झारखंड के खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी, अब आपके जिले में ही खुल रहा है स्पोर्ट्स साइंस सेंटर

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News India Live, Digital Desk : झारखंड की मिट्टी में खेल और खिलाड़ियों का जज्बा हमेशा से कूट-कूट कर भरा रहा है। चाहे तीरंदाजी हो, हॉकी हो या फिर क्रिकेट यहाँ के बच्चों ने पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाया है। लेकिन एक कड़वी सच्चाई यह भी रही है कि गाँव-कस्बों से निकलने वाले कई प्रतिभावान खिलाड़ी चोट या सही डाइट और वैज्ञानिक ट्रेनिंग के अभाव में दम तोड़ देते थे।

इसी कमी को दूर करने के लिए साल 2026 में झारखंड सरकार एक बहुत ही बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। अब खिलाड़ियों को अपनी परफॉरमेंस सुधारने या चोट से उबरने के लिए केवल रांची (Ranchi) के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार राज्य के 4 प्रमंडलों में 'स्पोर्ट्स साइंस सेंटर' (Sports Science Center) शुरू करने जा रही है।

आखिर क्यों खास हैं ये सेंटर्स?
अक्सर हम सोचते हैं कि खेल सिर्फ मैदान पर पसीना बहाने का नाम है, लेकिन आज के दौर में खेल के पीछे गहरा विज्ञान भी छिपा है। इन नए सेंटर्स की सबसे बड़ी खूबी यह होगी कि यहाँ वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट्स की एक पूरी टीम मौजूद रहेगी। इसमें स्पोर्ट्स न्यूट्रिशनिस्ट (Nutritionist), फिजियोथेरेपिस्ट (Physiotherapist) और स्पोर्ट्स सायकोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ शामिल होंगे। ये लोग यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे खिलाड़ियों को कब, क्या और कितना खाना है, और कैसे वो अपनी स्टेमिना बढ़ा सकते हैं।

किन जिलों और प्रमंडलों को मिलेगा फायदा?
झारखंड के खेल मंत्री सुदिव्य कुमार के अनुसार, ये 4 सेंटर प्रमंडलीय मुख्यालयों में स्थापित किए जाएंगे। इनमें पलामू, उत्तरी छोटानागपुर, कोल्हान और संथाल परगना प्रमंडल शामिल हैं। रांची में पहले से ही एक हाई-परफॉरमेंस सेंटर मौजूद है, लेकिन दूर-दराज के इलाकों जैसे चाईबासा, दुमका या मेदिनीनगर के बच्चों के लिए वहां पहुँच पाना काफी मुश्किल होता था। अब इन सेंटर्स के आने से ट्रेनिंग सीधे उनके दरवाजे तक पहुँच रही है।

अब इंजरी (Injury) नहीं बनेगी करियर का अंत
किसी भी खिलाड़ी के लिए चोट सबसे बड़ा डर होता है। कई बार गाँव का उभरता हुआ सितारा छोटी सी इंजरी के कारण हमेशा के लिए मैदान से दूर हो जाता था। इन स्पोर्ट्स साइंस सेंटर्स में मॉडर्न मशीनें होंगी जो किसी भी इंजरी का शुरुआत में ही पता लगा लेंगी। वैज्ञानिकों का लक्ष्य यह है कि खिलाड़ियों के शरीर की बनावट के आधार पर उन्हें यह बताया जाए कि वे किस खेल में दुनिया को मात दे सकते हैं।

भर्ती होंगे हाई-टेक विशेषज्ञ
इस काम को बेहतरीन ढंग से अंजाम देने के लिए सरकार बाहर से अनुभवी विशेषज्ञों को भी लाने की तैयारी में है। इसका सबसे बड़ा लाभ हमारे आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों के उन खिलाड़ियों को मिलेगा जिनके पास हुनर तो है, पर सुविधाओं के नाम पर अब तक उन्हें सिर्फ़ कच्चा मैदान मिलता था।

कुल मिलाकर, 2026 की यह पहल झारखंड को 'देश का स्पोर्ट्स हब' बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव साबित होने वाली है। अब हमारे प्रदेश के खिलाड़ी जब मैदान पर उतरेंगे, तो उनके पीछे केवल जुनून नहीं, बल्कि विज्ञान की ताकत भी होगी।