पेंशनरों का फूटा गुस्सा! करनाल में लंबित मांगों को लेकर सरकार से लगाई गुहार, दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

पेंशनरों का फूटा गुस्सा! करनाल में लंबित मांगों को लेकर सरकार से लगाई गुहार, दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

हरियाणा के मुख्यमंत्री के गृह जिले करनाल में रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की ओर से अपनी जायज मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया गया है। लंबे समय से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो रहे बुजुर्ग पेंशनरों ने एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन कर सरकार के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया। पेंशनभोगी कल्याण संघ के बैनर तले जुटे इन बुजुर्गों ने साफ शब्दों में कहा कि जीवन भर सरकार और जनता की सेवा करने के बाद भी उन्हें अपने ही हक के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। पेंशनरों ने जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपकर अपनी लंबित मांगों को तुरंत पूरा करने की पुरजोर अपील की है।

इन प्रमुख और लंबित मांगों को लेकर अटकी है बात

पेंशनरों की बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों और मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। उनकी मुख्य मांगों में छठे और सातवें वेतन आयोग के बकाया एरियर का जल्द से जल्द भुगतान करना, बढ़ती महंगाई को देखते हुए मासिक चिकित्सा भत्ते (मेडिकल अलाउंस) को बढ़ाकर ₹3000 करना और 65, 70 तथा 75 वर्ष की आयु पूरी करने पर मिलने वाली अतिरिक्त पेंशन पेंशनरों के खातों में समय पर ट्रांसफर करना शामिल है। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों को रेलवे टिकटों में मिलने वाली पुरानी रियायत को भी फिर से बहाल करने की मांग तेजी से उठाई गई।

बुढ़ापे में सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार पर दिया जोर

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि बढ़ती उम्र और शारीरिक दिक्कतों के कारण बुजुर्गों का मेडिकल खर्च काफी ज्यादा बढ़ गया है, लेकिन सरकार द्वारा दिया जा रहा मौजूदा चिकित्सा भत्ता ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। उन्होंने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में याद दिलाया कि पेंशन कोई खैरात या दान नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों का कानूनी और सामाजिक अधिकार है। यदि प्रदेश सरकार ने बजट और कैबिनेट बैठकों में उनकी इन जायज मांगों पर तुरंत सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो वे आने वाले दिनों में सड़कों पर उतरकर राज्यव्यापी आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

करनाल जिला प्रशासन को सौंपा मांग पत्र, मुख्यमंत्री से उम्मीदें

बैठक के समापन के बाद बड़ी संख्या में बुजुर्ग पेंशनर सचिवालय पहुंचे और प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी मांगों का पुलिंदा सौंपा। करनाल के स्थानीय नेताओं और समाजसेवियों ने भी बुजुर्गों की इस मांग का समर्थन किया है। पेंशनरों का कहना है कि करनाल मुख्यमंत्री का मुख्य कार्यक्षेत्र होने के कारण यहां से उठी आवाज का असर सीधे चंडीगढ़ तक होता है, इसलिए उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनके साथ न्याय करेगी। अब देखना यह होगा कि चुनावी साल के इस माहौल में सरकार इन बुजुर्ग वोटरों और वरिष्ठ नागरिकों को खुश करने के लिए क्या कदम उठाती है।

Latest Posts