हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी फिर आई खुलकर सामने, प्रदेश प्रभारी के सामने ही आपस में भिड़े फौजी और नरवाल गुट के नेता
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के हरियाणा संगठन में अंतर्कलह और गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है, लेकिन एक बार फिर पार्टी के भीतर का यह आंतरिक संघर्ष खुलकर सड़कों और बैठकों के मंच पर आ गया है। हरियाणा कांग्रेस द्वारा आयोजित की गई एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक के दौरान पार्टी के दो प्रमुख गुटों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि पार्टी के प्रदेश प्रभारी और तमाम वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में ही फौजी गुट और नरवाल गुट के समर्थक आपस में बुरी तरह भिड़ गए। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के दौरान मीटिंग हॉल में जमकर हंगामा हुआ, जिससे वहां मौजूद केंद्रीय नेतृत्व के नेता भी हक्के-बक्के रह गए। चुनाव और राजनीतिक गतिविधियों के इस अहम दौर में कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही यह उठापटक एक बार फिर विपक्ष को हमला करने का पूरा मौका दे रही है।
फौजी और नरवाल गुट के बीच वर्चस्व की जंग हुई तेज
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बैठक की शुरुआत तो आम मुद्दों और सांगतिक चर्चा के साथ हुई थी, लेकिन जैसे ही स्थानीय टिकट बंटवारे, पद वितरण और नेतृत्व वर्चस्व का मुद्दा उठा, वैसे ही माहौल गर्म हो गया। बैठक के दौरान फौजी गुट और नरवाल गुट के समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जो देखते ही देखते गाली-गलौज और हाथापाई तक पहुँच गई। दोनों तरफ के नेताओं ने एक-दूसरे पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और संगठन को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया। मंच पर बैठे प्रदेश प्रभारी और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने दोनों पक्षों को शांत कराने की भरपूर कोशिश की, लेकिन कार्यकर्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर था और वे किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं थे। इस हंगामे के कारण बैठक का मुख्य एजेंडा पीछे छूट गया और पार्टी की अंदरूनी कलह एक बार फिर सार्वजनिक हो गई।
अनुशासनहीनता पर आलाकमान सख्त, हो सकती है बड़ी कार्रवाई
हरियाणा कांग्रेस में इस तरह बार-बार প্রকাশ্যে अनुशासनहीनता और गुटबाजी सामने आने से दिल्ली में बैठा पार्टी का केंद्रीय आलाकमान बेहद खफा और चिंतित बताया जा रहा है। कांग्रेस हाईकमान ने इस पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली है और साफ निर्देश दिए हैं कि पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचाने वाले चाहे वे किसी भी गुट के बड़े नेता या कार्यकर्ता क्यों न हों, उनके खिलाफ सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक कांग्रेस अपने घर को ठीक नहीं करती और इन क्षेत्रीय व गुटबाजी वाली क्षत्रप राजनीति को खत्म नहीं करती, तब तक वह चुनावी मैदान में सत्ताधारी दल को कड़ी टक्कर देने में असफल साबित हो सकती है। इस ताज़ा विवाद ने पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी तोड़ा है, जिससे जमीनी स्तर पर नकारात्मक संदेश जा रहा है।
विपक्षी दलों के हाथ लगा बैठे-बिठाए बड़ा राजनीतिक मुद्दा
कांग्रेस संगठन के भीतर हुई इस कलह और प्रदेश प्रभारी के सामने हुए इस हाई-वोल्टेज हंगामे का वीडियो और खबरें अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल चुकी हैं। विरोधी राजनीतिक दलों ने इस मौके को भुनाते हुए कांग्रेस पर जोरदार हमला बोलना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि जिस पार्टी के नेता खुद आपस में लड़ने और एक-दूसरे को नीचा दिखाने में व्यस्त हों, वह पार्टी कभी भी जनता के हितों की रक्षा या प्रदेश का भला नहीं कर सकती। आम जनता और राजनीतिक जानकारों के बीच भी इस बात की चर्चा है कि कांग्रेस अपनी पुरानी गलतियों से सबक सीखने को तैयार नहीं है। अब देखना यह होगा कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इस अंतर्कलह को रोकने के लिए क्या कड़े कदम उठाता है और आगामी राजनीतिक चुनौतियों से कैसे निपटता है।