राम रहीम का जन्मदिन: सिरसा डेरे में बड़े कार्यक्रमों की तैयारी, सजा के बाद से अब तक 17 बार जेल से बाहर आ चुका है डेरा प्रमुख

राम रहीम का जन्मदिन: सिरसा डेरे में बड़े कार्यक्रमों की तैयारी, सजा के बाद से अब तक 17 बार जेल से बाहर आ चुका है डेरा प्रमुख

स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर जहां पूरा देश राष्ट्रीय पर्व के जश्न में डूबा हुआ था, वहीं हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के मुख्यालय में एक अलग ही गहमागहमी और चर्चा का माहौल बना हुआ था। दरअसल, 15 अगस्त को डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम का जन्मदिन था, और इस खास मौके को लेकर सिरसा स्थित मुख्य डेरे समेत देश-विदेश के कई अनुयायियों द्वारा बड़े पैमाने पर कार्यक्रमों और सत्संग की तैयारियां की जा रही थीं। बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर मामलों में सजा काट रहा डेरा प्रमुख पिछले कुछ वर्षों में अपनी कानूनी पैरो और फर्लो (Furlough) के चलते लगातार चर्चा का केंद्र बना रहता है। जब भी उसका जन्मदिन या कोई बड़ा धार्मिक उत्सव आता है, तो उसके बाहर आने या न आने को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी बहस छिड़ जाती है। आंकड़ों के मुताबिक, जब से उसे अदालत द्वारा सजा सुनाई गई है, तब से लेकर अब तक वह विभिन्न कारणों और प्रशासनिक मंजूरियों के तहत लगभग 17 बार जेल की चारदीवारी से बाहर आ चुका है, जिसने एक बार फिर से न्याय प्रणाली और कैदियों की पैरोल नीति को लेकर कई तरह के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सिरसा डेरे में जन्मदिन की तैयारियां और अनुयायियों में उत्साह

15 अगस्त के दिन राम रहीम के जन्मदिन को लेकर सिरसा डेरे के भीतर और आसपास के इलाकों में विशेष आयोजनों की रूपरेखा तैयार की गई थी। हालांकि मुख्य डेरा प्रमुख इस समय जेल के अंदर ही सजा काट रहा है, लेकिन उसके बावजूद देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे हजारों श्रद्धालु और समर्थक ऑनलाइन और स्थानीय स्तर पर केक काटकर, रक्तदान शिविर लगाकर और भंडारे आयोजित करके इस दिन को धूमधाम से मनाते नजर आए। डेरा प्रबंधन की तरफ से हमेशा यह दावा किया जाता है कि उनके अनुयायी केवल सामाजिक भलाई और मानवतावादी कार्यों के जरिए अपने गुरु का जन्मदिन मनाते हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया जाता है। सिरसा और उसके आसपास के जिलों में डेरा प्रेमियों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क रहती हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके और शांति व्यवस्था कायम रहे।

सजा के बाद से अब तक 17 बार जेल से बाहर आने का सफर

कानूनी जानकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा का एक बहुत बड़ा विषय रहा है कि कैसे गंभीर मामलों में उम्रकैद या सजा काट रहा कोई कैदी बार-बार पैरोल या फर्लो का लाभ लेकर जेल से बाहर आ जाता है। गुरमीत राम रहीम के मामले में यदि पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि अदालती फैसलों और जेल मैनुअल के नियमों का हवाला देते हुए वह अलग-अलग अवधि के लिए अब तक लगभग 17 बार जेल से बाहर आ चुका है। कभी पारिवारिक कारणों का हवाला दिया जाता है, तो कभी पैतृक संपत्ति के बंटवारे या डेरे के विशेष कार्यक्रमों का जिक्र करके कानूनी प्रावधानों के तहत पैरोल की अर्जी लगाई जाती है। जेल नियमावली के नियमों के अनुसार हर सजायाफ्ता कैदी को एक निश्चित समय के बाद पैरोल मांगने का अधिकार होता है, लेकिन जब कोई हाई-प्रोफाइल कैदी बार-बार इस सुविधा का लाभ उठाता है, तो आम जनता और पीड़ितों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक हो जाता है कि क्या न्याय व्यवस्था में कहीं कोई ढिलाई बरती जा रही है।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में उठने वाले गंभीर सवाल

डेरा प्रमुख के जन्मदिन और उसके बार-बार जेल से बाहर आने के सिलसिले को लेकर हरियाणा और पंजाब की राजनीति में समय-समय पर भूचाल आता रहा है। विपक्षी दल और विभिन्न सामाजिक संगठन लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि इस प्रकार के हाई-प्रोफाइल कैदियों को चुनावी मौसम या अन्य खास मौकों पर राजनीतिक लाभ लेने के लिए आसानी से पैरोल दे दी जाती है। उनका यह तर्क रहता है कि जब एक आम कैदी को पैरोल पाने के लिए वर्षों तक अदालतों और जेल प्रशासन के चक्कर काटने पड़ते हैं, तो ऐसे प्रभावशाली लोगों को इतनी बार छूट मिलना न्याय की निष्पक्षता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों और जेल विभाग का हमेशा से यह पक्ष रहा है कि उन्होंने जो भी फैसले लिए हैं, वे पूरी तरह से जेल मैनुअल और कानूनी प्रावधानों के दायरे में रहकर ही लिए गए हैं, और किसी भी कैदी को उसके कानूनी अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।

कानून व्यवस्था और भविष्य की प्रशासनिक चुनौतियां

सिरसा डेरे और राम रहीम से जुड़ी हर खबर देश के मीडिया में एक बड़ा मुद्दा बन जाती है। जब भी डेरा प्रमुख जेल से बाहर आता है या उसके जन्मदिन जैसे बड़े मौके आते हैं, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए कानून व्यवस्था बनाए रखना एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है। हरियाणा सरकार और पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना पड़ता है कि किसी भी स्थिति में राज्य की शांति भंग न हो और दोनों पक्षों के बीच कोई विवाद पैदा न हो। आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजनों और पैरोल की याचिकाओं को लेकर कानूनी और सामाजिक स्तर पर बहस जारी रहने की पूरी संभावना है, क्योंकि न्यायपालिका, पीड़ित पक्ष और डेरा समर्थकों के बीच का यह ताना-बाना भारतीय न्याय प्रणाली के सबसे चर्चित अध्यायों में से एक बन चुका है।

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