हरियाणा में गुरु रविदास जयंती पर बीजेपी का मेगा प्लान: वाराणसी से लाई जाएगी पवित्र मिट्टी, गांव-गांव चलेगा समरसता संकल्प अभियान

हरियाणा में गुरु रविदास जयंती पर बीजेपी का मेगा प्लान: वाराणसी से लाई जाएगी पवित्र मिट्टी, गांव-गांव चलेगा समरसता संकल्प अभियान

देशभर में संतों और महापुरुषों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राजनीतिक दल लगातार नए-नए अभियान चला रहे हैं। इसी कड़ी में हरियाणा (Haryana) की राजनीति में आगामी गुरु रविदास जयंती (Guru Ravidas Jayanti) के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बेहद भव्य और व्यापक मेगा प्लान तैयार किया है। इस रणनीतिक योजना के तहत उत्तर प्रदेश के पवित्र धार्मिक शहर वाराणसी से गुरु रविदास की जन्मस्थली से जुड़ी पवित्र मिट्टी हरियाणा लाई जाएगी। राज्य के हर कोने और गांव-गांव तक इस मिट्टी को पहुंचाकर 'समरसता संकल्प अभियान' (Samarsata Sankalp Abhiyan) का आगाज किया जाएगा। इस सियासी और सामाजिक रूप से बड़े कदम के जरिए पार्टी का मुख्य उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को एकजुट करना और सामाजिक समरसता का संदेश देना है।

वाराणसी से हरियाणा तक जुड़ेगी आस्था की डोर

संत शिरोमणि गुरु रविदास की पावन जन्मस्थली काशी यानी वाराणसी (Varanasi) से लाई जाने वाली इस पवित्र मिट्टी का हरियाणा के प्रत्येक जिले और विधानसभा क्षेत्र में भव्य स्वागत करने की तैयारी की जा रही है। बीजेपी संगठन के वरिष्ठ नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की देखरेख में यह यात्रा निकाली जाएगी। इस पूरी पहल के पीछे का मुख्य उद्देश्य संत रविदास के समानता, भाईचारे और समरसता के संदेश को जमीनी स्तर पर आम जनता तक पहुंचाना है। हरियाणा की राजनीति में अनुसूचित जाति और दलित मतदाताओं की मजबूत पकड़ को देखते हुए इस अभियान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गांव-गांव पहुंचेगा 'समरसता संकल्प अभियान' और सियासी समीकरण

हरियाणा के गांवों और ढाणियों तक इस अभियान के पहुंचने से बीजेपी को जमीनी स्तर पर एक नया वैचारिक आधार मिलने की उम्मीद है। 'समरसता संकल्प अभियान' के तहत चौपालों पर गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी, जिनमें गुरु रविदास के जीवन दर्शन और उनके उपदेशों पर चर्चा होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के जातीय समीकरणों और बयानों की काट के लिए बीजेपी का यह सांस्कृतिक और सामाजिक आउटरीच प्रोग्राम बेहद असरदार साबित हो सकता है। चुनाव के लिहाज से इस प्रकार के आयोजनों से पार्टी को मतदाताओं के साथ सीधा और भावनात्मक जुड़ाव बनाने में बड़ी मदद मिलती है।

सामाजिक समरसता और राजनीतिक संदेश का अनूठा संगम

संतों की वाणी और उनके विचारों को राजनीति के साथ जोड़कर सकारात्मक संदेश देने की यह अनूठी पहल हरियाणा के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन चुकी है। राज्य के विभिन्न जिलों में इस अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली गई है और स्थानीय कार्यकर्ताओं को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। आने वाले दिनों में वाराणसी की इस पवित्र मिट्टी के साथ शुरू होने वाला यह महाअभियान राज्य की राजनीति में कितना बड़ा प्रभाव डालेगा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल इस मेगा प्लान ने राजनीतिक तापमान को जरूर बढ़ा दिया है।

 

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