हरियाणा में दशहरा पर्व के बाद पराली जलाने के मामलों में आया अचानक उछाल
उत्तर भारत में खरीफ सीजन की कटाई के साथ ही वायु प्रदूषण और पराली जलाने (Stubble Burning) का मुद्दा एक बार फिर से गर्माने लगा है। हरियाणा के कृषि और पर्यावरण विभाग से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार, दशहरा पर्व के बाद से राज्य के विभिन्न कृषि क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाओं में तेजी देखी गई है और एक ही दिन में 42 नए मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए राहत की बात यह है कि चालू वर्ष में पराली जलाने का कुल आंकड़ा पिछले छह वर्षों के रिकॉर्ड की तुलना में काफी कम बना हुआ है। सरकारी सख्ती, जागरूकता अभियानों और कृषि यंत्रों पर मिल रही सब्सिडी का व्यापक असर ज़मीनी स्तर पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
दशहरा के बाद कृषि क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाओं में आई तेजी, 42 नए मामले सामने आए
धान की कटाई का सीजन चरम पर पहुंचते ही हरियाणा के धान उत्पादक जिलों जैसे कैथल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, करनाल और जींद में पराली में आग लगाने के मामलों में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दशहरा उत्सव के तुरंत बाद उपग्रह (Satellite Monitoring) के ज़रिए ली गई तस्वीरों में राज्य के विभिन्न खेतों में 42 स्थानों पर आग की लपटें और धुएं के गुबार दिखाई दिए। कृषि विभाग के सचल दस्तों और स्थानीय नोडल अधिकारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर चालान की कार्रवाई की और किसानों को आग बुझाने के निर्देश दिए। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कटाई और अगली फसल गेहूं की बुवाई के बीच समय अंतर कम होने के कारण कुछ किसान जल्दबाजी में यह आत्मघाती कदम उठा रहे हैं।
पिछले छह वर्षों के आंकड़ों की तुलना: पराली जलाने के मामलों में दर्ज की गई ऐतिहासिक कमी
भले ही हालिया दिनों में 42 नए मामले सामने आए हों, लेकिन अगर बीते छह वर्षों (2020 से 2025) के तुलनात्मक आंकड़ों पर नजर डालें, तो इस बार राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में अभूतपूर्व गिरावट आई है। आंकड़ों के मुताबिक, जहां पिछले वर्षों में इसी अवधि के दौरान सैकड़ों मामले रोजाना सैटेलाइट की पकड़ में आते थे, वहीं इस साल कुल एक्टिव फायर लोकेशंस (AFL) की संख्या में 50 प्रतिशत से भी अधिक की कमी दर्ज की गई है। इसे राज्य सरकार के कड़े रुख और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दिशानिर्देशों के सफल क्रियान्वयन के रूप में देखा जा रहा है।
कृषि यंत्रों पर बंपर सब्सिडी, चालान और एफआईआर: सरकार का दोहरा रुख रंग लाया
हरियाणा सरकार द्वारा पराली प्रबंधन (Crop Residue Management) के लिए अपनाई गई दोहरी रणनीति का जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां सरकार किसानों को सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, बेलर और पैडी स्ट्रॉ चॉपर जैसी आधुनिक मशीनों पर भारी सब्सिडी प्रदान कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पराली न जलाने वाले किसानों को प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। वहीं दूसरी ओर, नियमों का उल्लंघन कर आग लगाने वाले हठी किसानों के खिलाफ 'रेड एंट्री' (पटवारी रिकॉर्ड में लाल निशान), भारी जुर्माना और एफआईआर (FIR) दर्ज करने जैसी सख्त दंडात्मक कार्रवाई भी अमल में लाई जा रही है।
दिल्ली-एनसीआर की हवा पर असर और आने वाले दिनों के लिए अलर्ट जारी
हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की इन घटनाओं का सीधा असर राजधानी दिल्ली और पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पर पड़ना शुरू हो गया है। सुबह और शाम के समय हवा में छाई धुंध और पराली के धुएं ने सांस के मरीजों और बुजुर्गों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले एक-दो हफ्तों में धान की कटाई के अंतिम चरण में पराली जलाने के मामलों में और इजाफा हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) और जिला प्रशासन ने रात-दिन निगरानी के लिए विशेष फ्लाइंग स्क्वाड तैनात कर दिए हैं ताकि पराली जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।