होर्डिंग्स पर फोटो न होने से हुड्डा नाराज: संविधान पखवाड़ा कार्यक्रम छोड़ा
हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर प्रोटोकॉल और पोस्टर वार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान लगे होर्डिंग्स पर अपनी तस्वीर न पाकर बुरी तरह भड़क गए। मामला इतना बढ़ गया कि हुड्डा ने मंच पर ही मौजूद वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त लहजे में फटकार लगाई और इसे अपनी सीधी तौहीन बताते हुए कार्यक्रम को बीच में ही छोड़ दिया। पूर्व सीएम के इस आक्रामक रुख और मंच से वॉकआउट करने के बाद प्रशासनिक हलकों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हड़कंप मच गया है।
सरकारी होर्डिंग्स से फोटो गायब देखकर भड़के भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मंच पर जताई कड़ी आपत्ति
मामला राज्य स्तर पर आयोजित संविधान पखवाड़ा (Samvidhan Pakhwada) कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के रूप में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्य अतिथि व विशिष्ट वक्ताओं के तौर पर आमंत्रित किया गया था। जैसे ही हुड्डा कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, उन्होंने मंच और आसपास लगे मुख्य होर्डिंग्स पर देखा कि सरकार व अन्य प्रशासनिक हस्तियों की तस्वीरें तो मौजूद थीं, लेकिन राज्य के संवैधानिक पद 'नेता प्रतिपक्ष' की फोटो पूरी तरह नदारद थी। इस अनदेखी को देखते ही हुड्डा का पारा चढ़ गया और उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस पर कड़ा एतराज जताया।
'यह बदतमीजी है, प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन': पूर्व सीएम ने अधिकारी को लगाई क्लास
मंच पर मौजूद आला अधिकारियों और आयोजकों की तरफ रुख करते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को सीधे संबोधित करते हुए कहा, "यह सरासर बदतमीजी और प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन है। एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की अनदेखी करके आप क्या साबित करना चाहते हैं?" हुड्डा ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में विपक्ष और नेता प्रतिपक्ष का एक तय संवैधानिक दर्जा होता है, जिसे सरकारी आयोजनों में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अधिकारियों द्वारा सफाई देने की कोशिश की गई, लेकिन हुड्डा ने उनकी दलीलों को खारिज कर दिया।
कार्यक्रम का बहिष्कार कर मंच से निकले हुड्डा, प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंप
अधिकारियों के रवैये और पोस्टर में जगह न मिलने से आहत होकर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तुरंत संविधान पखवाड़ा कार्यक्रम का बहिष्कार करने का फैसला लिया। वे बिना भाषण दिए और कार्यक्रम की कार्यवाही पूरी हुए बिना ही मंच छोड़कर बाहर निकल गए। पूर्व मुख्यमंत्री के इस तरह अचानक वॉकआउट करने से वहां मौजूद अधिकारी, नेता और दर्शक भौंचक्के रह गए। कार्यक्रम स्थल पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हुड्डा के जाने के बाद अधिकारी स्थिति को संभालने और सफाई देने में जुटे रहे, लेकिन तब तक विवाद की चिंगारी पूरे प्रदेश में फैल चुकी थी।
हरियाणा में गहराया 'पोस्टर वार' और राजनीतिक घमासान
भूपेंद्र सिंह हुड्डा के इस सख्त कदम के बाद हरियाणा कांग्रेस ने सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मौजूदा सरकार जानबूझकर संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार कर रही है और विपक्षी नेताओं का अपमान करने का कोई मौका नहीं छोड़ती। वहीं दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे बेवजह का विवाद करार देते हुए कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में नियमानुसार ही होर्डिंग्स लगाए जाते हैं। बहरहाल, संविधान पखवाड़ा जैसे गंभीर मंच पर हुआ यह 'होर्डिंग्स विवाद' अब हरियाणा की राजनीति का नया केंद्र बिंदु बन गया है, जिसकी गूंज आने वाले दिनों में और तेज होने की पूरी संभावना है।