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मौत के मुंह से निकलकर वर्ल्ड कप में इतिहास: रो पड़े राउल जिमेनेज

फुटबॉल की दुनिया में हुनरमंद खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जिनकी जिंदगी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से भी ज्यादा रोमांचक और प्रेरणादायक होती है। फीफा विश्व कप 2026 के पहले ही उद्घाटन मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से धूल चटाने के बाद इस समय पूरी दुनिया में मैक्सिको के स्टार स्ट्राइकर राउल जिमेनेज (Raul Jimenez) की चर्चा हो रही है। मैदान पर 67वें मिनट में गोल दागने के बाद जिमेनेज जिस तरह घुटनों के बल बैठकर फूट-फूटकर रोने लगे, उसने दुनिया भर के करोड़ों खेल प्रेमियों की आंखों को नम कर दिया। यह आंसू सिर्फ एक गोल की खुशी के नहीं थे, बल्कि इसके पीछे छुपा था छह साल पहले सिर के जानलेवा फ्रैक्चर का दर्द और हाल ही में अपने पिता को खोने का वो गहरा सदमा, जिससे उबरकर इस खिलाड़ी ने इतिहास रच दिया है। खेल संपादक वरुण मलिक की इस विशेष मोटिवेशनल डिजिटल रिपोर्ट में जानिए जिमेनेज के फर्श से अर्श तक पहुंचने का पूरा सफर।

आर्सेनल के खिलाफ मैच में जब थम गई थीं सांसें, खोपड़ी के फ्रैक्चर ने लगभग खत्म कर दिया था करियर

राउल जिमेनेज की यह कामयाबी इसलिए इतनी बड़ी है क्योंकि आज से ठीक छह साल पहले साल 2020 में एक इंग्लिश प्रीमियर लीग मैच के दौरान वह मौत के मुंह में पहुंच गए थे। उस समय ईएफएल चैम्पियनशिप क्लब वॉल्व्स (Wolverhampton Wanderers) की तरफ से खेलते हुए आर्सेनल के डिफेंडर डेविड लुइज़ के साथ उनकी हवा में इतनी भयंकर और जोरदार टक्कर हुई थी कि जिमेनेज की खोपड़ी (Skull) में फ्रैक्चर हो गया था और उनके मस्तिष्क में गंभीर अंदरूनी चोट आई थी। मैदान पर ही बेहोश हो चुके जिमेनेज को देखकर डॉक्टरों ने कह दिया था कि उनकी जान को बेहद खतरा है। लेकिन करीब आठ महीने तक चले लंबे और दर्दनाक इलाज के बाद इस जाबांज ने न सिर्फ जिंदगी की जंग जीती, बल्कि वापस उसी आक्रामकता के साथ फुटबॉल के मैदान पर वापसी कर हर किसी को हैरान कर दिया।

मार्च 2026 में सिर से उठा पिता का साया, विश्व कप के मैदान से आसमान की ओर हाथ उठाकर दी अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि

चोट के दर्द से उबरने के बाद इस खिलाड़ी के जीवन में दुखों का पहाड़ तब टूटा, जब इसी साल मार्च 2026 में उनके पिता का अचानक निधन हो गया। पिता की मौत ने जिमेनेज को भीतर से पूरी तरह तोड़ दिया था, लेकिन उन्होंने अपने देश के लिए विश्व कप खेलने के सपने को मरने नहीं दिया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच के 67वें मिनट में जब रॉबर्टो अल्वाराडो ने एक जादुई क्रॉस दिया, तो गोलपोस्ट के ठीक सामने मुस्तैद खड़े जिमेनेज ने चीते जैसी छलांग लगाई और दक्षिण अफ्रीकी गोलकीपर रॉनवेन विलियम्स को पूरी तरह छकाते हुए एक कड़क हेडर से गेंद को सीधे नेट के भीतर डाल दिया। गोल होते ही जिमेनेज अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए। वे मैदान पर ही रो पड़े और आसमान की तरफ हाथ उठाकर अपनी इस ऐतिहासिक सफलता को अपने दिवंगत पिता के चरणों में समर्पित कर दिया।

12 साल का लंबा इंतजार और चौथे विश्व कप में जाकर खुला किस्मत का ताला, घरेलू मैदान पर पूरा हुआ सपना

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि राउल जिमेनेज कोई नए खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि वे साल 2014, 2018 और 2022 के फीफा विश्व कप में भी मैक्सिकन नेशनल टीम का बेहद अहम हिस्सा रह चुके थे। लेकिन पिछले तीन विश्व कप और लगातार कई मैचों में खेलने के बावजूद वे कभी भी टूर्नामेंट में अपना पहला व्यक्तिगत गोल नहीं दाग पाए थे। आखिरकार 12 साल का लंबा इंतजार और उनका यह सूखा साल 2026 के इस ऐतिहासिक उद्घाटन मैच में खत्म हुआ। सोने पर सुहागा यह रहा कि उन्होंने यह कारनामा अपने देश के सबसे प्रतिष्ठित मैक्सिको सिटी स्टेडियम (Estadio Azteca) में अपने ही घरेलू फैंस के सामने कर दिखाया, जिसने इस पल को उनके पूरे फुटबॉल करियर का सबसे यादगार लम्हा बना दिया।

रेड कार्ड के चक्रव्यूह को भेदकर कोच जेवियर अगुइरे की टीम ने दर्ज की टूर्नामेंट की सबसे धमाकेदार जीत

मैच की बात करें तो दूसरे हाफ में मुकाबला बेहद रोमांचक और आक्रामक हो गया था। दोनों टीमों के बीच जबरदस्त फिजिकल गेम देखने को मिला, जिसके चलते दक्षिण अफ्रीका के दो खिलाड़ियों (याया सिथोले और थेम्बा ज़वाने) और मैक्सिको के कप्तान सेसार मोंटेस को रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर कर दिया गया था। दक्षिण अफ्रीका की टीम पहले ही दूसरे हाफ की शुरुआत में याया सिथोले के बाहर होने से 10 खिलाड़ियों के साथ खेल रही थी और कमजोर पड़ चुकी थी। जूलियन क्विनोन्स के 9वें मिनट के गोल के बाद, कोच जेवियर अगुइरे की रणनीति के तहत आगे बढ़ते हुए जिमेनेज ने जो दूसरा गोल दागा, उसने विपक्षी टीम 'बाफना बाफना' की वापसी के सारे रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए और मैक्सिको को इस टूर्नामेंट की सबसे भावनात्मक और यादगार जीत दिला दी।

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