Gurudas Murder Case: 25 साल बाद जेल से बाहर आएगा शूटर उमेश सिंह, हाईकोर्ट ने दिया रिहाई का आदेश
News India Live, Digital Desk : झारखंड की राजनीति को हिलाकर रख देने वाले निरसा के पूर्व विधायक गुरुदास चटर्जी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे शूटर उमेश सिंह की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है.झारखंड हाईकोर्ट ने करीब 25 सालों से जेल में बंद उमेश सिंह को रिहा करने का आदेश दिया है. यह फैसला धनबाद के उस बहुचर्चित राजनीतिक हत्याकांड में एक बड़ा मोड़ है, जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है.
क्या था पूरा मामला?
14 अप्रैल, 2000 को मासस (मार्क्सिस्ट समन्वय समिति) के लोकप्रिय विधायक गुरुदास चटर्जी धनबाद से एक बैठक में शामिल होने के बाद मोटरसाइकिल से अपने घर निरसा लौट रहे थे.गोविंदपुर के पास घात लगाकर बैठे उमेश सिंह और उसके एक साथी शिव शंकर सिंह ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई.गुरुदास चटर्जी अपनी सादगी और मजदूरों-शोषितों के हक़ की आवाज उठाने वाले नेता के तौर पर जाने जाते थे. उनकी दिनदहाड़े हत्या ने पूरे कोयलांचल में सनसनी फैला दी थी.
इस हत्याकांड में निचली अदालत ने उमेश सिंह और शिव शंकर सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. बाद में, हाईकोर्ट ने इस सजा को और सख्त करते हुए फांसी में बदल दियाहालांकि, दोषियों ने जब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो शीर्ष अदालत ने फांसी की सजा को वापस उम्रकैद में तब्दील कर दिया था.उमेश सिंह 27 अप्रैल, 2000 से लगातार जेल में बंद था.
हाईकोर्ट ने क्यों दिया रिहाई का आदेश?
उमेश सिंह पिछले करीब 30 साल (अवकाश के दिनों को छोड़कर) से जेल में अपनी सजा काट रहा था.उसकी लंबी कैद को देखते हुए रिहाई के लिए कई बार राज्य सरकार के एडवाइजरी बोर्ड के सामने अर्जी दी गई. लेकिन बोर्ड ने हर बार यह कहकर अर्जी को खारिज कर दिया कि उमेश एक पेशेवर शूटर था और उसे रिहा करने से समाज पर गलत असर पड़ेगा
राज्य सरकार के इसी फैसले के खिलाफ उमेश सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. हाईकोर्ट के जस्टिस अंबुज नाथ ने मामले की सुनवाई करते हुए उमेश सिंह की लंबी कैद को आधार मानते हुए राज्य सरकार को उसे रिहा करने का आदेश दिया है.
गौरतलब है कि इस हत्याकांड के दूसरे दोषी शिव शंकर सिंह को 2018 में ही तत्कालीन सरकार की सजा पुनरीक्षण कमेटी के फैसले के बाद रिहा कर दिया गया था.गुरुदास चटर्जी के पुत्र अरूप चटर्जी आज अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए निरसा से विधायक हैं