हरियाणा में नौसेना के जांबाज जवान रविकांत को नम आंखों से अंतिम विदाई: माता-पिता के इकलौते सहारे और तीन साल पहले बंधी थी सेहरा की डोरी
देश की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगा देने वाले वीर सपूतों की शहादत और निधन की खबरें हमेशा हर देशवासी का दिल झकझोर देती हैं। हरियाणा (Haryana) में भारतीय नौसेना (Indian Navy) के एक जांबाज जवान रविकांत के आकस्मिक निधन के बाद पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है। देश सेवा में समर्पित रहे रविकांत को उनके पैतृक गांव में राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं और हर जुबान पर 'रविकांत अमर रहें' के नारे गूंज रहे थे। माता-पिता के इकलौते बेटे और महज तीन साल पहले ही शादी के बंधन में बंधे इस युवा जवान के जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
माता-पिता के इकलौते बुढ़ापे का सहारा और देश सेवा का जज्बा
किसी भी परिवार के लिए अपना इकलौता बेटा खो देना दुनिया का सबसे बड़ा और असहनीय दर्द होता है। नौसेना के जवान रविकांत अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और पूरे परिवार की उम्मीदें उन पर टिकी थीं। बचपन से ही देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा रखने वाले रविकांत ने अपनी मेहनत के दम पर भारतीय नौसेना में सेवा का अवसर पाया था। वे अपनी कर्तव्यनिष्ठा और मिलनसार स्वभाव के कारण अपने यूनिट और गांव दोनों जगह बेहद लोकप्रिय थे। उनकी इस अचानक क्षति ने न केवल उनके परिवार को बल्कि पूरे गांव और समाज को झकझोर कर रख दिया है।
तीन साल पहले गूंजी थी शहनाई, घर में पसरा मातम
रविकांत की जिंदगी में खुशियों का दौर कुछ साल पहले ही शुरू हुआ था जब उनकी धूमधाम से शादी हुई थी। शादी के महज तीन साल ही बीते थे कि यह बड़ी ट्रेजेडी हो गई। जवान की पत्नी, माता-पिता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस घर में कुछ समय पहले तक खुशियों का माहौल हुआ करता था, आज वहां चीख-पुकार और मातम छाया हुआ है। सांत्वना देने के लिए पहुंचने वाले हर रिश्तेदार और स्थानीय नागरिक की आंखें इस दुखद घटना को देखकर नम हो जा रही हैं।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम यात्रा और सैन्य श्रद्धांजलि
जब देश के वीर जवान की पार्थिव देह तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव पहुंची, तो पूरा इलाका भारत माता के नारों से गूंज उठा। जिला प्रशासन और भारतीय नौसेना के अधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। नम आंखों और भारी मन से परिजनों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। इस मुश्किल वक्त में पूरा प्रशासनिक अमला और स्थानीय लोग शोक संतप्त परिवार के साथ खड़े नजर आए, ताकि इस दुख की घड़ी में उन्हें ढांढस बंधाया जा सके।