विदेश से MBBS लाखों की फीस और अब UP में गरीब कोटे से सरकारी डॉक्टर EWS आरक्षण पर छिड़ा नया विवाद
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में सरकारी डॉक्टरों की भर्ती को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मामला उन डॉक्टरों से जुड़ा है जिन्होंने विदेश (Russia, Kyrgyzstan, आदि) से लाखों रुपये खर्च करके एमबीबीएस की डिग्री हासिल की और अब भारत लौटकर उत्तर प्रदेश सरकार में 'ईडब्ल्यूएस' (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) कोटे के तहत सरकारी नौकरी हासिल कर ली है। इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया और चिकित्सा जगत में आरक्षण के नियमों के दुरुपयोग को लेकर बहस तेज हो गई है।
क्या है पूरा विवाद? (The Big Question)
विवाद की मुख्य जड़ यह है कि विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने में आमतौर पर 25 से 50 लाख रुपये तक का खर्च आता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जो परिवार अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश भेजने और लाखों की फीस भरने में सक्षम हैं, वे 'आर्थिक रूप से कमजोर' (EWS) की श्रेणी में कैसे आ सकते हैं?
जांच के घेरे में आए बिंदु:
आय प्रमाण पत्र: क्या इन उम्मीदवारों ने ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट बनवाने के लिए अपनी पारिवारिक आय के सही आंकड़े पेश किए?
विदेश यात्रा का खर्च: विदेश में रहने, खाने और पढ़ाई का खर्च वहन करने वाले परिवार ईडब्ल्यूएस के 8 लाख रुपये सालाना आय के दायरे में कैसे फिट हुए?
नियमों की खामी: क्या सरकारी तंत्र में सत्यापन (Verification) के दौरान इन बारीकियों को नजरअंदाज किया गया?
यूपी सरकार का रुख
प्रांतीय चिकित्सा सेवा (PMS) के तहत हुई इन भर्तियों के बाद विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि नियुक्तियां केवल उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर की गई हैं जो उम्मीदवारों ने जमा किए थे। हालांकि, शिकायतें मिलने के बाद अब शासन स्तर पर इन डॉक्टरों के ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच की मांग उठ रही है।
सोशल मीडिया पर नाराजगी
इस खबर के बाहर आते ही उन मेधावी छात्रों में काफी रोष है जो वाकई आर्थिक रूप से कमजोर हैं और संसाधनों के अभाव में देश में ही कोचिंग तक नहीं कर पाते। लोगों का कहना है कि अगर सक्षम लोग इस कोटे का लाभ उठाएंगे, तो आरक्षण का मूल उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मामले में उच्च स्तरीय जांच होती है, तो कई डॉक्टरों की नियुक्तियां रद्द हो सकती हैं और फर्जी आय प्रमाण पत्र बनवाने के आरोप में कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। यह मामला भविष्य में ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को और सख्त बनाने का आधार बन सकता है।