पहले 58 सैनिक मारे, अब टैंकों से हमला! पाकिस्तान-अफगानिस्तान में छिड़ी सीधी जंग
पड़ोसी मुल्कों पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बीच हालात जंग जैसे हो गए हैं। जो कभी एक-दूसरे के दोस्त माने जाते थे, आज वो सरहदों पर एक-दूसरे के खून के प्यासे बने हुए हैं। मंगलवार को दोनों देशों की सेनाएं एक बार फिर सीमा पर भिड़ गईं, जिसके बाद से तनाव चरम पर है।
पाकिस्तान का आरोप है कि अफ़गानी सैनिकों ने 'बिना किसी उकसावे के' उनकी चौकियों पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने भी 'माकूल जवाब' देते हुए अफ़गानी टैंकों और सैनिक ठिकानों को तबाह करने का दावा किया है।
यह कोई पहली बार नहीं, हफ़्ते भर से चल रहा है खूनी खेल
यह हफ़्ते भर में दूसरी बार है जब दोनों देशों के बीच इस तरह की हिंसक झड़प हुई है। अभी पिछले शनिवार को ही दोनों के बीच एक खूनी संघर्ष हुआ था, जिसमें दोनों तरफ से भारी नुकसान के दावे किए गए:
- अफ़गानिस्तान का दावा: काबुल ने दावा किया था कि उसने पाकिस्तानी सेना के हवाई हमलों का बदला लेते हुए 58 पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर कर दिया।
- पाकिस्तान का दावा: वहीं, पाकिस्तान ने अपने 23 सैनिकों के मारे जाने की बात कबूली, लेकिन जवाबी कार्रवाई में 200 से ज़्यादा तालिबानी और संबद्ध आतंकियों को मारने का दावा किया।
तो आखिर यह तनाव इतना बढ़ा कैसे?
इस पूरी लड़ाई की जड़ में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) नाम का आतंकी संगठन है।
- पाकिस्तान का आरोप है कि अफ़गानी तालिबान TTP को अपनी ज़मीन पर पनाह देता है, और यही आतंकी पाकिस्तान में आकर हमले करते हैं।
- जबकि काबुल इस बात से साफ इनकार करता है और कहता है कि वह अपनी ज़मीन का इस्तेमाल किसी के खिलाफ नहीं होने देगा।
हाल ही में यह मामला तब और बिगड़ गया जब अफ़गानिस्तान ने पाकिस्तान पर काबुल के अंदर हवाई हमले करने का आरोप लगाया। पाकिस्तान भले ही खुलकर यह बात न माने, लेकिन वह पहले भी TTP के ठिकानों को निशाना बनाने के नाम पर अफ़गानिस्तान के अंदर हमले करता रहा है।
फिलहाल, सऊदी अरब और क़तर की कोशिशों के बाद गोलीबारी तो रुकी है, लेकिन दोनों देशों के बीच सभी बॉर्डर सील हैं और तनाव किसी भी वक़्त फिर से भड़क सकता है।