क्या है धारा 108, जिस पर बनी सहमति? खत्म हो सकती है बिजली कर्मियों की हड़ताल
हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों द्वारा बुलाई गई तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल अब समाप्ति के बेहद करीब पहुंच गई है। नूंह और गुरुग्राम जैसे प्रमुख औद्योगिक व राजस्व वाले इलाकों में एक निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण का लाइसेंस दिए जाने के फैसले से गुस्साए बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के साझा मंच ने कड़ा रुख अपनाया था। हालांकि, बिजली संकट से जनता को हो रही दिक्कतों और राज्य की व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए हरियाणा सरकार तुरंत एक्शन मोड में आ गई। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों की मुख्य मांग को मानते हुए घोषणा की है कि राज्य सरकार 'इलेक्ट्रिसिटी एक्ट' की धारा 108 लागू करने के विकल्प पर पूरी तरह तैयार है। सरकार के इस सकारात्मक रुख के बाद हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स जॉइंट एक्शन फ्रंट के नेताओं ने वार्ता की टेबल पर आने की सहमति जताई है, जिससे कई जिलों में बिजली संकट दूर होने की बड़ी उम्मीद जगी है।
क्या है इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 108 और सरकार कैसे करेगी इसका इस्तेमाल?
कानूनी दृष्टिकोण से समझें तो इलेक्ट्रिसिटी एक्ट (Electricity Act) की धारा 108 राज्य सरकार को यह विशेषाधिकार देती है कि वह राज्य विद्युत नियामक आयोग (State Electricity Regulatory Commission - HERC) को नीतिगत मामलों में लिखित निर्देश जारी कर सकती है। दरअसल, नियामक आयोग ने गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी 'इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड' को 25 साल के लिए बिजली वितरण का लाइसेंस जारी किया था। बिजली यूनियनों का मुख्य विरोध यही था कि इससे सरकारी बिजली कंपनियों (दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम) का भारी राजस्व नुकसान होगा और भविष्य में आम उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी हो सकती है। धारा 108 के तहत जब राज्य सरकार सार्वजनिक हित, जनभावना और जनसेवा की दुहाई देते हुए निर्देश जारी करती है, तो नियामक आयोग के फैसले को समीक्षा के दायरे में लाया जा सकता है या उस पर रोक लगाई जा सकती है। यही वजह है कि कर्मचारी यूनियन धारा 108 को लागू करने की मांग पर अड़ी थीं।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज की पहल: 'हड़ताल रास्ता नहीं, बातचीत से निकलेगा समाधान'
हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बिजली यूनियनों के साथ वार्ता का द्वार खोलते हुए स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र में हड़ताल जनता को परेशानी में डालने का साधन नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से चर्चा की गई है और सरकार धारा 108 के इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सहमत है। मंत्री विज ने कर्मचारियों से अपील की कि वे तुरंत काम पर लौटें और उपभोक्ताओं को सुचारू बिजली आपूर्ति बहाल करें। सरकार के इस न्योते के बाद चंडीगढ़ में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें ऊर्जा मंत्री, बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधि आमने-सामने बैठकर समझौते के कानूनी ड्राफ्ट पर अंतिम मुहर लगाएंगे।
निजीकरण के फैसले का विरोध क्यों कर रहे थे बिजली कर्मचारी और इंजीनियर्स?
हरियाणा में चल रहे इस बड़े आंदोलन के पीछे बिजली वितरण व्यवस्था का निजीकरण सबसे बड़ी वजह है। कर्मचारियों का तर्क है कि गुरुग्राम और नूंह ऐसे क्षेत्र हैं जहां से सरकारी बिजली निगमों को कुल राजस्व का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा प्राप्त होता है। यदि इन क्षेत्रों में निजी कंपनियों को समानांतर लाइसेंस दे दिया गया, तो वे बड़े औद्योगिक व व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अपनी ओर खींच लेंगी। इसका सीधा असर यह होगा कि सरकारी डिस्कॉम के पास केवल घाटे वाले ग्रामीण और कृषि क्षेत्र ही रह जाएंगे, जिससे सरकारी तंत्र आर्थिक रूप से पंगु हो जाएगा। इसी वित्तीय घाटे और कर्मचारियों के भविष्य की सुरक्षा को लेकर यूनियनें सड़कों पर उतरी थीं और पुतले दहन कर विरोध दर्ज कराया था।
वार्ता के नतीजों पर टिकीं प्रदेश भर की नजरें: जनता को मिलेगी राहत
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण प्रदेश के कई जिलों में ग्रिड और सब-स्टेशन प्रभावित हुए थे, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों, अस्पतालों और आम रिहाइशी इलाकों में पानी व बिजली की आपूर्ति लड़खड़ाने लगी थी। हालांकि सरकार द्वारा धारा 108 लागू करने के दिए गए लिखित/मौखिक आश्वासन के बाद यह तय माना जा रहा है कि यह हड़ताल किसी भी समय आधिकारिक रूप से वापस ले ली जाएगी। हरियाणा की जनता और व्यापारी वर्ग ने सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच इस सहमति का स्वागत किया है। यदि आज की वार्ता में धारा 108 के क्रियान्वयन पर अंतिम सहमति बन जाती है, तो यह न केवल कर्मचारियों की जीत मानी जाएगी, बल्कि प्रदेश में बिजली का संकट पलक झपकते ही दूर हो जाएगा।