भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी, निवेशकों को बड़ा झटका

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भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली का दौर जारी है, जिससे बाजार में भारी गिरावट देखी जा रही है। फरवरी 2025 में भी यह प्रवृत्ति जारी रही, जहां विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने 34,574 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इस साल अब तक कुल 1,12,061 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री हो चुकी है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।

FII की बिकवाली का असर: फरवरी में सबसे बुरा दिन

शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 11,639 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जो फरवरी का सबसे खराब कारोबारी दिन रहा।
फरवरी में 20 कारोबारी दिनों में से सिर्फ 2 दिन ही खरीदारी देखने को मिली, बाकी दिन बिकवाली हावी रही।
18 फरवरी को FPI ने 4,786.60 करोड़ रुपये और 4 फरवरी को 809.20 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
जनवरी में FII ने 78,027 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी।

क्यों बिकवाली कर रहे हैं विदेशी निवेशक?

शेयर बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों द्वारा बाजार से पैसा निकालने के पीछे कई बड़े कारण हैं:

भारतीय बाजार का ऊंचा वैल्यूएशन – भारतीय शेयर बाजार की वैल्यू वर्तमान में ऊंची बनी हुई है, जिससे FPI को मुनाफावसूली का मौका दिख रहा है।
कंपनियों के Q3 (अक्टूबर-दिसंबर) के कमजोर नतीजे – तीसरी तिमाही के आर्थिक नतीजे औसत से नीचे रहे हैं, जिससे निवेशकों को अनिश्चितता महसूस हो रही है।
वैश्विक अनिश्चितताएं – अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध और ट्रंप प्रशासन की नीतियों ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया है।
डॉलर की मजबूती और ब्याज दरें – अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने से विदेशी निवेशक उच्च रिटर्न के लिए अपना पैसा अमेरिकी बाजार में लगा रहे हैं।

अक्टूबर-नवंबर 2024 में भी हुई थी जबरदस्त बिकवाली

दिसंबर 2024 में विदेशी निवेशकों ने 15,446 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे, लेकिन इससे पहले अक्टूबर और नवंबर में उन्होंने जबरदस्त बिकवाली की थी।
इन दो महीनों में कुल 1,15,629 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री हुई थी।
पूरे 2024 में विदेशी निवेशकों ने केवल 427 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जो पिछले सालों की तुलना में बेहद कम था।

फरवरी 2025 में निफ्टी ने कोविड के बाद सबसे बड़ी गिरावट देखी

फरवरी में निफ्टी 5.9% लुढ़क गया, जो कोविड के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है।
ट्रंप प्रशासन द्वारा टैरिफ बढ़ाने की धमकी के कारण आईटी, ऑटो और फार्मा सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली से रुपये में भी कमजोरी आई, जिससे बाजार पर और अधिक दबाव बना।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

लॉन्ग टर्म निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं – बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी, लेकिन गिरावट अच्छे स्टॉक्स में निवेश के लिए अवसर भी हो सकती है।
 SIP और म्यूचुअल फंड निवेशकों को धैर्य रखना चाहिए – बाजार में गिरावट के बावजूद SIP में निवेश जारी रखें।
 विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रह सकती है – जब तक वैश्विक अनिश्चितता बनी रहेगी, विदेशी निवेशकों की तरफ से बिकवाली की संभावना बनी रहेगी।
भारतीय बाजार की लंबी अवधि की संभावनाएं मजबूत – भारत की अर्थव्यवस्था के मजबूत फंडामेंटल्स के कारण बाजार मध्यम और लंबी अवधि में अच्छा प्रदर्शन कर सकता है।