Exit Poll Reality Check : जब फेल हुए दिग्गजों के दावे बंगाल से केरल तक, क्या 2021 में सच साबित हुए थे चुनावी अनुमान?
News India Live, Digital Desk: देश में जब भी चुनावों का बिगुल बजता है, तो मतदान के आखिरी चरण के बाद सबकी नजरें 'एग्जिट पोल' पर टिक जाती हैं। हर कोई यह जानने को बेताब रहता है कि सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा। लेकिन क्या ये एग्जिट पोल हमेशा सटीक होते हैं? साल 2021 के विधानसभा चुनावों के नतीजे कुछ ऐसी ही कहानी बयां करते हैं, जहां कई राज्यों में सर्वे एजेंसियों के दावे धरे के धरे रह गए थे। आइए याद करते हैं बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु के उन आंकड़ों को जिन्होंने सबको चौंका दिया था।
पश्चिम बंगाल: 'दीदी' के करिश्मे ने पलटी एग्जिट पोल की बाजी
2021 के चुनावों में सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल की थी। भाजपा और टीएमसी के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही थी। कई प्रमुख एग्जिट पोल, जैसे 'जन की बात' और 'रिपब्लिक-CNX' ने भाजपा को बहुमत के करीब दिखाया था। कइयों का अनुमान था कि भाजपा 140 से 150 सीटें जीत सकती है। हालांकि, जब 2 मई को नतीजे आए, तो ममता बनर्जी की टीएमसी ने 213 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि भाजपा 77 सीटों पर ही सिमट गई। यहां अधिकांश एग्जिट पोल पूरी तरह धराशायी नजर आए।
असम: जहां अनुमानों ने पकड़ी सही नब्ज
बंगाल के उलट, असम में एग्जिट पोल के नतीजे काफी हद तक हकीकत के करीब रहे। इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया और चाणक्य जैसे सर्वे ने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन (NDA) की वापसी की भविष्यवाणी की थी। नतीजों में भी यही दिखा—NDA ने 75 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी। असम उन चुनिंदा राज्यों में से था जहां सर्वेयरों का गणित सटीक बैठा और सत्ता विरोधी लहर के दावे हवा हो गए।
केरल और तमिलनाडु: एलडीएफ और डीएमके का दबदबा
केरल के इतिहास में दशकों से चली आ रही परंपरा (हर 5 साल में सरकार बदलना) को लेकर संशय था, लेकिन एग्जिट पोल ने एलडीएफ (LDF) की वापसी के संकेत दिए थे। नतीजों में पिनाराई विजयन ने शानदार जीत दर्ज की। वहीं, तमिलनाडु में लगभग सभी सर्वे एजेंसियों ने एमके स्टालिन के नेतृत्व वाले डीएमके (DMK) गठबंधन की बड़ी जीत का अनुमान लगाया था, जो बिल्कुल सही साबित हुआ। तमिलनाडु में एआईएडीएमके का किला ढह गया और दस साल बाद सत्ता परिवर्तन हुआ।
पुडुचेरी: छोटा राज्य पर सटीक विश्लेषण
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी एग्जिट पोल का प्रदर्शन बेहतर रहा। यहां एनआर कांग्रेस और भाजपा गठबंधन की जीत की भविष्यवाणी की गई थी। मतदान के बाद जब पेटियां खुलीं, तो आंकड़ों ने सर्वे के दावों पर मुहर लगा दी और वहां एनडीए की सरकार बनी। 2021 के ये आंकड़े आज भी हमें याद दिलाते हैं कि राजनीति में जनता का मूड भांपना इतना आसान नहीं है, खासकर जब मुकाबला 'कांटे' का हो।