भाषा में 'प्राइमरी वैरिकोस वेन्स' या क्रोनिक वीनस इंसफिशिएंसी (CVI) कहा जाता है। इसके अलावा, डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) यानी नसों में खून का थक्का जमना भी इसका एक प्रमुख और गंभीर कारण है।
गर्भवती महिलाओं के लिए क्यों हो सकती है यह चेतावनी?
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में इस तरह की नीली नसों का दिखना विशेष ध्यान देने योग्य होता है। इसका मुख्य कारण गर्भस्थ शिशु का गर्भाशय पर अत्यधिक दबाव पड़ना या फिर पैरों की नसों में खून के थक्के (DVT) जमना हो सकता है। यदि ऐसी स्थिति में अचानक पूरे पैर में सूजन आ जाए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि लापरवाही बरतने पर ये थक्के फेफड़ों तक पहुंचकर मरीज के जीवन के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
आधुनिक इलाज और बचाव के क्या हैं विकल्प?
यदि पैरों या जांघों पर नीली नसों का जमाव दिखाई दे, तो किसी अनुभवी वैस्कुलर सर्जन से परामर्श करना बेहद जरूरी है। इसके कारणों का पता लगाने के लिए डॉक्टर डॉप्लर स्टडी, सीटी वेनोग्राम और डिजिटल सबट्रैक्शन वेनोग्राफी जैसी आधुनिक जांचों की सलाह देते हैं। स्थिति की गंभीरता के आधार पर इलाज के कई विकल्प मौजूद हैं:
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लेजर और आरएफए तकनीक: यदि समस्या सीवीआई (CVI) की वजह से है, तो लेजर या रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे मरीज अगले ही दिन से अपने सामान्य काम पर लौट सकता है।
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एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग: नसों में स्थायी रुकावट होने पर वेनस एंजियोप्लास्टी, स्टेंटिंग या जरूरत पड़ने पर वेनस बाईपास सर्जरी की मदद ली जाती है।
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दवाएं और विशेष जुराबें: शुरुआती अवस्था में विशेष दबाव वाली मेडिकल स्टॉकिंग्स (जुराबें), दवाइयों और नियमित व्यायाम से भी स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।