रक्षाबंधन पर्व पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जिले की चार दिव्यांग बेटियों को बांधी राखी, राष्ट्रपति भवन में सजा खास दरबार तो झूम उठा पूरा हरियाणा

रक्षाबंधन पर्व पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जिले की चार दिव्यांग बेटियों को बांधी राखी, राष्ट्रपति भवन में सजा खास दरबार तो झूम उठा पूरा हरियाणा

देश के सबसे बड़े और पावन भाई-बहन के प्रेम के पर्व रक्षाबंधन के अवसर पर इस बार हरियाणा के रोहतक जिले से एक ऐसी अद्भुत और ऐतिहासिक खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया है। परंपराओं की सीमाओं से परे जाकर देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रोहतक की चार विशेष रूप से सक्षम यानी दिव्यांग बेटियों को अपने हाथों से राखी बांधकर न केवल इस पर्व की गरिमा को कई गुना बढ़ा दिया, बल्कि समाज के सामने एक बेहद प्रेरणादायक और अनूठी मिसाल पेश की है। राष्ट्रपति भवन से जुड़ी इस खास घटना ने रोहतक जिले का मान पूरे देश में ऊंचा कर दिया है और इस ऐतिहासिक पल की चर्चा हर तरफ हो रही है। इस घटनाक्रम से न केवल उन चार बेटियों के परिवारों में बल्कि पूरे हरियाणा राज्य में खुशी की लहर दौड़ गई है और हर कोई महामहिम के इस संवेदनशील और स्नेहपूर्ण कदम की भूरी-भूरी प्रशंसा कर रहा है।

राष्ट्रपति भवन में सजा रक्षाबंधन का विशेष दरबार

रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर राष्ट्रपति भवन में एक बेहद भव्य और भावनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से खास मेहमानों को आमंत्रित किया गया था। इसी कड़ी में हरियाणा के रोहतक जिले से ताल्लुक रखने वाली चार दिव्यांग बेटियां भी विशेष रूप से राष्ट्रपति भवन पहुंची थीं। इन बेटियों के जीवन की चुनौतियों और उनकी हिम्मत को सम्मान देते हुए महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने खुद आगे बढ़कर इन बेटियों से रक्षा सूत्र बंधवाया और उन्हें अपना आशीर्वाद दिया। राष्ट्रपति का यह सरल, सहज और ममतामयी स्वरूप देखकर वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो गए। एक देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा इस तरह से दिव्यांग बेटियों को विशेष स्नेह देना यह साबित करता है कि सच्चे नेतृत्व की पहचान संवेदनशीलता और समानता के भाव से होती है।

रोहतक की इन चार बेटियों के लिए जीवन का सबसे बड़ा सरप्राइज

रोहतक की इन चार दिव्यांग बेटियों के लिए राष्ट्रपति भवन का यह सफर और महामहिम राष्ट्रपति के हाथों में राखी बांधना किसी परियों की कहानी जैसा सच होने जैसा था। जब इन बेटियों को पता चला कि उन्हें देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने और उन्हें रक्षासूत्र बांधने का सौभाग्य मिलने वाला है, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अपनी शारीरिक अक्षमताओं और चुनौतियों से रोजाना लड़ने वाली इन बेटियों के चेहरे पर उस वक्त जो मुस्कान और चमक थी, उसने यह दिखा दिया कि यदि हौसला बुलंद हो तो हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। राष्ट्रपति ने बड़े ही आत्मीय तरीके से इन सभी बेटियों से बातचीत की, उनकी पढ़ाई-लिखाई और जीवन के संघर्षों के बारे में जाना और उन्हें भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं व उपहार प्रदान किए।

समाज के लिए एक मजबूत संदेश और समावेशी सोच

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा रोहतक की इन दिव्यांग बेटियों को राखी बांधने की इस घटना को केवल एक औपचारिकता या त्योहार मनाने भर तक सीमित नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसे समाज के लिए एक बहुत बड़ा सामाजिक संदेश माना जा रहा है। हमारे समाज में आज भी कई बार दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से अलग या कमजोर मान लिया जाता है, लेकिन देश की सर्वोच्च महामहिम द्वारा इस तरह से उन्हें आगे बढ़कर गले लगाना और त्योहार की मुख्य धुरी बनाना एक समावेशी समाज की स्थापना की ओर मजबूत कदम है। यह घटना समाज के हर उस वर्ग को यह सोचने पर मजबूर करती है कि विशेष रूप से सक्षम लोग किसी पर बोझ नहीं हैं, बल्कि वे भी देश और समाज का उतना ही अभिन्न हिस्सा हैं जितने कि कोई अन्य नागरिक।

रोहतक में जश्न का माहौल और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं

जैसे ही रोहतक जिले के लोगों को यह खबर मिली कि उनके शहर की चार बेटियों ने देश की राष्ट्रपति को राखी बांधी है, पूरे जिले में उत्सव जैसा माहौल बन गया। स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और प्रशासनिक अधिकारियों ने इन बेटियों के परिवारों को फोन करके बधाइयां देनी शुरू कर दीं। लोगों का कहना है कि रोहतक की इन बेटियों ने न सिर्फ अपने माता-पिता का बल्कि पूरे हरियाणा का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी राष्ट्रपति और रोहतक की इन बेटियों की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, और लोग इन पलों को भारतीय संस्कृति और लोकतंत्र की खूबसूरती का सबसे बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं। यह घटना आने वाले लंबे समय तक लोगों के दिलों में एक प्रेरणा बनकर जिंदा रहेगी।

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