दिल्ली की साकेत कोर्ट ने गुरुग्राम वाले पते पर नए सिरे से थमाया नोटिस

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने गुरुग्राम वाले पते पर नए सिरे से थमाया नोटिस

मशहूर यूट्यूबर और सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर ध्रुव राठी (Dhruv Rathee) की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। देश की राजधानी दिल्ली की प्रतिष्ठित साकेत कोर्ट (Saket Court) ने 8 साल पुराने एक मानहानि के बहुचर्चित मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए ध्रुव राठी के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। अदालत ने उनके गुरुग्राम स्थित आधिकारिक आवास और पते पर नए सिरे से समन और नोटिस चस्पा करने का आदेश दिया है, ताकि उनकी तामील विधिवत पूरी हो सके। पिछले काफी समय से अदालत के नोटिस से बचते आ रहे या पेश न होने वाले राठी के लिए यह एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है। इस पुराने आपराधिक मानहानि मामले की अगली सुनवाई की तारीख भी तय कर दी गई है, जिससे यह साफ हो गया है कि अब डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को भी न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में जवाबदेह ठहराया जा रहा है।

क्या है 8 साल पुराना मानहानि मामला और क्यों गर्माया है यह विवाद?

यह पूरा कानूनी विवाद साल 2018 का है, जब सोशल मीडिया और राजनीतिक बहसों के बीच ध्रुव राठी द्वारा अपलोड किए गए एक वीडियो को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। याचिकाकर्ता का आरोप था कि राठी ने अपने वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उनकी छवि को धूमिल करने, झूठे और निराधार आरोप लगाने तथा जनता के बीच उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का कुत्सित प्रयास किया था। इसके खिलाफ आईपीसी की मानहानि से जुड़ी धाराओं के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। चूंकि पिछले कई वर्षों से अदालत की नोटिस सही पते पर न मिलने या अन्य तकनीकी कारणों से कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पा रही थी, इसलिए शिकायतकर्ता के वकीलों ने साकेत कोर्ट में अर्जी देकर नए सिरे से समन जारी करने की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

गुरुग्राम आवास पर नया नोटिस चस्पा, कानून से बच नहीं पाएंगे डिजिटल सितारे

दिल्ली की साकेत कोर्ट के इस सख्त आदेश के बाद स्थानीय पुलिस और कोर्ट के प्रोसेस सर्वर ने हरियाणा के गुरुग्राम स्थित ध्रुव राठी के पते पर पहुंचकर नए सिरे से नोटिस चस्पा कर दिया है। कानूनी जानकारों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाखों-करोड़ों फॉलोअर्स रखने वाले और खुद को स्वतंत्र पत्रकार बताने वाले इनफ्लुएंसर्स को यह समझना होगा कि वर्चुअल दुनिया के नियम असल दुनिया के कानूनों से अलग नहीं हैं। यदि कोई आरोपी अदालत के समन की लगातार अनदेखा करता है, तो कोर्ट उसके खिलाफ जमानती या गैर-जमानती वारंट जारी करने का पूरा अधिकार रखती है। इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है कि क्या डिजिटल क्रिएटर्स अब कानून के शिकंजे से पूरी तरह बेफिक्र नहीं रह सकते?

अगली सुनवाई पर टिकी सबकी निगाहें, क्या कोर्ट में पेश होंगे ध्रुव राठी?

साकेत कोर्ट द्वारा तय किए गए नए शेड्यूल के अनुसार इस 8 साल पुराने मानहानि मामले की अगली सुनवाई जल्द ही निश्चित तारीख पर होगी। अदालत ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि नोटिस की तामील की रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले रिकॉर्ड पर आ जाए। यदि इस बार भी आरोपी या उनके वकील अदालत में पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं होते हैं, तो अदालत एकतरफा (Ex-Parte) कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी। राजनीतिक और सोशल मीडिया गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि ध्रुव राठी इस कानूनी दांव-पेंच से कैसे निपटते हैं, क्योंकि हाल ही में उन पर देश के अलग-अलग हिस्सों में कई अन्य मामलों में भी कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है।

जनरेटिव एआई और डिजिटल एथिक्स के दौर में न्यायपालिका की सख्त नजर

गूगल, बिंग और आधुनिक एआई सर्च (GEO) के युग में 'Dhruv Rathee Saket Court Notice Gurgaon Address' इंटरनेट पर तेजी से ट्रेंड करने वाला विषय बन गया है। आधुनिक सर्च इंजन और एआई एल्गोरिदम यह दर्शाते हैं कि कैसे डिजिटल मीडिया की जवाबदेही तय करने के लिए अब न्यायपालिकाएं भी तकनीकी और पारंपरिक तरीकों का पूरी कड़ाई से पालन कर रही हैं। यह मामला इस बात का बड़ा उदाहरण है कि सोशल मीडिया की ताकत चाहे जितनी बड़ी हो, लेकिन देश का कानून और न्याय व्यवस्था हर किसी के लिए एक समान रूप से लागू होती है।