Government Job : झारखंड के अभ्यर्थियों के लिए खुशखबरी ,SC ने बदला नियम, JPSC में अब नहीं होगी ऐसी दिक्कत

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News India Live, Digital Desk: झारखंड में JPSC की सिविल सेवा परीक्षा की एक उम्मीदवार श्रेया तिर्की को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. मेडिकल फिटनेस टेस्ट को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने श्रेया के पक्ष में फैसला सुनाया है, जिससे उनके प्रशासनिक सेवा में आने की राह अब आसान हो गई है. यह मामला एक मिसाल कायम कर सकता है, खासकर उन उम्मीदवारों के लिए जिन्हें शारीरिक बाधाओं के चलते अक्सर परीक्षा या नौकरी से वंचित कर दिया जाता है.

श्रेया तिर्की के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला:

  • मेडिकल फिटनेस टेस्ट में राहत: श्रेया तिर्की को JPSC सिविल सेवा परीक्षा के तहत मेडिकल फिटनेस टेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने विशेष राहत दी है.
  • न्यायपालिका का संवेदनशील रुख: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उम्मीदवारों की शारीरिक बाधाओं के प्रति एक संवेदनशील और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाया है. यह दर्शाता है कि योग्यता और क्षमता को शारीरिक बाधाओं से ऊपर रखा जाना चाहिए, खासकर जब उम्मीदवार अन्य मानदंडों पर खरे उतरते हों.
  • मामले का संदर्भ: श्रेया तिर्की ने जेपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन उनके मेडिकल फिटनेस टेस्ट में कुछ समस्या थी, जिससे उनके चयन पर रोक लग गई थी. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
  • परिणाम: सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से श्रेया तिर्की के प्रशासनिक सेवा में चयन का रास्ता साफ हो गया है. यह फैसला अन्य उम्मीदवारों के लिए भी एक उम्मीद की किरण बन सकता है, जिन्हें समान चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

यह निर्णय झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और अन्य सेवा चयन आयोगों के लिए एक दिशा-निर्देश भी है कि उन्हें शारीरिक फिटनेस मानदंडों को लागू करते समय मानवीय और यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि योग्य उम्मीदवारों को अनावश्यक रूप से वंचित न किया जा सके.