चुनाव से पहले बंगाल में बड़ा खेला राज्यपाल आनंद बोस का इस्तीफा, ममता बनर्जी ने अमित शाह पर दागे गंभीर सवाल
News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान से ठीक पहले राज्य में एक बड़ा संवैधानिक उलटफेर हुआ है। गुरुवार (5 मार्च 2026) को राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस अचानक हुए बदलाव पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए इसे "राजनीतिक दबाव" का नतीजा बताया है।
सी.वी. आनंद बोस का अचानक इस्तीफा: '3.5 साल काफी हैं'
राज्यपाल आनंद बोस ने दिल्ली में अपना इस्तीफा सौंपा। अपने बयान में उन्होंने कहा, "मैंने राज्यपाल के रूप में साढ़े तीन साल बिताए हैं, जो मेरे लिए पर्याप्त हैं।" हालांकि, उनका कार्यकाल नवंबर 2027 तक था, लेकिन चुनाव से ऐन पहले उनके हटने से कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। बोस का कार्यकाल राज्य सरकार के साथ लगातार टकराव और विवादों भरा रहा है।
ममता बनर्जी का आरोप: "शाह के दबाव में हुआ फैसला"
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह इस इस्तीफे से स्तब्ध हैं। ममता ने आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक हितों को साधने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यपाल पर दबाव बनाया होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि नए राज्यपाल की नियुक्ति के मामले में केंद्र सरकार ने स्थापित परंपराओं को ताक पर रखकर उनसे कोई सलाह-मशविरा नहीं किया।
आर.एन. रवि होंगे नए राज्यपाल: बढ़ा टकराव का खतरा?
अमित शाह ने मुख्यमंत्री को सूचित किया है कि तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि अब पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी संभालेंगे। आर.एन. रवि का तमिलनाडु में वहां की राज्य सरकार (DMK) के साथ भी काफी विवाद रहा है। ऐसे में बंगाल में उनके आने से 'नबन्ना' (सचिवालय) और 'लोक भवन' (राजभवन) के बीच चल रही जंग के और तेज होने के आसार हैं।
क्या है इस इस्तीफे के पीछे का सियासी समीकरण?
बंगाल में अप्रैल-मई 2026 में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। चुनाव आयोग जल्द ही तारीखों का एलान कर सकता है। ऐसे समय में राज्यपाल का बदलना और एक ऐसे व्यक्ति को लाना जो पहले से ही विपक्षी सरकारों के साथ सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं, बीजेपी और टीएमसी के बीच आर-पार की लड़ाई का संकेत दे रहा है। बीजेपी ने ममता के आरोपों को आधारहीन बताते हुए इसे एक रूटीन प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है।