हरियाणा में चक्रवाती तूफान अर्नब का बरपा कहर, खेतों में बिछी धान की फसल

हरियाणा में चक्रवाती तूफान अर्नब का बरपा कहर, खेतों में बिछी धान की फसल

मौसम के बदलते मिजाज और अचानक आए चक्रवाती तूफान अर्नब ने हरियाणा के अन्नदाताओं के सपनों पर पानी फेर दिया है। राज्य के प्रमुख कृषि प्रधान जिलों में बीते दिनों आई तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और चक्रवाती हवाओं के तांडव से खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख फसल धान को भारी नुकसान पहुंचा है। विशेष रूप से निर्यात की जाने वाली प्रीमियम बासमती और अन्य उन्नत किस्म की फसलें पककर पूरी तरह तैयार खड़ी थीं, लेकिन अर्नब तूफान के कारण सैकड़ों एकड़ खेतों में धान के पौधे जमींदोज होकर बिछ गए हैं। खेतों में पानी भरने और तेज हवाओं के कारण कटी हुई और खड़ी दोनों प्रकार की फसलों को अपूरणीय क्षति पहुंची है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद हरियाणा सरकार और कृषि विभाग पूरी तरह से हरकत में आ गए हैं। राज्य कृषि कल्याण विभाग ने सभी प्रभावित जिलों के कृषि अधिकारियों को धरातल पर उतरकर नुकसान का तुरंत आंकलन करने और किसानों से सीधे रिपोर्ट जुटाने के कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

चक्रवाती तूफान अर्नब की अप्रत्याशित दस्तक और खेतों में तबाही का मंजर

मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी चेतावनियों के बीच जब चक्रवाती तूफान अर्नब ने उत्तर भारत की ओर रुख किया, तो इसका सबसे ज्यादा और विनाशकारी प्रभाव हरियाणा के कृषि क्षेत्रों पर देखने को मिला। कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, अंबाला, यमुनानगर, सोनीपत और पानीपत जैसे धान का कटोरा कहे जाने वाले जिलों में अचानक मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ गया। 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तूफानी हवाओं के साथ हुई मुसलाधार बारिश ने लहलहाती फसलों को मिनटों में धाराशायी कर दिया। जो बासमती धान कुछ ही दिनों में कटकर मंडियों में पहुंचने वाली थी और जिससे किसानों को बंपर कमाई की उम्मीद थी, वह अब खेतों में भरे पानी में डूबकर सड़ने की कगार पर पहुंच गई है। आंधी इतनी भीषण थी कि भारी बालियों के बोझ से झुके धान के पौधे अपनी जड़ों से उखड़कर जमीन पर आ गिरे।

बासमती धान की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान, किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

हरियाणा का बासमती चावल न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर के कई देशों में अपनी महक और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन चक्रवाती तूफान अर्नब की इस मार ने बासमती उत्पादक किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जब धान की फसल पकने के अंतिम चरण में होती है या उसकी बालियां पूरी तरह भर जाती हैं, तो उस समय पौधे बेहद भारी और संवेदनशील हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में थोड़ी सी भी तेज हवा या बारिश पौधे को नीचे गिरा देती है। जमीन पर गिरने के बाद बालियां मिट्टी और पानी के संपर्क में आ जाती हैं, जिससे दानों का रंग काला पड़ने लगता है, वे अंकुरित होने लगते हैं या फिर सड़ जाते हैं। इससे न केवल फसल की पैदावार में भारी गिरावट आती है, बल्कि गुणवत्ता खराब होने के कारण मंडियों में किसानों को इसका सही बाजार मूल्य भी नहीं मिल पाता। कई क्षेत्रों में किसानों ने तो कटाई का काम शुरू ही किया था, लेकिन खेतों में पानी भर जाने से हार्वेस्टर और कंबाइन मशीनें भी ठप हो गई हैं।

कृषि विभाग की त्वरित कार्रवाई, अधिकारियों को ग्राउंड जीरो से जानकारी जुटाने के निर्देश

किसानों के बढ़ते आक्रोश और फसल तबाही के भयावह मंजर को देखते हुए हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर कड़े और त्वरित कदम उठाए हैं। विभाग के उच्च अधिकारियों ने सभी जिला उप निदेशकों (DDA) और ब्लॉक कृषि अधिकारियों को तुरंत अपने-अपने क्षेत्रों के गांवों का दौरा करने का आदेश दिया है। अधिकारियों से कहा गया है कि वे बिना किसी लापरवाही के सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचें और हुए नुकसान की पारदर्शी रिपोर्ट तैयार करें। इसके साथ ही सरकार ने 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' पोर्टल और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत पंजीकृत किसानों को सलाह दी है कि वे आपदा के 72 घंटे के भीतर अपने नुकसान की सूचना टोल-फ्री नंबर या संबंधित बीमा कंपनी के ऐप के माध्यम से जरूर दर्ज कराएं। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक आंकड़ों के एकत्र होते ही राहत राशि और मुआवजे की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

स्थानीय मंडियों पर असर और आर्थिक घाटे से परेशान किसान मांग रहे मुआवजा

तूफान अर्नब की वजह से केवल खेतों तक ही तबाही सीमित नहीं रही है, बल्कि इसका सीधा और नकारात्मक असर राज्य की अनाज मंडियों पर भी देखने को मिल रहा है। जिन किसानों ने आंधी से ठीक पहले अपनी फसल काटकर मंडियों में खुले आसमान के नीचे शेड के बाहर रखी थी, वहां भी जलभराव के कारण हजारों क्विंटल धान भीगकर खराब हो गया है। मंडियों में सुखाने की व्यवस्था न होने से व्यापारी भी भीगे हुए धान को खरीदने में आनाकानी कर रहे हैं, जिससे भाव में प्रति क्विंटल 500 से 1000 रुपये तक की बड़ी गिरावट आ गई है। किसान यूनियनों और स्थानीय किसान नेताओं ने सरकार से मांग की है कि चक्रवाती तूफान अर्नब द्वारा पहुंचाई गई इस क्षति को विशेष प्राकृतिक आपदा घोषित किया जाए। किसानों का कहना है कि जिन किसानों ने बीमा नहीं भी कराया है, उन्हें भी राजस्व विभाग की विशेष गिरदावरी कराकर कम से कम 30,000 से 40,000 रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा तुरंत दिया जाना चाहिए ताकि वे अपनी लागत वसूल कर सकें।