चेहरे के स्किन केयर से ज्यादा जरूरी है सैनिटरी पैड का चुनाव, गायनेकॉलोजिस्ट ने क्यों दी महिलाओं को चौंकाने वाली चेतावनी
आज के दौर में स्किन केयर और ब्यूटी प्रोडक्ट्स को लेकर महिलाएं बेहद सजग हो चुकी हैं, वे अपने चेहरे पर महंगे सीरम, सनस्क्रीन और मॉइश्चराइजर लगाने से पहले सौ बार सोचती हैं कि उनकी त्वचा को क्या नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि, इस बीच एक बेहद गंभीर और अनदेखा पहलू यह है कि महिलाएं अपने पर्सनल हाइजीन और मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट्स (Menstrual Products) के चुनाव में उतनी सावधानी नहीं बरतती हैं। हाल ही में जानी-मानी स्त्री रोग विशेषज्ञों (Gynecologists) ने महिलाओं को चेतावनी देते हुए एक बड़ा बयान दिया है कि चेहरे पर क्या लगा रही हैं, इससे कहीं ज्यादा यह जानना जरूरी है कि आपके सैनिटरी पैड, टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप में कौन से केमिकल्स और सामग्रियां इस्तेमाल की जा रही हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर आपके रिप्रोडक्टिव हेल्थ को प्रभावित करता है।
क्यों खतरनाक हो सकते हैं बाजार में मिलने वाले सामान्य सैनिटरी पैड?
विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में बिकने वाले अधिकांश कमर्शियल सैनिटरी पैड्स और पैंटी लाइनर्स को अधिक सफेद और खुशबूदार बनाने के लिए सिंथेटिक फाइबर्स, ब्लीच (Chlorine Bleaching), आर्टिफिशियल फ्रेग्रेन्स और प्लास्टिक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। जब महिलाएं पीरियड्स के दौरान लगातार कई घंटों तक इन केमिकल्स के संपर्क में रहती हैं, तो वे योनि और आसपास की बेहद संवेदनशील त्वचा (Vaginal Skin) के जरिए शरीर के अंदर आसानी से एब्जॉर्ब हो जाते हैं। इसके परिणाम स्वरूप हार्मोनल असंतुलन, गंभीर एलर्जी, त्वचा का संक्रमण और लॉन्ग टर्म में प्रजनन संबंधी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
महिलाओं को किन बातों का रखना चाहिए खास ध्यान और क्या हैं सुरक्षित विकल्प?
गायनेकॉलोजिस्ट्स सलाह देती हैं कि महिलाओं को अपने मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट्स खरीदते समय उनकी पैकेजिंग पर दिए गए इंग्रेडिएंट्स (Ingredients) को ध्यान से पढ़ना चाहिए। सिंथेटिक और सुगंधित पैड की जगह हमेशा ऑर्गेनिक कॉटन से बने पैड्स, बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन या मेडिकल ग्रेड सिलिकॉन से बने मेंस्ट्रुअल कप (Menstrual Cups) का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा, पैड को हर 4 से 6 घंटे के भीतर नियमित रूप से बदलना भी संक्रमण के खतरे को टालने के लिए बेहद जरूरी है। अपनी सुंदरता के साथ-साथ अपने इंटीमेट हेल्थ को लेकर बरती गई यह छोटी सी सावधानी महिलाओं को भविष्य की कई गंभीर स्वास्थ्य परेशानियों से सुरक्षित रख सकती है।