IMT मानेसर की क्रिकेट एकेडमी में खेल रहा था 8 साल का मासूम: ग्राउंड के भारी-भरकम रोलर के नीचे दबकर दर्दनाक मौत
हरियाणा के औद्योगिक शहर गुरुग्राम के आईएमटी मानेसर (IMT Manesar) क्षेत्र से एक बेहद दिल दहला देने वाली और झकझोर देने वाली दुर्घटना सामने आई है, जिसने खेल अकादमियों की सुरक्षा व्यवस्था और खेल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. मानेसर की एक स्थानीय क्रिकेट एकेडमी के विशाल मैदान में खेलने आया महज 8 साल का एक मासूम बच्चा खेलते-खेलते अचानक वहां रखे भारी-भरकम लोहे के ग्राउंड रोलर के नीचे आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. इस भीषण और भयानक हादसे के बाद से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है, और मासूम बच्चे के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. एक हंसता-खेलता बच्चा जो अपने माता-पिता से क्रिकेट खेलने की बात कहकर घर से निकला था, जब कुछ ही घंटों बाद उसका शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया. स्थानीय पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में ले लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. इस दुखद घटना के बाद से स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और खेल प्रेमियों के भीतर खेल अकादमियों के प्रबंधकों के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा और आक्रोश देखने को मिल रहा है, जो बच्चों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह लापरवाह नजर आते हैं.
कैसे हुआ यह खौफनाक हादसा, मैदान पर छोड़े गए बिना ब्रेक के रोलर ने ली जान
प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती पुलिस जांच के अनुसार, यह घटना उस समय घटी जब बच्चे एकेडमी के मैदान में अपनी ट्रेनिंग खत्म करने के बाद या खेल-खेल में इधर-उधर घूम रहे थे. क्रिकेट की पिच को समतल करने और उसकी देखरेख के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वह भारी-भरकम लोहे का रोलर मैदान के एक कोने में बिना किसी सुरक्षा लॉक या ब्रेक के खड़ा किया गया था. बताया जा रहा है कि बच्चे जब मैदान पर खेल रहे थे, तभी दुर्घटनावश या खेलते-खेलते वह भारी रोलर अचानक अपनी जगह से लुढ़क गया और उसकी चपेट में वह 8 साल का मासूम आ गया. रोलर का वजन इतना अधिक था कि बच्चा उसके नीचे बुरी तरह दब गया और उसे संभालने या बचाने का मौका तक नहीं मिल सका. खेल अकादमियों में इस तरह के भारी उपकरणों को हमेशा सुरक्षित स्थान पर ताले में या बैरिकेडिंग के पीछे रखना अनिवार्य होता है, ताकि बच्चों की पहुंच वहां तक न हो सके. लेकिन मानेसर की इस एकेडमी में बरती गई घोर लापरवाही ने एक मासूम की हंसती-खेलती जिंदगी को हमेशा के लिए छीन लिया, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि आयोजकों और कोचों ने बच्चों की सुरक्षा के मानकों को ताक पर रख दिया था.
पुलिस की कार्रवाई और एकेडमी प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही पर उठ रहे गंभीर सवाल
घटना की सूचना मिलते ही मानेसर थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन का अमला तुरंत मौके पर जा पहुंचा और हालात का जायजा लिया. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में मृत बच्चे के परिवार वालों की शिकायत के आधार पर संबंधित क्रिकेट एकेडमी के संचालकों, कोचों और मैदान के रखरखाव के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि आखिर मैदान पर इतना खतरनाक भारी उपकरण बिना सुरक्षा के क्यों छोड़ा गया था और क्या इसके संचालन के लिए कोई जिम्मेदार व्यक्ति वहां मौजूद नहीं था. इस दर्दनाक हादसे के बाद से एकेडमी का मुख्य संचालक और कोच मौके से फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं. जिला प्रशासन और खेल विभाग के अधिकारियों ने भी इस घटना का कड़ा संज्ञान लेते हुए शहर की सभी निजी खेल अकादमियों की सुरक्षा ऑडिट (Safety Audit) कराने के संकेत दिए हैं. अभिभावकों का कहना है कि यदि इन अकादमियों ने बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए, तो वे अपने बच्चों को ऐसी जगहों पर भेजना पूरी तरह बंद कर देंगे.
खेल अकादमियों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की बढ़ती चिंताएं और कड़े कदम
आज के समय में माता-पिता अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य और खेलकूद में उनकी प्रतिभा निखारने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा इन निजी अकादमियों और कोचिंग सेंटर्स पर खर्च करते हैं, इस उम्मीद में कि वहां उनके बच्चे सुरक्षित रहेंगे. लेकिन मानेसर की इस हृदयविदारक घटना ने हर उस माता-पिता को झकझोर कर रख दिया है जो अपने जिगर के टुकड़े को ट्रेनिंग के लिए बाहर भेजते हैं. देश भर की खेल अकादमियों में सुरक्षा के बुनियादी नियमों, अप्रशिक्षित स्टाफ, बाउंड्री वॉल की कमी और खतरनाक उपकरणों के खुले में पड़े रहने जैसी समस्याएं आम बात हो चली हैं, जिन पर अब लगाम लगाना बेहद जरूरी हो गया है. केवल कागजी कार्रवाई या रजिस्ट्रेशन के सहारे चलने वाली इन अकादमियों पर सरकार और स्थानीय प्रशासन को नकेल कसनी होगी ताकि भविष्य में किसी अन्य माता-पिता को अपने मासूम बच्चे को इस तरह न खोना पड़े. इस दुखद घड़ी में पूरा मानेसर शहर पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और हर कोई यही मांग कर रहा है कि इस लापरवाही के असली गुनहगारों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाए और उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाए ताकि इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके.