असम में टीएमसी का बढ़ता प्रभाव: 500 नेताओं और कार्यकर्ताओं का पार्टी में शामिल होना भाजपा के लिए नई चुनौती

Himanta Sarma 1735305634168 1735

गुवाहाटी में शुक्रवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में असम की राजनीति ने बड़ा मोड़ लिया, जब करीब 500 नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थाम लिया। इस अवसर पर टीएमसी सांसद सुष्मिता देव और असम टीएमसी अध्यक्ष रमन बोरठाकुर मौजूद थे। कांग्रेस, असम गण परिषद (एजीपी), असम जातीय परिषद (एजेपी), और भाजपा सहित कई पार्टियों के नेताओं का टीएमसी में शामिल होना राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत देता है।

सुष्मिता देव ने दिया नेताओं के फैसले का कारण

टीएमसी में शामिल हुए नेताओं के बारे में बात करते हुए सुष्मिता देव ने कहा कि इन्हें उनकी पार्टियों में नजरअंदाज किया जा रहा था। उन्होंने कहा:
“टीएमसी जमीनी कार्यकर्ताओं की पार्टी है। हमारा उद्देश्य असम में एक मजबूत टीम तैयार करना है। भाजपा के खिलाफ जब कांग्रेस लड़ती है, तो भाजपा जीतती है। लेकिन जब लड़ाई टीएमसी, डीएमके, या समाजवादी पार्टी जैसी क्षेत्रीय पार्टियों से होती है, तो भाजपा हारती है।”

सुष्मिता ने असम के लोगों को राष्ट्रीय पार्टियों की बजाय क्षेत्रीय पार्टियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

असम में टीएमसी का विस्तार: भाजपा के लिए खतरे की घंटी

टीएमसी, जो अब तक बंगाल की राजनीति में प्रभावी रही है, असम में भी अपनी जड़ें मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।

  • विभिन्न 17-18 समुदायों के नेताओं का टीएमसी में शामिल होना इस बात का संकेत है कि पार्टी राज्य में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरने की तैयारी कर रही है।
  • यह भाजपा के लिए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में एक नई चुनौती बन सकती है।

भाजपा के लिए नई चुनौती क्यों है महत्वपूर्ण?

टीएमसी का असम में विस्तार भाजपा के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती है।

  • असम में भाजपा की स्थिति को मजबूत करने वाले हिमंता बिस्वा सरमा को अब टीएमसी के बढ़ते प्रभाव से निपटना होगा।
  • टीएमसी ने संकेत दिया है कि उनका फोकस असम में भाजपा के खिलाफ गठबंधन बनाने और प्रभावी चुनावी रणनीति तैयार करने पर है।

टीएमसी का असम में बढ़ता प्रभाव: क्या बदलेगी सियासी तस्वीर?

टीएमसी का असम में प्रवेश केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है।

  • पार्टी के नेताओं ने दावा किया है कि वे भाजपा के विरोध में एक सशक्त विकल्प के रूप में उभरने के लिए काम कर रहे हैं।
  • बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं का शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि पार्टी की लोकप्रियता बढ़ रही है।

क्या ममता बनर्जी की रणनीति काम करेगी?

टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने असम में पार्टी के विस्तार के लिए जो रणनीति अपनाई है, वह भाजपा के लिए चिंता का विषय बन गई है।

  • असम में कांग्रेस के कमजोर पड़ने और भाजपा के मजबूत होते जनाधार के बीच, टीएमसी क्षेत्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है।
  • अगर टीएमसी सफल होती है, तो यह असम की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत होगा।

निष्कर्ष: असम की राजनीति में संभावित बदलाव

टीएमसी द्वारा असम में 500 नेताओं और कार्यकर्ताओं को जोड़ना राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।

  • भाजपा के लिए यह एक स्ट्रैटेजिक चैलेंज है, जबकि कांग्रेस और अन्य पार्टियों के लिए यह संकेत है कि क्षेत्रीय राजनीति में टीएमसी की पैठ मजबूत हो रही है।
  • ममता बनर्जी की पार्टी का यह कदम असम की सियासी तस्वीर को कितना बदलता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।