Chronic Joint Pain Risks: जोड़ों में लगातार रहने वाला दर्द क्यों हो सकता है बेहद खतरनाक? बढ़ती उम्र का असर समझकर न करें नजरअंदाज
बदलते मौसम, शारीरिक निष्क्रियता और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच जोड़ों का दर्द (Joint Pain) आज हर उम्र के लोगों के लिए एक आम स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। आमतौर पर लोग घुटनों, कंधों, कलाई या कूल्हों में होने वाले हल्के या मध्यम दर्द को 'बढ़ती उम्र का सामान्य असर' या 'थकान' मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई लोग बिना डॉक्टरी परामर्श के बार-बार पेनकिलर या दर्द निवारक बाम लगाकर काम चलाते रहते हैं। हालांकि, मेडिकल साइंस और ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के अनुसार, जोड़ों में 2 से 3 सप्ताह से अधिक समय तक बना रहने वाला दर्द किसी सामान्य थकान का संकेत नहीं, बल्कि शरीर के अंदर विकसित हो रही किसी गंभीर क्रॉनिक बीमारी या ऑटोइम्यून डिसऑर्डर की चेतावनी हो सकता है। इसे समय रहते न पहचाना जाए, तो यह जोड़ों की संरचना को स्थायी रूप से नष्ट कर सकता है।
ऑटोइम्यून डिजीज और रूमेटाइड अर्थराइटिस का खतरा
जोड़ों में लगातार रहने वाले दर्द का एक प्रमुख और गंभीर कारण रूमेटाइड अर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) हो सकता है। यह एक गंभीर ऑटोइम्यून स्थिति है, जिसमें शरीर का अपना इम्यून सिस्टम गलती से जोड़ों की सुरक्षात्मक झिल्ली (Synovium) पर हमला करने लगता है। इसके कारण जोड़ों में लगातार सूजन, लालिमा, तेज जलन और सुबह उठते ही 30 मिनट से अधिक समय तक जकड़न (Morning Stiffness) महसूस होती है। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह जोड़ों की हड्डियों को गलाने लगता है और उंगलियों व कलाई के आकार को हमेशा के लिए टेढ़ा कर सकता है।
कार्टिलेज का घिसना और ऑस्टियोअर्थराइटिस की जटिलता
दो हड्डियों के मिलन स्थल पर कुशन की तरह काम करने वाले सुरक्षात्मक ऊतक को कार्टिलेज (Cartilage) कहा जाता है। जब उम्र, गलत पोस्चर या अत्यधिक वजन के कारण यह कुशन धीरे-धीरे घिसने लगता है, तो हड्डियां आपस में टकराने लगती हैं, जिसे ऑस्टियोअर्थराइटिस (Osteoarthritis) कहा जाता है। इसे नजरअंदाज करने पर जोड़ों में कटकट की आवाज (Crepitus), हड्डियों का असामान्य रूप से बढ़ना (Bone Spurs) और तेज असहनीय दर्द शुरू हो जाता है, जिससे अंततः व्यक्ति का चलना-फिरना तक बंद हो सकता है और नौबत नी-रिप्लेसमेंट सर्जरी तक आ सकती है।
यूरिक एसिड का जमाव और गाउट का जोखिम
शरीर में प्यूरीन के टूटने से बनने वाला यूरिक एसिड जब किडनी द्वारा सही तरीके से फिल्टर नहीं हो पाता, तो वह छोटे-छोटे नुकीले क्रिस्टल्स के रूप में जोड़ों में जमा होने लगता है। इस स्थिति को 'गाउट' (Gout) कहा जाता है। गाउट का दर्द आमतौर पर अचानक आधी रात या तड़के पैर के अंगूठे, टखने या घुटने में अत्यधिक चुभन और गंभीर सूजन के साथ शुरू होता है। रक्त में यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ स्तर यदि लंबे समय तक बना रहे, तो यह जोड़ों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ किडनी स्टोन और किडनी डैमेज का कारण भी बन सकता है।
संक्रमण और सेप्टिक अर्थराइटिस की अनदेखी
कई बार शरीर के किसी अन्य हिस्से में मौजूद बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण रक्त प्रवाह के माध्यम से जोड़ों तक पहुंच जाता है, जिसे सेप्टिक अर्थराइटिस (Septic Arthritis) कहा जाता है। इसमें जोड़ अचानक अत्यधिक गर्म हो जाता है, सूज जाता है और तेज बुखार के साथ तेज दर्द होता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी होती है, जहां जरा सी लापरवाही कुछ ही दिनों में जोड़ के पूरे कार्टिलेज को नष्ट कर सकती है।
डॉक्टर को कब दिखाएं और क्या सावधानियां बरतें?
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तुरंत जांच कराएं: यदि जोड़ों में दर्द के साथ सूजन, त्वचा का लाल होना, हल्का बुखार या सुबह के समय गंभीर अकड़न महसूस हो, तो तुरंत ऑर्थोपेडिक सर्जन या रूमेटोलॉजिस्ट से संपर्क करें और एक्स-रे, यूरिक एसिड टेस्ट व ईएसआर/सीआरपी जांच करवाएं।
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स्व-दवा (Self-Medication) से बचें: बिना सलाह के रोजाना पेनकिलर खाने से पेट में अल्सर और किडनी फेलियर का खतरा बढ़ता है।
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वजन और आहार नियंत्रण: संतुलित आहार लें, पर्याप्त पानी पिएं, नियमित हल्की स्ट्रेचिंग व फिजियोथेरेपी करें और वजन को नियंत्रित रखें ताकि घुटनों पर अत्यधिक दबाव न पड़े।