हार्दिक पांड्या का एक और ब्रेक चैंपियंस ट्रॉफी से पहले बीसीसीआई कोई भी रिस्क क्यों नहीं लेना चाहता?
News India Live, Digital Desk : क्रिकेट के गलियारों में हार्दिक पांड्या का नाम हमेशा सुर्खियों में रहता है। कभी उनकी शानदार फिनिशिंग को लेकर चर्चा होती है, तो कभी उनकी फिटनेस पर सवाल उठते हैं। अभी भारतीय फैंस चैंपियंस ट्रॉफी के उत्साह में डूबे ही थे कि एक ऐसी खबर आ रही है जो शायद आपको थोड़ा मायूस कर दे।
खबर ये है कि टीम इंडिया के धाकड़ ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या का आगामी न्यूजीलैंड वनडे सीरीज (India vs New Zealand ODI Series) में खेलना बहुत मुश्किल लग रहा है। हालिया रिपोर्ट्स की मानें तो हार्दिक को शायद इस सीरीज के लिए आराम दिया जा सकता है। अब सवाल ये उठता है कि क्या ये वाकई आराम है या फिटनेस का कोई नया चक्कर?
वर्कलोड मैनेजमेंट या बड़ी सावधानी?
2025 का ये साल भारतीय टीम के लिए काफी व्यस्त होने वाला है और सबसे बड़ा लक्ष्य है ICC चैंपियंस ट्रॉफी। बीसीसीआई (BCCI) और टीम मैनेजमेंट ये बात अच्छे से जानते हैं कि हार्दिक जैसा खिलाड़ी, जो बल्लेबाजी के साथ-साथ तेज गेंदबाजी का विकल्प भी देता है, टीम के लिए कितना जरूरी है। लेकिन उनकी 'ग्लास जैसी बॉडी' (बेहद संवेदनशील फिटनेस) हमेशा से चिंता का विषय रही है।
जानकारों का कहना है कि हार्दिक को टीम में खिलाने से ज्यादा उन्हें बड़े टूर्नामेंट्स के लिए फिट रखना जरूरी है। यही वजह है कि न्यूजीलैंड जैसी सीरीज में, जो घर पर ही होने की संभावना है, चयनकर्ता उनके शरीर को ज्यादा बोझ नहीं देना चाहते। हार्दिक अक्सर टी-20 मैचों में नजर आते हैं, लेकिन 50 ओवर के मैच में उनके गेंदबाजी कोटा को देखते हुए मैनेजमेंट थोड़ा संभलकर चलना चाहता है।
किसका नुकसान, किसका फायदा?
हार्दिक अगर बाहर होते हैं, तो टीम के संतुलन पर जरूर असर पड़ता है। हमें वो खिलाड़ी चाहिए जो छठे या सातवें नंबर पर आकर तूफानी बल्लेबाजी भी कर सके और बीच के ओवरों में विकेट भी निकाल सके। हालांकि, उनके बाहर रहने से शिवम् दुबे या नितीश रेड्डी जैसे उभरते हुए ऑलराउंडरों को अपना दम दिखाने का सुनहरा मौका मिल सकता है।
फैंस की धड़कनें तेज
हार्दिक की गैर-मौजूदगी की खबर जैसे ही सोशल मीडिया पर आई, फैंस के बीच फिर से बहस शुरू हो गई है। कुछ का कहना है कि अगर वो खेलेंगे नहीं तो लय में कैसे रहेंगे? वहीं कुछ का मानना है कि 'किंग' को सीधे चैंपियंस ट्रॉफी में मैदान मारते हुए देखना ही बेहतर होगा।
हकीकत ये है कि टीम इंडिया फिलहाल एक लंबी योजना पर काम कर रही है। हमें केवल एक सीरीज नहीं, बल्कि एक बड़ी ट्रॉफी जीतनी है। ऐसे में हार्दिक पांड्या को मैदान से दूर रखना एक 'कैलकुलेटेड रिस्क' (सोचा-समझा जोखिम) हो सकता है। अब ये तो आने वाला समय ही बताएगा कि टीम का ये फैसला मास्टरस्ट्रोक साबित होगा या बैकफायर करेगा।