फरीदाबाद की घटना के बाद एक्शन में हरियाणा सरकार, अस्पतालों के एंट्री गेट 24 घंटे खुले रखने के सख्त निर्देश
हरियाणा के फरीदाबाद से सटे एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के एंट्री गेट के बाहर तड़पती हुई एक गर्भवती महिला द्वारा खुले में बच्चे को जन्म देने की विचलित करने वाली घटना के बाद प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। इस गंभीर लापरवाही का तुरंत संज्ञान लेते हुए हरियाणा सरकार ने पूरे राज्य के सरकारी चिकित्सा संस्थानों की आपातकालीन व्यवस्था को सुधारने के लिए बेहद कड़े और विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) सुमिता मिश्रा ने सोमवार को राज्य के सभी सिविल सर्जनों को आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों, डॉक्टरों व स्टाफ की उपलब्धता और प्रसव देखभाल सेवाओं (Maternity Care) को मजबूत करने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का आदेश दिया है।
हर गर्भवती महिला को मिले समय पर इलाज और सम्मान
अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा ने साफ शब्दों में सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को हिदायत दी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में आने वाली हर एक गर्भवती महिला को समय पर चिकित्सा देखभाल, सम्मानजनक व्यवहार और बिना किसी रुकावट के तुरंत डॉक्टर सहायता मिले। इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, राज्य की सभी 'फर्स्ट रेफरल यूनिट्स' (FRUs) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने सुविधा केंद्र पर चौबीसों घंटे (24x7) कम से कम एक पूरी तरह से जीवन रक्षक दवाओं और उपकरणों से सुसज्जित एम्बुलेंस की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें।
अस्पतालों के लिए स्वास्थ्य विभाग की नई और सख्त गाइडलाइन
संस्थागत प्रसव सेवाओं को बेहतर बनाने और भविष्य में ऐसी किसी भी अमानवीय घटना को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निम्नलिखित कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
24x7 खुले रहेंगे मुख्य गेट: आपातकालीन स्थिति के दौरान मरीजों और उनके तीमारदारों की बिना किसी रुकावट के पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को अपने मुख्य एंट्री गेट चौबीसों घंटे खुले रखने होंगे।
स्टाफ नर्सों की अनिवार्य उपस्थिति: जिन स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव (डिलीवरी) के मामले ज्यादा आते हैं, वहां प्रसव देखभाल सेवाओं के लिए रात के समय भी स्टाफ नर्सों की ड्यूटी और प्रत्यक्ष उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है।
रात में होंगे औचक निरीक्षण: चिकित्सा सेवाओं के सुचारू संचालन और डॉक्टरों-कर्मचारियों की मुस्तैदी को जांचने के लिए सुविधा केंद्रों के प्रभारियों और जिला-स्तरीय राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की टीमों को रात में अचानक (Surprise Inspection) छापेमारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
नर्सिंग स्टाफ की कमी होगी दूर: जहां भी कर्मचारियों की कमी पाई जाएगी, वहां जिला अधिकारी तुरंत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से अतिरिक्त नर्सिंग स्टाफ तैनात करेंगे। सिविल सर्जनों को प्रसव केंद्रों पर स्टाफ की कमी पूरी करने के लिए महज तीन दिन की समय-सीमा (Dead Line) दी गई है।
रात के स्टाफ की सुरक्षा: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में रात की ड्यूटी करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों, विशेषकर महिला स्टाफ की सुरक्षा और हिफाजत को पुख्ता करने पर भी विशेष जोर दिया गया है।
क्या थी फरीदाबाद की वह खौफनाक घटना?
यह पूरा प्रशासनिक एक्शन पिछले शुक्रवार की रात फरीदाबाद के एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में हुई भारी लापरवाही के बाद देखने को मिला है। पीड़ित महिला के परिवार ने आरोप लगाया था कि जब वे प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को लेकर रात करीब 1:30 बजे अस्पताल पहुंचे, तो ओपीडी (OPD) का मुख्य गेट पूरी तरह बंद था। परिजनों ने जब पीछे की तरफ से आपातकालीन (Emergency) विभाग की ओर जाने वाले रास्ते का रुख किया, तो वहां भी ग्राउंड फ्लोर का गेट लॉक मिला।
मोबाइल की फ्लैशलाइट की रोशनी में हुआ बच्चे का जन्म
महिला के रिश्तेदार चमन ने फरीदाबाद में मीडियाकर्मियों को आपबीती सुनाते हुए बताया, "भाभी प्रसव पीड़ा के कारण चल भी नहीं पा रही थीं और दर्द से तड़पकर जमीन पर बैठ गईं। मैंने ओपीडी के गेट पर लगातार दस्तक दी, लेकिन अंदर से कोई नहीं आया। इमरजेंसी गेट के पास एक व्हीलचेयर तो मिली, लेकिन अत्यधिक दर्द के कारण भाभी उस पर बैठ नहीं सकीं। पूरे ग्राउंड फ्लोर पर कोई भी स्टाफ या गार्ड मौजूद नहीं था। इस चक्कर में हमारे कीमती 15 मिनट बर्बाद हो गए।"
चमन के मुताबिक, जब तक अंदर सो रहे डॉक्टर और नर्स बाहर आते, तब तक मजबूरन रिश्तेदारों की मौजूदगी में सड़क पर बंद गेट के ठीक बाहर मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जलाकर महिला की डिलीवरी करानी पड़ी। बाद में जच्चा-बच्चा को अस्पताल के अंदर ले जाकर भर्ती किया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने और परिजनों द्वारा लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए एक जांच समिति (Enquiry Committee) का गठन कर दिया है।