जनगणना का दूसरा चरण: जातिगत गणना के साथ अब डिजिटल साक्षरता भी होगी दर्ज
देश में होने वाली आगामी जनगणना के दूसरे चरण को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस बार की जनगणना पिछले दशकों से काफी अलग और आधुनिक होने वाली है। केंद्र सरकार ने इस बार जातिगत आंकड़ों के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता को भी जनगणना का अहम हिस्सा बनाने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि देश का प्रत्येक नागरिक डिजिटल रूप से कितना सक्षम है और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक डिजिटल माध्यम से पहुँचाने में क्या चुनौतियाँ हैं।
दो जिलों में प्री-टेस्ट से मिली तैयारी को मजबूती
जनगणना की प्रक्रिया को त्रुटिहीन बनाने के लिए सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में दो चयनित जिलों में 'प्री-टेस्ट' (Pre-test) का आयोजन किया जा रहा है। इस परीक्षण का मकसद फील्ड वर्क के दौरान आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को समझना और डिजिटल डेटा संग्रह के लिए इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर की क्षमता को परखना है। अधिकारी इस बात पर विशेष ध्यान दे रहे हैं कि डेटा कलेक्शन के दौरान निजता और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन हो सके।
क्यों खास है इस बार की जनगणना?
आधुनिक युग की जरूरतों को देखते हुए, यह जनगणना केवल जनसंख्या गिनने तक सीमित नहीं रहेगी। जातिगत गणना के जरिए सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन किया जाएगा, जो भविष्य की कल्याणकारी नीतियों के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। वहीं, डिजिटल साक्षरता का डेटा यह तय करेगा कि 'डिजिटल इंडिया' का सपना ग्रामीण और सुदूर इलाकों तक कितनी मजबूती से पहुँचा है। इससे सरकार को भविष्य में ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल बैंकिंग के प्रसार में सटीक निर्णय लेने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डेटा-संचालित दृष्टिकोण आने वाले समय में देश के नीति-निर्माण में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।