बारिश में भूलकर भी न खाएं ये 5 मछलियां! फूड पॉइजनिंग का है बड़ा खतरा, सेहत पर पड़ सकता है भारी
मानसून का मौसम अपने साथ सुहावना मौसम और खान-पान के नए शौक लेकर आता है, लेकिन इस दौरान स्वास्थ्य को लेकर बरती गई थोड़ी सी लापरवाही आपको अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा सकती है। क्या आप जानते हैं कि बारिश के दिनों में कुछ खास तरह की मछलियां खाना सेहत के लिए कितना जोखिम भरा हो सकता है? मानसून के दौरान जल निकायों में प्रदूषण और मछलियों के प्रजनन चक्र के कारण फूड पॉइजनिंग (भोजन विषाक्तता) का खतरा काफी बढ़ जाता है। आज हम आपको उन 5 मछलियों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे मानसून के दौरान आपको दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
1. हिलसा (Hilsa) और मानसून का कनेक्शन
हिलसा मछली को मानसून का पर्याय माना जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में मछलियों का प्रजनन काल (Breeding Season) होता है। इस समय इनके शरीर में कई ऐसे तत्व हो सकते हैं जो पाचन तंत्र के लिए हानिकारक होते हैं। साथ ही, समुद्र के गंदे पानी के कारण इनमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा ज्यादा होता है, जो फूड पॉइजनिंग की मुख्य वजह बनते हैं।
2. झींगा (Prawns/Shrimp) खाने में बरतें सावधानी
झींगा या प्रॉन पानी में मौजूद गंदगी और भारी धातुओं (Heavy Metals) को जल्दी अवशोषित (Absorb) करते हैं। बारिश के दौरान नदियों और समुद्र में गंदगी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे झींगा दूषित होने की संभावना अत्यधिक रहती है। मानसून में इसे खाने से पेट खराब होने, एलर्जी और स्किन रैशेज जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं।
3. रोहू और कतला (Rohu & Katla) का खतरा
ताजे पानी की ये मछलियां मानसून में तालाबों और नदियों में जमा हुए कीचड़ और बैक्टीरिया के संपर्क में ज्यादा रहती हैं। बारिश का गंदा पानी इनके गलफड़ों (Gills) में परजीवी और सूक्ष्मजीव जमा कर देता है, जिन्हें घर पर ठीक से साफ करना मुश्किल होता है। अगर इन्हें कच्चा या कम पका हुआ खाया जाए, तो ये सीधे तौर पर डायरिया और उल्टी का कारण बन सकती हैं।
4. मैकेरल (Mackerel) और दूषित पानी
मैकेरल समुद्र की ऊपरी सतह पर रहती है। बारिश के मौसम में समुद्र में होने वाली उथल-पुथल से इसमें कई तरह के टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं। यदि इसे पकड़ने के बाद सही तापमान में स्टोर नहीं किया गया, तो इसमें 'हिस्टामाइन' (Histamine) नामक रसायन बन जाता है, जो गंभीर एलर्जिक रिएक्शन और फूड पॉइजनिंग का कारण बनता है।
5. पम्फरेट (Pomfret) के सेवन से बचें
पम्फरेट मछली को भी मानसून में खरीदते समय विशेष ध्यान रखना चाहिए। बारिश में अक्सर कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन में गड़बड़ी के कारण ये जल्दी खराब हो जाती है। बाजार में मिलने वाली कई पम्फरेट मछलियां बासी हो सकती हैं, जिनमें बैक्टीरिया का संक्रमण तेजी से फैलता है। मानसून के दौरान इनमें 'ई-कोलाई' (E.coli) जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए जाने का डर रहता है।
कैसे करें बचाव और सुरक्षित रहें?
मानसून के दौरान अगर मछली खाने का मन हो, तो हमेशा भरोसेमंद और ताजी मछली ही खरीदें। सुनिश्चित करें कि मछली को हमेशा तेज आंच पर पूरी तरह पकाकर (Properly Cooked) ही खाएं, क्योंकि हाई टेंपरेचर बैक्टीरिया को मारने में मददगार होता है। यदि मछली खाने के बाद पेट में ऐंठन, मतली या दस्त जैसी शिकायत हो, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि इस मौसम में मछली की जगह हल्की और सुपाच्य चीजों को अपने डाइट प्लान में प्राथमिकता देनी चाहिए।