Gas vs Acidity : क्या आप भी गैस की बीमारी में एसिडिटी की दवा खा रहे हैं? आज ही दूर करें कन्फ्यूजन

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News India Live, Digital Desk : हम भारतीय खाने के बड़े शौकीन होते हैं। छोले-भठूरे हों या मसालेदार पनीर, जब सामने आता है तो हाथ नहीं रुकता। लेकिन असली कहानी शुरू होती है खाने के आधे घंटे बाद। कभी पेट फूलकर ढोल जैसा हो जाता है, तो कभी गले में खट्टी डकारें आने लगती हैं।

हम में से ज़्यादातर लोग मेडिकल स्टोर पर जाकर बस एक ही बात कहते हैं "भैया, पेट खराब है, गैस की गोली दे दो।" लेकिन रुकिए! क्या आपको वाकई गैस है, या आप एसिडिटी के शिकार हैं? आयुर्वेद के अनुसार ये दोनों अलग-अलग चीजें हैं और इनका इलाज भी अलग है। अगर आप गलत मर्ज की गलत दवा खाएंगे, तो आराम कैसे मिलेगा?

आइए, आज बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है और रसोई की वो कौन सी जादुई चीज़ें हैं जो आपको राहत दिला सकती हैं।

कैसे पहचानें: गैस है या एसिडिटी? (Difference Between Gas and Acidity)

इन दोनों को पहचानना बहुत आसान है, बस अपने शरीर के इशारों को समझें:

  1. गैस (Gas/Bloating): इसे आप 'हवा' कह सकते हैं।
    • लक्षण: अगर आपको लगता है कि पेट फूला हुआ है, पेट में भारीपन है, और रुक-रुक कर तीखा दर्द इधर-उधर भाग रहा है, तो यह गैस है। इसमें डकारें आती हैं और कई बार सिर में भी भारीपन लगता है। आयुर्वेद इसे 'वात' (Vata) का बिगड़ना कहता है।
  2. एसिडिटी (Acidity/Heartburn): इसे आप 'आग' समझ लीजिये।
    • लक्षण: अगर पेट के ऊपरी हिस्से में या सीने के बीचों-बीच जलन हो रही है, गले में खट्टा पानी आ रहा है, या मुंह का स्वाद कड़वा हो गया है, तो यह एसिडिटी है। इसमें दर्द कम और 'जलन' ज्यादा होती है। आयुर्वेद में यह 'पित्त' (Pitta) बढ़ने के कारण होता है।

आखिर ये होता क्यों है?

वजह बहुत साफ़ है। गैस तब बनती है जब आप खाना ठीक से चबाकर नहीं खाते या खाने के साथ ढेर सारा पानी पी लेते हैं, जिससे खाना पचने के बजाय पेट में सड़ने लगता है।
वहीं, एसिडिटी तब होती है जब हम ज़रूरत से ज्यादा मिर्च-मसाले, चाय-कॉफी या तला हुआ खाना खा लेते हैं, जिससे पेट में एसिड की बाढ़ आ जाती है।

घर पर मौजूद आयुर्वेदिक रामबाण इलाज

राहत की बात यह है कि आपको हर बार गोली खाने की ज़रूरत नहीं है। आपकी रसोई में ही इसका पक्का इलाज मौजूद है।

  • अगर 'गैस' सताए, तो अजवाइन आजमाएं:
    गैस की सबसे बड़ी दुश्मन है अजवाइन (Carom Seeds)। आधा चम्मच अजवाइन में चुटकी भर काला नमक मिलाएं और उसे गर्म पानी के साथ फक्की ले लें। यह पेट में फंसी वायु को तुरंत बाहर निकाल देती है और आपको हल्का महसूस होता है। आप खाने के बाद हींग और छाछ का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
  • अगर 'एसिडिटी' जलाए, तो सौंफ बचाए:
    जब सीने में जलन हो, तो गर्म चीज़ें (जैसे अदरक या काली मिर्च) बिल्कुल न खाएं। इसके बजाय सौंफ (Fennel Seeds) चबाएं या सौंफ का पानी पियें। सौंफ की तासीर ठंडी होती है जो पेट की आग को शांत करती है। इसके अलावा, ठंडा दूध या ताज़े आंवले का जूस भी एसिडिटी में तुरंत ठंडक पहुंचाता है।

जीवनशैली में छोटा सा बदलाव

दोस्तों, पेट हमारे शरीर का इंजन है। अगर इंजन ठीक रहेगा, तो गाड़ी बढ़िया चलेगी। कोशिश करें कि रात का खाना सोने से 2-3 घंटे पहले खा लें। और हाँ, खाने के तुरंत बाद सोफे पर लेटें नहीं, बल्कि 10 मिनट 'वज्रासन' में बैठें या टहल लें।

सिर्फ यह पहचान लेना कि आपको गैस है या एसिडिटी, आपकी आधी परेशानी ख़त्म कर सकता है। सही पहचानें और सही घरेलू नुस्खा अपनाएं!