नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर झोटा की उसी बाजार में हत्या

नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर झोटा की उसी बाजार में हत्या

पंजाब की धरती पर इन दिनों सनसनी और शोक की एक ऐसी लहर दौड़ गई है, जिसने राज्य की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा पर फिर से बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। नशा विरोधी आंदोलनों का एक बुलंद चेहरा और पंजाब के युवाओं को ड्रग्स के दलदल से बाहर निकालने के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर झोटा (Parvinder Jhota) की निर्मम हत्या कर दी गई है। सबसे हैरान करने वाली और विचलित करने वाली बात यह है कि हमलावरों ने परविंदर झोटा को ठीक उसी बाजार के बीचों-बीच निशाना बनाया, जहां उन्होंने साल 2023 में नशा तस्करों के खिलाफ अपनी ऐतिहासिक और बेखौफ जंग का ऐलान किया था। जिस स्थान को कभी उनकी बहादुरी और क्रांति का प्रतीक माना जाता था, आज वही इलाका उनकी खून से सनी शहादत का गवाह बन गया है। इस दुस्साहसिक वारदात ने पूरे पंजाब के राजनीतिक, सामाजिक और ग्रामीण परिवेश को हिलाकर रख दिया है।

नशे की काली दुनिया से बाहर निकलकर ड्रग्स माफिया के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणादायक कहानी

परविंदर झोटा का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था, जिन्होंने अपनी जिंदगी के एक दौर में खुद गंभीर नशे की लत का सामना किया था। कहते हैं कि जो इंसान खुद अंधेरे को बहुत करीब से देखता है, वही दूसरों के लिए रोशनी का दिया बन सकता है। परविंदर ने ड्रग्स के भयानक अंधकार से बाहर आने के बाद यह संकल्प लिया था कि वे पंजाब की युवा पीढ़ी को इस धीमी मौत के कुएं में नहीं गिरने देंगे। साल 2023 में उन्होंने पंजाब के उन इलाकों में डेरा डाला, जहां सरेआम चिट्टा और अन्य जहरीले नशीले पदार्थों का कारोबार फल-फूल रहा था। उन्होंने स्थानीय प्रशासन, पुलिस और तस्करों की आंखों में आंखें डालकर न केवल विरोध प्रदर्शन किए, बल्कि कई नशा तस्करों के ठिकानों का पर्दाफाश भी किया। उनकी इसी बेबाकी और निडरता ने उन्हें पंजाब के घर-घर में एक नायक के रूप में स्थापित कर दिया था, लेकिन उनकी यही लोकप्रियता ड्रग्स माफिया की आंखों की किरकिरी बन चुकी थी।

उसी खौफनाक बाजार में सरेआम वारदात को दिया गया अंजाम, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जब परविंदर झोटा उसी पुराने बाजार से गुजर रहे थे, तभी घात लगाकर बैठे अज्ञात हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। हमलावरों ने इस वारदात को इतनी बेखौफ अंदाज में अंजाम दिया कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। जिस जगह पर यह घटना हुई, वहां दिनभर भारी चहल-पहल रहती है, और ऐसे व्यस्त सार्वजनिक स्थान पर सरेआम इस प्रकार की गोलीबारी होना इस बात का प्रमाण है कि अपराधियों के मन में कानून का खौफ किस हद तक समाप्त हो चुका है। वारदात के बाद हमलावर आसानी से मौके से फरार होने में कामयाब हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। स्थानीय लोगों और समर्थकों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा व्याप्त है, और उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

पंजाब में नशा विरोधी आंदोलनों का भविष्य और न्याय की मांग को लेकर उबाल

परविंदर झोटा की इस सनसनीखेज हत्या के बाद से पंजाब के तमाम सामाजिक संगठनों, किसान यूनियनों और युवाओं में आक्रोश की आग सुलग उठी है। लोगों का कहना है कि यदि नशा तस्करों के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को इस तरह सरेआम गोलियों से भून दिया जाएगा, तो आम इंसान की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा। विपक्षी दलों ने भी राज्य सरकार और कानून-व्यवस्था को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि पंजाब में अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही हैं। पुलिस ने एसआईटी (SIT) का गठन करके हमलावरों की तलाश तेज कर दी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। भले ही परविंदर झोटा आज इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन नशे के खिलाफ उनके द्वारा जलाई गई मशाल पंजाब के कोने-कोने में और अधिक तेज हो गई है, और हर आंख नम होने के साथ-साथ न्याय की मांग कर रही है।