Flagship Killer की विदाई? जब OnePlus खुद ही बन गया एक महंगा ब्रांड, तो क्या खो दी उसने अपनी पहचान?

Post

News India Live, Digital Desk: आज के दौर में जब हम स्मार्टफोन की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में आईफोन और सैमसंग के साथ एक नाम ज़रूर आता है वह है OnePlus। लेकिन आज जो कंपनी करोड़ों का टर्नओवर कर रही है, उसका किस्सा बड़ा फिल्मी है। इसकी शुरुआत किसी आलीशान बोर्डरूम में नहीं, बल्कि एक मामूली सी 'कॉफी शॉप' में हुई थी।

पिट लाउ और कार्ल पेई, ये दो लोग एक कॉफी पीते-पीते चर्चा कर रहे थे कि क्या कोई ऐसा फोन बन सकता है जो दुनिया के सबसे महंगे ब्रांड्स को टक्कर दे, वो भी आधी कीमत पर? और वहीं से जन्म हुआ उस टैगलाइन का जिसने बाजार हिला दिया 'Flagship Killer'

जब वनप्लस 'शौक' नहीं, 'इमोशन' था
मुझे याद है वो वक्त, जब वनप्लस का पहला फोन (OnePlus One) खरीदने के लिए लोग 'इनवाइट' (Invite) का इंतज़ार करते थे। फोन खरीदना किसी मेडल जीतने जैसा था। कंपनी की ऑक्सीजन ओएस (OxygenOS) इतनी साफ़ और तेज़ थी कि आईफोन इस्तेमाल करने वाले भी वनप्लस की ओर खिंचे चले आते थे। वह दौर था जब वनप्लस सच में टेक प्रेमियों की जान था।

ओप्पो के साथ मेल और बदलता मिज़ाज
कहते हैं न कि बदलाव ही दुनिया का नियम है, पर कभी-कभी ये बदलाव चाहने वालों को पसंद नहीं आता। जब वनप्लस ने ओप्पो के साथ अपनी टीम और सॉफ्टवेयर को पूरी तरह मिलाना शुरू किया, तो ब्रांड की वो 'न निराली' बात कम होने लगी। ऑक्सीजन ओएस अब कलर ओएस जैसा लगने लगा। कार्ल पेई ने कंपनी छोड़ दी, और धीरे-धीरे वनप्लस की कीमत 'फ्लैगशिप किलर' से बढ़कर खुद एक 'महंगा फ्लैगशिप' हो गई।

अब वनप्लस के पास वो फ़ास्ट चार्जिंग है, वो बढ़िया कैमरा भी है, लेकिन क्या वो 'हेंडरसेट' वाला सुकून है? आज का वनप्लस उन फ्लैगशिप को 'किल' नहीं कर रहा, बल्कि उनकी दौड़ में खुद को शामिल करने की जद्दोजहद कर रहा है।

क्या ये सफर खत्म होने की ओर है?
आज लोग पूछ रहे हैं—क्या वनप्लस का वो सफर जो कॉफी शॉप से शुरू हुआ था, अब अपने आख़िरी स्टेशन पर है? असल में, कंपनी ख़त्म नहीं हो रही, बस उसकी वो 'स्पेशल पहचान' धुंधली हो गई है। हालिया लॉन्च (जैसे वनप्लस 13) बहुत पावरफुल हैं, पर वो पुरानी वाली एक्साइटमेंट थोड़ी ठंडी पड़ गई है।

सच तो ये है कि टेक की दुनिया बहुत बेरहम है। यहाँ अगर आप अपनी ओरिजिनल पहचान खोते हैं, तो यूज़र्स बहुत जल्दी आगे बढ़ जाते हैं। अब ये तो आने वाला वक्त बताएगा कि क्या वनप्लस फिर से कोई चमत्कार कर पाएगा, या वह बाज़ार का एक और आम ब्रांड बनकर रह जाएगा।

अगर आप भी पुराने वनप्लस यूजर हैं, तो आपको भी वो साफ़ सुथरा सॉफ्टवेयर और सस्ती कीमत वाला जोश ज़रूर याद आता होगा। आखिर यादें भी तो किसी कॉफी शॉप की तरह मीठी ही होती हैं!